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अनिल अंबानी की 2 कंपनियों के शेयर की ट्रेडिंग पर लगी है रोक, जानें क्या है वजह

देश के प्रमुख उद्योगपति अनिल अंबानी (Anil Ambani) के रिलायंस समूह (Reliance Group) की लिस्टेड कंपनी रिलायंस कैपिटल (Reliance Capital)  में बीते कुछ कारोबारी दिन से  शेयर ट्रेडिंग (Trading of Shares)  नहीं हो रही है।  इसके बाद अब निवेशक शेयर की खरीद-बिक्री नहीं कर सकते हैं।

By संतोष सिंह 
Updated Date

मुंबई। देश के प्रमुख उद्योगपति अनिल अंबानी (Anil Ambani) के रिलायंस समूह (Reliance Group) की लिस्टेड कंपनी रिलायंस कैपिटल (Reliance Capital)  में बीते कुछ कारोबारी दिन से  शेयर ट्रेडिंग (Trading of Shares)  नहीं हो रही है।  इसके बाद अब निवेशक शेयर (Investor Shares)की खरीद-बिक्री नहीं कर सकते हैं। अनिल अंबानी (Anil Ambani)  की ये दूसरी कंपनी है जिसकी ट्रेडिंग पर रोक लगी हुई है। इससे पहले रिलायंस नवल एंड इंजीनियरिंग (Reliance Naval And Engineering) के शेयरों में भी ट्रेडिंग रोकी गई थी, जो अब तक बरकरार है। अब सवाल है कि ये ट्रेडिंग क्यों रोकी गई है। आइए इसे समझ लेते हैं।

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अनिल अंबानी (Anil Ambani)  की कंपनी रिलायंस कैपिटल (Reliance Capital) भारी कर्ज के बोझ तले दबी है। इस कंपनी को कर्ज देने वाले कर्जदाता अपना पैसा वसूल करना चाहते हैं। इसके लिए कंपनी को दिवालिया प्रक्रिया से गुजरना पड़ रहा है। मतलब ये कि कंपनी की बिक्री हो रही है। यही वजह है कि शेयर की डी-लिस्टिंग (De-Listing of Shares) की गई है यानी ट्रेडिंग रोक दी गई है।

आमतौर पर डी-लिस्टिंग (De-Listing) तब होता है जब कोई कंपनी अपने संचालन को रोक देती है या मर्जर, विस्तार या पुनर्गठन करना चाहती है। जो कंपनी नियमों का सही पालन नहीं करती है या दिवालिया प्रक्रिया में होती है तब भी ट्रेडिंग पर रोक लगती है। रिलायंस कैपिटल (Reliance Capital)  के साथ यही स्थिति है। जब कंपनी की डी-लिस्टिंग (De-Listing)  हुई तब शेयर का भाव 16.19 रुपये था। हालांकि, अब शेयर डीमैट में डेबिट कर दिए गए हैं।

खबर है कि रिलायंस कैपिटल के बोलीदाताओं ने कंपनी की समाधान प्रक्रिया के तहत बाध्यकारी या पक्की बोलियां देने की समय सीमा का चार महीने तक के लिए विस्तार करने का अनुरोध किया है। अमेरिका के एसेट मैनेजमेंट फंड एडवेंट ने 16 सप्ताह का विस्तार मांगा है जबकि पीरामल फाइनेंस ने 12 अतिरिक्त हफ्ते मतलब दिसंबर तक का वक्त मांगा है।

इसी तरह इंडसइंड बैंक (Indusind Bank) ने 10 हफ्ते का विस्तार, ओकट्री ने 12 हफ्ते का और ज्यूरिख रे ने आठ हफ्तों का विस्तार मांगा है। आपको बता दें कि राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (NCLT ) के पास अंतिम समाधान योजना दाखिल करने की समयसीमा एक नवंबर, 2022 है।

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बता दें कि अनिल अंबानी की रिलायंस नवल एंड इंजीनियरिंग (Reliance Naval And Engineering)  भी इंसॉल्वेंसी एंड बैंक्रप्‍सी कोड(Insolvency and Bankruptcy Code)  के तहत दि‍वालिया प्रक्रिया से गुजर रही है। इस वजह से रिलायंस नवल (Reliance Naval ) की भी डी-लिस्टिंग (De-Listing)  हो चुकी है और अब ट्रेडिंग नहीं होती है।

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