गांव वालों ने आर्थिक सर्वे टीम को NRC वाले समझकर भगाया, हाथापाई भी की

NRC
UP: नोएडा में सरकारी कर्मचारी को NRC का सर्वेयर समझकर पीटा गया

बिजनौर: सरकार अभी तक एनआरसी पर संसद में कोई प्रस्ताव तक नही लाई और न ही इस पर कभी कोई घोषणा की फिर भी देश में इसके खिलाफ विपक्षी पार्टियों ने ऐसा बीज बोया कि अल्पसंख्यक समाज के लोग पूरी तरह से गुमराह हो गये। और इसी का नतीजा है कि जिसके बारे में लोगों का जानकारी तक नही है, लोग उस चीज का हिंसक तरीके से विरोध कर रहे हैं। ऐसा ही मामला ​उत्तर प्रदेश के बिजनोर में देखने को मिला जहां आर्थिक सर्वे करने पंहुची टीम को गांवा एनआरसी टीम समझ लिया और हाथापाई करते हुए उन्हे भगा दिया।

The Villagers Turned The Economic Survey Team Into Nrc And Also Scrambled :

नागरिकता संशोधन कानून और राष्ट्रीय नागरिक पंजी को लेकर लोगों में इस तरह से खौफ है कि लोग किसी भी हालात में इसे लागू नही करने देना चाहते हैं। हालांकि सरकार बार बार कह रही है कि इन सबसे किसी भी भारतीय नागरिक को कोई डर नही है फिर भी लोग लगातार विरोध जता रहे हैं। बुधवार को बिजनौर में आर्थिक गणनाकारों की एक टीम ने जिला मजिस्ट्रेट को खत लिखकर शिकायत दर्ज करवाई है कि जिले के अल्पसंख्यक ​इलाकों में ‘गलत जानकारी की वजह से’ उन्हें लोगों के विरोध का सामना करना पड़ रहा है।

जिला आर्थिक एवं सांख्यिकी अधिकारी हरेंद्र मलिक ने कहा, हमारी टीमों को अल्पसंख्यक-बहुल इलाकों में विरोध का सामना करना पड़ा रहा है, क्योंकि लोग इसे एनआरसी से जोड़ रहे हैं। टीम के कुछ सदस्यों के साथ हाथापाई की गई। हरेंद्र मलिक ने बताया, अब हमने ग्राम प्रमुखों तथा निगमाध्यक्षों से सर्वे करने तथा लोगों को समझाने में हमारी टीमों की मदद करने के लिए कहा है। हमारी टीमें उन्हें समझाने के प्रयास कर रही हैं कि यह रूटीन काम है, जो सालों से होता आ रहा है, इसका NRC या CAA से कोई लेना-देना नहीं है।

उन्होंने यह भी कहा कि वह जनता के प्रतिनिधियों के साथ बैठकें करने की योजना बना रहे हैं, जिनमें ग्राम प्रमुख तथा निगमाध्यक्ष भी शामिल होंगे, ताकि वे इस कन्फ्यूज़न को दूर कर सकें। आपको बता दें कि बिजनौर में सातवीं आर्थिक जनगणना की शुरुआत डीएम रमाकांत पांडे ने 6 फरवरी को की थी। वहीं शिकायत मिलने के बाद डीएम कहा, अगर टीमों को किसी समस्या का सामना करना पड़ रहा है, तो हम उसे ठीक करेंगे। आर्थिक जनगणना में किसी भी प्रकार की बाधा सहन नहीं की जाएगी।

बिजनौर: सरकार अभी तक एनआरसी पर संसद में कोई प्रस्ताव तक नही लाई और न ही इस पर कभी कोई घोषणा की फिर भी देश में इसके खिलाफ विपक्षी पार्टियों ने ऐसा बीज बोया कि अल्पसंख्यक समाज के लोग पूरी तरह से गुमराह हो गये। और इसी का नतीजा है कि जिसके बारे में लोगों का जानकारी तक नही है, लोग उस चीज का हिंसक तरीके से विरोध कर रहे हैं। ऐसा ही मामला ​उत्तर प्रदेश के बिजनोर में देखने को मिला जहां आर्थिक सर्वे करने पंहुची टीम को गांवा एनआरसी टीम समझ लिया और हाथापाई करते हुए उन्हे भगा दिया। नागरिकता संशोधन कानून और राष्ट्रीय नागरिक पंजी को लेकर लोगों में इस तरह से खौफ है कि लोग किसी भी हालात में इसे लागू नही करने देना चाहते हैं। हालांकि सरकार बार बार कह रही है कि इन सबसे किसी भी भारतीय नागरिक को कोई डर नही है फिर भी लोग लगातार विरोध जता रहे हैं। बुधवार को बिजनौर में आर्थिक गणनाकारों की एक टीम ने जिला मजिस्ट्रेट को खत लिखकर शिकायत दर्ज करवाई है कि जिले के अल्पसंख्यक ​इलाकों में 'गलत जानकारी की वजह से' उन्हें लोगों के विरोध का सामना करना पड़ रहा है। जिला आर्थिक एवं सांख्यिकी अधिकारी हरेंद्र मलिक ने कहा, हमारी टीमों को अल्पसंख्यक-बहुल इलाकों में विरोध का सामना करना पड़ा रहा है, क्योंकि लोग इसे एनआरसी से जोड़ रहे हैं। टीम के कुछ सदस्यों के साथ हाथापाई की गई। हरेंद्र मलिक ने बताया, अब हमने ग्राम प्रमुखों तथा निगमाध्यक्षों से सर्वे करने तथा लोगों को समझाने में हमारी टीमों की मदद करने के लिए कहा है। हमारी टीमें उन्हें समझाने के प्रयास कर रही हैं कि यह रूटीन काम है, जो सालों से होता आ रहा है, इसका NRC या CAA से कोई लेना-देना नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि वह जनता के प्रतिनिधियों के साथ बैठकें करने की योजना बना रहे हैं, जिनमें ग्राम प्रमुख तथा निगमाध्यक्ष भी शामिल होंगे, ताकि वे इस कन्फ्यूज़न को दूर कर सकें। आपको बता दें कि बिजनौर में सातवीं आर्थिक जनगणना की शुरुआत डीएम रमाकांत पांडे ने 6 फरवरी को की थी। वहीं शिकायत मिलने के बाद डीएम कहा, अगर टीमों को किसी समस्या का सामना करना पड़ रहा है, तो हम उसे ठीक करेंगे। आर्थिक जनगणना में किसी भी प्रकार की बाधा सहन नहीं की जाएगी।