जासूस एली कोहेन जिसके दम पर इजरायल ने 6 दिन में 5 देशों को हरा दिया

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जासूस एली कोहेन जिसके दम पर इजरायल ने 6 दिन में 5 देशों को हरा दिया

नई दिल्ली। इज़रायल का एक ऐसा जासूस जो 5 देशों के खिलाफ सिर्फ 6 दिन में जीत दर्ज कराई। कुछ ऐसी कहानी लेकर आई है नेटफ्लिकस की नई वेब सीरीज़ ‘द स्पाई’। 6 एपिसोड की यह सीरीज़ इज़राइली जासूस एली कोहेन के ऊपर आधारित है। एली को मोसाद (इजराइली खुफिया विभाग) का सबसे बहादुर जासूस माना जाता है।  

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नेटफ्लिक्स पर हाल ही में एक वेब सीरीज़ आई है, जिसका नाम है ‘द स्पाई’। ये कहानी एली कोहेन की है, जो मोसाद का एक जासूस था। जिसने अपनी जिंदगी के 5 साल सीरिया में बतौर जासूस गुजारे और अपने देश इजरायल की इतनी मदद की कि जंग में सिर्फ 6 दिनों में इजरायल ने सीरिया और उसके साथियों को मात दे दी।  

कहा जाता है कि एली के ही दम पर इजराइल साल 1967 की मिडल ईस्ट वॉर में जीत दर्ज की थी। नेटफ्लिक्स की नई वेब सीरीज़ ‘द स्पाई’ 1960 के दशक में उभरी राजनीतिक परिस्थियों की कहानी है। जिसमें एक जासूस मुख्य रोल में है। 6 एपिसोड की इस सीरीज़ का एक एपिसोड लगभग 50 मिनट का है।  

जब मोसाद ने शुरू किया अपना मिशन

एली कोहेन 1960 में इजरायली खुफिया विभाग से जुड़े और काम शुरू किया। एक साल बाद ही उन्हें सीरिया में जासूसी करने के लिए ट्रेन करना शुरू कर दिया गया और एक कारोबारी बनाकर किसी तरह सीरिया पहुंचाया गया। कामिल अमीन थाबेत जो एक एक्सपोर्ट का काम करता था, उसने सीरिया के दमिश्क में अपना बिजनेस शुरू किया।

दमिश्क राजधानी थी, इसलिए सत्ता यहां पर ही थी। पैसों का इस्तेमाल कर कामिल अमीन थाबेत उर्फ एली कोहेन बड़े लोगों की नजर में आना शुरू हो गए। जिसके बाद उन्होंने सेना में अधिकारियों से संबंध बढ़ाए, जनरल के भतीजे से दोस्ती कर ली। उसी की मदद से बॉर्डर तक पहुंचे, ऐसे स्थानों पर पहुंचे जहां से सीरिया इजरायल के खिलाफ साजिश रचता था।

कौन था एली कोहेन

एली कोहेन की जासूसी की कहानी बहुत फेमस है। मिस्र में जन्मे एली कोहन मोसाद ज्वॉइन करने के बाद पहले अर्जेंटीना गए। इसके बाद वह सीरिया पहुंचे। वहां उन्होंने धीरे-धीरे अपना रुतबा बढ़ाया। साल 1962 में जब वह सीरिया की राजधानी दमिश्क पहुंचे, तब उन्होंने सत्ता के गलियारों में पैठ बनाई। उनकी पहुंच का अंदाजा आप ऐसे लगा सकते हैं कि वह उस वक्त के राष्ट्रपति अमीन अल-हफ़ीज़ उन्हें डिप्टी डिफेंस मिनिस्टर बनाना चाहते थे। हालांकि, वे पकड़े गए और साल 1966 में दमिश्क में एक सार्वजनिक चौराहे पर फांसी दी गई। पकड़ जाने से पहले एली सीरिया के चीफ डिफेंस एडवाइज़र थे।  

नई दिल्ली। इज़रायल का एक ऐसा जासूस जो 5 देशों के खिलाफ सिर्फ 6 दिन में जीत दर्ज कराई। कुछ ऐसी कहानी लेकर आई है नेटफ्लिकस की नई वेब सीरीज़ 'द स्पाई'। 6 एपिसोड की यह सीरीज़ इज़राइली जासूस एली कोहेन के ऊपर आधारित है। एली को मोसाद (इजराइली खुफिया विभाग) का सबसे बहादुर जासूस माना जाता है।   नेटफ्लिक्स पर हाल ही में एक वेब सीरीज़ आई है, जिसका नाम है ‘द स्पाई’। ये कहानी एली कोहेन की है, जो मोसाद का एक जासूस था। जिसने अपनी जिंदगी के 5 साल सीरिया में बतौर जासूस गुजारे और अपने देश इजरायल की इतनी मदद की कि जंग में सिर्फ 6 दिनों में इजरायल ने सीरिया और उसके साथियों को मात दे दी।   कहा जाता है कि एली के ही दम पर इजराइल साल 1967 की मिडल ईस्ट वॉर में जीत दर्ज की थी। नेटफ्लिक्स की नई वेब सीरीज़ 'द स्पाई' 1960 के दशक में उभरी राजनीतिक परिस्थियों की कहानी है। जिसमें एक जासूस मुख्य रोल में है। 6 एपिसोड की इस सीरीज़ का एक एपिसोड लगभग 50 मिनट का है।   जब मोसाद ने शुरू किया अपना मिशन एली कोहेन 1960 में इजरायली खुफिया विभाग से जुड़े और काम शुरू किया। एक साल बाद ही उन्हें सीरिया में जासूसी करने के लिए ट्रेन करना शुरू कर दिया गया और एक कारोबारी बनाकर किसी तरह सीरिया पहुंचाया गया। कामिल अमीन थाबेत जो एक एक्सपोर्ट का काम करता था, उसने सीरिया के दमिश्क में अपना बिजनेस शुरू किया। दमिश्क राजधानी थी, इसलिए सत्ता यहां पर ही थी। पैसों का इस्तेमाल कर कामिल अमीन थाबेत उर्फ एली कोहेन बड़े लोगों की नजर में आना शुरू हो गए। जिसके बाद उन्होंने सेना में अधिकारियों से संबंध बढ़ाए, जनरल के भतीजे से दोस्ती कर ली। उसी की मदद से बॉर्डर तक पहुंचे, ऐसे स्थानों पर पहुंचे जहां से सीरिया इजरायल के खिलाफ साजिश रचता था। कौन था एली कोहेन एली कोहेन की जासूसी की कहानी बहुत फेमस है। मिस्र में जन्मे एली कोहन मोसाद ज्वॉइन करने के बाद पहले अर्जेंटीना गए। इसके बाद वह सीरिया पहुंचे। वहां उन्होंने धीरे-धीरे अपना रुतबा बढ़ाया। साल 1962 में जब वह सीरिया की राजधानी दमिश्क पहुंचे, तब उन्होंने सत्ता के गलियारों में पैठ बनाई। उनकी पहुंच का अंदाजा आप ऐसे लगा सकते हैं कि वह उस वक्त के राष्ट्रपति अमीन अल-हफ़ीज़ उन्हें डिप्टी डिफेंस मिनिस्टर बनाना चाहते थे। हालांकि, वे पकड़े गए और साल 1966 में दमिश्क में एक सार्वजनिक चौराहे पर फांसी दी गई। पकड़ जाने से पहले एली सीरिया के चीफ डिफेंस एडवाइज़र थे।