इन अशुभ संकेतोंं को समझें, होगा बड़ा फायदा

Open door
इन अशुभ संकेतोंं को समझें, होगा बड़ा फायदा

These Are Bad Signal Before Starting Any Task

आजकल की जिन्दगी में समय की इतनी कमी है कि हम अपने आपस पास होने वाली कई छोटी छोटी घटनाओं को अनदेखा कर देते हैं। विशेषकर नई पीढ़ी जिसे शुभ और अशुभ के नाम पर अंधविश्वास ही समझ आता है। अगर कोई बड़ा बुजुर्ग समझाए भी तो वे इन बातों को अनसुना कर आगे बढ़ जाते हैं।

हमारी संस्कृति में कई ऐसी मान्यताएं हैं जिनका आधार लंबा अनुभव हैं। ऐसे अनुभव जिनको अंधविश्वास कहा जा सकता है, लेकिन नकारा नहीं जा सकता। हम जिस समाज में रहते हैं उसका बहुत बड़ा हिस्सा ऐसा है, जिसमें शुभ और अशुभ की मान्यता है। लेकिन इन मान्यताओं को हम महसूस करने की कोशिश करें तो ये आपको भी अपनी सोच बदलने पर मजबूर कर देंगी।

पहली घर से निकलते समय खाली पेट न निकलें। अगर नाश्ता या भोजन तैयार है तो देरी से बचने के नाम पर उस भोजन को ग्रहण किए बिना घर से न निकलें। मान्यता है कि घर से खाली पेट निकलने पर आपके बने बनाए काम बिगड़ सकते हैं।

घर से निकलते समय आपके कपड़ों का किसी दरवाजे या कील में फंस जाना। यह संकेत होता है कि आप जिस काम के लिए जा रहे हैं उसमें बाधा आने वाली है।

किसी जरूरी काम से निकलते समय खाली बाल्टी का नजर आना। यह एक तरह का अशुभ संकेत है जिसका अर्थ होता है कि आप का प्रयास असफल होगा।

अगर आप घर से निकले हैं और आपका रास्ता बिल्ली काट देती है, तो यह एक अशुभ संकेत है। बिल्ली को हिन्दू संस्कृति में नकारात्मक ऊर्जा का श्रोत माना गया है। ​इसलिए बिल्ली का रास्ता काटना असफलता का सूचक माना गया है।

उपाय —

अगर आपके रास्ते में भी ये अशुभ संकेत नज़र आते हैं तो जरूरी नहीं है कि आप अपने जरूरी काम को रोक दें या टाल दें। हमारी संस्कृति में ऐसी मान्यता है कि अशुभ संकेतों के समाने आने पर कुछ देर ठहर जाना चाहिए। बड़े बुजुर्गों की माने तो अगर बिल्ली आपका रास्ता काट जाती है तो आपको पीछे मुड़कर कुछ कदम या कुछ दूरी तय करनी चाहिए इसके बाद आप अपने रास्ते पर दोबारा लौट सकते हैं।

अगर आपको घर से निकलते ही कोर्ई अशुभ संकेत मिलता है तो इसका मतलब यह नहीं कि आप अपना काम धाम छोड़कर घर में बैठ जाएं। उपाय के तौर पर आप घर के भीतर जाकर मुंह झूठा कर, एक गिलास पानी पीकर या कुल्ला करके दोबारा अपने काम के लिए निकल सकते हैं।

आजकल की जिन्दगी में समय की इतनी कमी है कि हम अपने आपस पास होने वाली कई छोटी छोटी घटनाओं को अनदेखा कर देते हैं। विशेषकर नई पीढ़ी जिसे शुभ और अशुभ के नाम पर अंधविश्वास ही समझ आता है। अगर कोई बड़ा बुजुर्ग समझाए भी तो वे इन बातों को अनसुना कर आगे बढ़ जाते हैं। हमारी संस्कृति में कई ऐसी मान्यताएं हैं जिनका आधार लंबा अनुभव हैं। ऐसे अनुभव जिनको अंधविश्वास कहा जा सकता है, लेकिन नकारा नहीं…