इस गांव में दुल्हन बनकर नहीं आना चाहती कोई लड़की!

हिंदुस्तान बदल रहा है. तेजी से विकास की राह पर दौड़ रहा है. हिंदुस्तान की आंखों में महाशक्ति बनने का सपना पल रहा है, लेकिन क्या ये वही हिंदुस्तान है जिसका सपना गांधी जी ने देखा था. भारत की आत्मा उसके गांवों में बसती है, और भारत का भविष्य गांवों के विकास के बगैर नहीं संवर सकता.

देश के एक ऐसे गांव का हाल बता रहा है, जहां बुनियादी सुविधाओं की कमी की वजह से कोई शादी नहीं होती. राजस्थान के धौलपुर के राजघाट गांव में कोई लड़की शादी करने को तैयार नहीं है क्योंकि वहां पीने के पानी के लिए जिंदगी को खतरे में डालना पड़ता है. यह गांव धौलपुर में मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के महल राज निवास से महज 5 किलोमीटर दूरी पर है. लेकिन फिर भी ये गांव बुनियादी सुविधाओं से महरूम है.

आजादी के 70 साल बाद भी ये गांव अंधकार युग में जी रहा है. ये गांव चंबल नदी के किनारे बिहड़ों में बसा है. धौलपुर के राजघाट गांव से महज एक किलोमीटर की दूरी पर दिल्ली-मुंबई हाईवे मौजूद है, लेकिन हाईवे से उतरते ही एक किलोमीटर का रास्ता मीलों दूर मालूम पड़ने लगता है.

राजघाट गांव में आज भी कोई नल या हैंडपाइप नहीं है. पानी की हर जरूरत के लिए यहां के लोग चंबल नदीं पर निर्भर हैं. गांव की महिलाएं हर रोज बड़े-बड़े बर्तन लेकर पानी भरने निकल पड़ती है, लेकिन नदी से साफ पानी मिल जाए इसकी कोई गारंटी नहीं है क्योंकि आए दिन नदी में कोई ना कोई लाश दिखती रहती है.

दरअसल, धौलपुर शहर का श्मशान घाट राजघाट गांव के किनारे बना है. श्मशान घाट पर जिन शवों को पानी में फेंक दिया जाता है. वो बहकर गांव की तरह ही जाती हैं. शवों की वजह से चंबल का पानी दूषित हो रहा है. लेकिन राजघाट गांव के लोगों को यही पानी पीना पड़ता है. मुसीबत सिर्फ इतनी ही नहीं है. चंबल नदी में मगरमच्छ का भी खतरा होता है. यहां हल्की सी चूक जिंदगी पर भारी पड़ती है.