देश को अधिक विशेषज्ञ डाॅक्टरों की जरूरत: राजनाथ

विशेषज्ञ डाॅक्टर,राजनाथ सिंह
देश को अधिक विशेषज्ञ डाॅक्टरों की जरूरत: राजनाथ

लखनऊ। हमारे देश में विशेषज्ञ डाॅक्टरों को कमी है और इसको दूर करने के लिए हमने एक रोडमैप तैयार किया है। वैसे तो कई नये मेडिकल काॅलेज खुलने को हैं लेकिन फिर भी डाॅक्टरों की संख्या पर्याप्त होने में अभी दस साल का समय लग जाएगा। उक्त उदगार केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने बुधवार को अजंता हाॅस्पिटल एंड आईवी सेंटर में कार्डिएक कैथ लैब के शुभारंभ अवसर पर कही।

उन्होंने आगे कहा कि लखनउ शहर को अधिक काबिल डाॅक्टर और कुछ और सुपर स्पेशलिस्ट अस्पतालों की जरूरत है ताकि राजधानी के लोगों को इलाज के लिए मेट्रो शहरों की दौड़ नहीं लगानी पड़े। कार्यक्रम के दौरान सांसद राजनाथ सिंह ने डाॅक्टरों से बातचीत भी की। कार्यक्रम में करीब 150 डाॅक्टर उनसे मिलने आए थे। श्री राजनाथ सिंह के साथ मंच पर उपमुख्यमंत्री डाॅक्टर दिनेश शर्मा, स्वास्थ्य मंत्री डाॅक्टर सिद्वार्थ नाथ सिंह और मेयर संयुक्ता भाटिया भी मौजूद रहीं। डिप्टी सीएम श्री शर्मा ने कहा कि प्रधानमंत्री द्वारा लांच की गई स्वास्थ्य योजना देश के करीब 50 करोड़ लोगों को सीधी तौर पर मदद करेगी और देश में मेडिकल सुविधाओं की कायापलट कर देगी। प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री डाॅक्टर सिद्वार्थ नाथ सिंह ने इस अवसर पर कहा कि सरकारी अस्पताल इस दिशा में बेहतर भूमिका निभा रही हैं लेकिन उन पर दबाव बहुत ज्यादा है और ऐसी दशा में निजी अस्पतालों की जिम्मेदारी बढ़ जाती है उन मरीजों के प्रति जो इसे वहन कर सकते हैं। इस मौके पर राजनाथ सिंह ने प्रदेश में अपनी तरह की पहली अति आधुनिक चेस्ट पेेन एंबुलेंस का भी उदघाटन किया जो दिल का दौरा पड़ने की स्थिति में मरीज को अस्पताल लाने में द्रुत गति से काम करती है।

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अजंता अस्पताल में कैथ लैब का शुभारंभ

इस कार्डिएक कैथ लैब के लांच होने से अब इनको ये भरोसा हो गया है त्वरित चिकित्सा सुविधाओं से कम समय में उनके पास किसी की जान बचाने का सुनहरा अवसर है। आंकड़े गवाह है कि दिल की बीमारी के केस दिन प्रति दिन बढ़ते ही जा रहे हैं और पिछले कुछ सालों में ये 300 प्रतिशत बढ़ा है। अधिक बैठे रहने, काम का दबाव, व्यायाम न करना आैर एंजाइना दर्द से कैसे निबटना है इसकी जानकारी की कमी से इस बीमारी को आैर शह मिल रही है।

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हैरतंगेज बात ये भी है कि आज कल दिल के रोगियों की उम्र 25 से 55 साल के बीच है और यही उम्र पिछले कुछ साल में 55 वर्ष थी। एंजाइना मरीजों को अगर समय पर तुरंत इलाज मिल जाए तो 60 प्रतिशत मरीजों की जान बचाई जा सकती है। अजंता अस्पताल के प्रबंध निदेशक डॉ अनिल खन्ना का मानना है कि इस दिशा में सरकारी अस्पताल बेहतर भूमिका अदा कर रहे हैं लेकिन ये मरीजों की संख्या के बोझ तले दबे हैं। दुर्भाग्यपूर्ण ये भी है कि निजी अस्पताल अभी तक दिल की बीमारी से निबटने में सक्षम नहीं हुए। अक्सर ही हमें ये सुनने को मिलता है कि या तो कोई दिल का दौरा पड़ने से चल बसा या फिर नई दिल्ली या अन्य मेट्रो शहर के महंगे अस्तपाल में रेफर हुआ है। इस महत्ती जरूरत की कमी को पूरा करने की बहुत आवश्यकता थी इसलिए अजंता कार्डिएक केयर सेंटर लेकर आया आधुनिक कार्डिएक कैथ लैब ताकि एंजाइना दर्द अथवा दिल के दौरे के दौरान जान बचाई जा सके।

डॉ खन्ना ने बताया कि दिल के दौरे के दौरान शुरुआती 90 मिनट में की गई त्वरित कार्यवाही उन स्वर्णिम घंटों का हिस्सा होते हैं जिसकी बदौलत किसी की जान बचाई जा सकती है। अजंता अस्पताल एक नई अवधारणा लेकर आया है जिसमें एक फोन पर ही चेस्ट पेन एंबुलेंस मुहैया कराई जाएगी ताकि मरीज को जल्द से जल्द कम समय में अस्पताल लाया जा सके। इससे मरीज की जान तो बचेगी ही उसको आकस्मिक राहत देकर दिल को भी अधिक क्षतिग्रस्त होने से बचाया जा सकेगा।

हमारी कुशल विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम तकनीकी स्टाफ और अति आधुनिक मशीनों के साथ पीसीए प्रक्रिया से जान बचाने में माहिर हैं। एक प्रख्यात आैर परिणाम देने वाले अस्पताल के रूप में स्‍थापित अजंता अस्पताल की सूची में सम्मलित हैं ईसीएचएस, सीजीएचएस और दर्जनों सरकारी विभाग जैसे ईएसआईसी, एनटीपीसी और कई अन्य। हम इसके अलावा कई सरकारी कर्मचारियों को भी कैशलेस मेडिकल सुविधा देने में आगे आए हैं।

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लखनऊ। हमारे देश में विशेषज्ञ डाॅक्टरों को कमी है और इसको दूर करने के लिए हमने एक रोडमैप तैयार किया है। वैसे तो कई नये मेडिकल काॅलेज खुलने को हैं लेकिन फिर भी डाॅक्टरों की संख्या पर्याप्त होने में अभी दस साल का समय लग जाएगा। उक्त उदगार केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने बुधवार को अजंता हाॅस्पिटल एंड आईवी सेंटर में कार्डिएक कैथ लैब के शुभारंभ अवसर पर कही। उन्होंने आगे कहा कि लखनउ शहर को अधिक काबिल डाॅक्टर…
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