नवाबों के शहर लखनऊ की हवा हुई सबसे जहरीली, प्रदूषण ने ली मासूम की जान

लखनऊ| दिल्ली की जहरीली धुंध ने अब यूपी की राजधानी लखनऊ को अपने आगोश में ले लिया है| आलम यह है कि ज्यादा देर तक लखनऊ की हवा में रहने से ब्रेन और फेफड़े भी डैमेज हो सकते हैं| प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अनुसार देश में सबसे खतरनाक जहरीली हवा लखनऊ की है जो सामान्य से नौ गुना ज्यादा खतरनाक हो चुकी है| राजधानी में प्रदूषण का लेवल मंगलवार के मुकाबले बुधवार को बढ़ा तो एयर क्वालिटी इंडेक्स बढ़कर 494 पर पहुंच गया| मंगलवार को यह 491 था|




आईआईटीआर की जांच में राजधानी की हवा में सबसे जहरीले कण PM-1 (पार्टिकुलेट मैटर-1) मिले हैं| आईआईटीआर के मुताबिक इन पार्टिकल्स का साइज 1 मॉइक्रॉन या उससे भी कम है| यह पहली बार है जब राजधानी में सबसे हानिकारक माने जाने वाले इन पार्टिकल्स की मौजूदगी का पता चला है| एक्सपर्ट्स के मुताबिक, इनसे हार्ट अटैक, लंग कैंसर, डिमेंशिया, एंफीसेमा, इडेमा और नसों के डैमेज होने का खतरा रहता है| विशेषज्ञों के अनुसार प्रदूषण फेफड़े में संक्रमण, अस्थमा, सांस की समस्या, लोअर ट्रैक इंफेक्शन, हार्ट डिजीज, ब्रेन स्ट्रोक का कारण तो बन ही रहा है बल्कि इससे स्किन एलर्जी, इम्यून सिस्टम में गड़बड़ी, बाल झड़ने की समस्या भी हो सकती है|

बीते बुधवार को राजधानी में प्रदूषण के चलते व अस्पताल की बदइंतजामी के कारण एक मासूम की जान चली गई| सांस की गंभीर बिमारी से पीड़ित मासूम को डॉक्टर एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल दौड़ाते रहे| करीब 7 घंटे तक परिवार वाले मासूम को भर्ती करने के लिए इधर उधर भटकते रहे| इलाज के अभाव में मासूम की मौत हो गई| मवैया निवासी धर्मेन्द्र अपने बच्चे के साथ बुधवार सुबह टहलने के लिए निकले| इसी बीच उसे तेज सर्दी बुखार हो गया| दिक्कत बढ़ने पर धर्मेन्द्र उसे केजीएमयू, सिविल और फिर लोहिया अस्पताल ले गए| कहीं भी बच्चे को भर्ती नहीं किया गया जिससे उसकी मौत हो गई|



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