रशियन जर्नलिस्ट की खोज से खुला सुसाइड गेम ‘ब्लू व्हेल’ का राज, जानें पूरा सच

ब्लू व्हेल गेम इन दिनों भारत समेंत दुनिया के करीब दो दर्जन देशों में चर्चा की वजह बना हुआ है। इस गेम को खेलने वाले 10 से 16 साल के बच्चे इस गेम के टास्क में फंसकर आत्महत्या कर लेते हैं, और दुनिया के सामने उनकी मौत एक सवाल बनकर रह जाती है। अब तक ब्लू व्हेल गेम के चलते दुनिया भर में हजारों बच्चे स्वयं को नुकसान पहुंचा चुके हैं, जबकि सैकड़ों बच्चे मौत को गले लगा चुके हैं।

आमतौर पर बच्चों के खेल उनके मानसिक और शारीरिक विकास का कारण बनते हैं, लेकिन ब्लू व्हेल इसके उलट बच्चों की मौत का कारण बन रहा है। ब्लू व्हेल गेम की असलियत की जानकारी करने के लिए जब छानबीन की गई तो पता चला कि इस खेल को डिजायन ही मौत बांटने के लिए किया गया था। इस गेम को डिजायन करने वाला व्यक्ति मानसिक रूप से बीमार और एक मनोविज्ञान का छात्र था। जिसने अपनी मानसिक विकृति और मनोविज्ञान के ज्ञान का प्रयोग लोगों को आत्महत्या के लिए मजबूर करने के लिए किया।

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रूस से शुरू हुआ ब्लू व्हेल चैलेंज गेम —

ब्लू व्हेल के इतिहास के बारे में जानकारी करने पर पता चला कि इस गेम को फिलिप बुदेइकिन नामक मनोविज्ञान के छात्र रह चुके व्यक्ति ने डिजायन किया था। फिलिप बुदेइकिन एक तरह की मानसिक विकृति से ग्रसित था जिस वजह से उसे यूनीवर्सिटी ने रस्टीकेट कर दिया था।

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जिसके बाद फिलिप बुदेइकिन ने अपनी काबलियत दिखाने के लिए 2013 में ब्लू व्हेल चैलेंज गेम को डिजायन किया। जिसे आजमाने के लिए उसने रशियन सोशल नेटवर्किंग साइट वीके पर एक ग्रुप बनाया जिसका नाम था एफ57 और ग्रुप के लोग इसे डेथ ग्रुप भी कहते थे। फिलिप ने इस ग्रुप से 12 से 16 साल की उम्र के बच्चों को जोड़ना शुरू किया। उसकी इस सोच के पीछे मनोवैज्ञानिक कारण था। फिलिप को मालूम था कि इस उम्र के बच्चों की सोच को प्रभावित करना सबसे आसान काम होता है।

रूस में इस दौरान कुछ बच्चों की आत्महत्या की खबरों ने सुर्खियां बटोरीं। ये सभी घटनाएं पुलिस के सामने किसी पहेली की तरह थीं, लेकिन पुलिस ने कोई सुराग या वजह सामने न आने पर इन मामलों को ठंडे बस्ते में डाल दिया। 2016 में एक पत्रकार को इन घटनाओं में एक कनेक्शन नजर आया। उस पत्रकार की तहकीकात ब्लू व्हेल चैलेंज तक जाकर रुकी। इस पत्रकार की रिपोर्ट ने रूस में तहलका मचा दिया। रातों रात लोग ब्लू व्हेल के बारे में जानने की कोशिश करने लगे।

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व्लू व्हेल गेम का नाम मीडिया में आने के बाद हालात और खराब हो गए। बड़ी तादात में बच्चों ने ब्लू व्हेल खेलना शुरू कर दिया। कुछ दिनों बाद रूस की मीडिया में ​ब्लू व्हेल गेम को 16 युवतियों की सुसाइड के लिए कारण बताया गया। जिसके बाद रूसी एजेंसियों ने फिलिप बुदेइकिन को हिरासत में लिया। अदालत ने फिलिप बुदेइकिन को सुसाइड प्रिवेंशन एक्ट के तहत दोषी करार देते हुए सजा सुना दी।

फिलिप बुदेइकिन की गिरफ्तारी के साथ ब्लू व्हेल ने दूसरे देशों में मिली पहचान —

रूस में फिलिप बुदेइकिन को मिली सजा की खबर ने ब्लू व्हेल चैलेंज को इंटरनेट के जरिए दुनिया भर के लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचा। जिसके बाद इस गेम ने नए दुनिया भर में बच्चों को अपनी जद में लेकर मौत के मुंह में धकेलना शुरु कर दिया। अब तक इस गेम के चलते चीन, अमेरिका, भारत, इटली, ब्राजील और बुल्गेरिया समेंत करीब दो दर्जन देशों में अपना रंग दिखाया। जब तक प्रशासन को इस गेम की खबर मिली बड़ी तादात में बच्चे इस गेम का शिकार बन चुके थे। अब इस गेम को प्रतिबंधित करने की पहल हो रही है।

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समाज को साफ करना चाहता था फिलिप बुदेइकिन —

ब्लू व्हेल चैलेंज के चलते जान गंवाने वाले बच्चों की मौत फिलिप बुदेइकिन के लिए खुशी की खबर होती थी। अपने एक बयान में उसने कबूल किया था कि वह लोगों को सुसाइड करवाकर समाज को साफ करना चाहता था। उसकी नजर में जो लोग समाज को कुछ नहीं दे सकते उन्हें जिन्दा नहीं होना चाहिए।

फिलिप बुदेइकिन के बयान के बाद अंदाजा यही लगाया जा सकता है कि वह बच्चों को ऐसी ही बातें करके अपना शिकार बनाता होगा। अब यह काम उसके जैसे ही कुछ मानसिक रूप से बीमार लोग कर रहे हैं। जो मां बाप अपने बच्चों पर यह सोच कर नजर नहीं रखते कि अब वे बड़े हो रहे हैं, अपने काम और अपना ध्यान खुद रख सकते हैं, उनके लिए ब्लू व्हेल गेम एक सीख है।बच्चे इंटरनेट पर रात भर क्या करते हैं, उन्हे कितनी देर इंटरनेट यूज करना है, ऐसी कई बातें हैं जो बदलते दौर के साथ मां बाप को अपनी आदतों में लाने की जरूरत है। क्योंकि आज अगर ब्लू व्हेल प्रतिबंधित हो गया है तो आने वाले समय में ऐसी ही कोई और समस्या खड़ी हो सकती है। इसलिए बेहतर है कि आप अपने बच्चों से संवाद बनाए रखें उनकी दिनचर्या पर नजर रखें और घर से बाहर जाने पर वापसी के बाद उनसे पूरी जानकारी लें। अपने बच्चों के दोस्तों के बारे में पूरी जानकारी रखें।

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