ये है पवनपुत्र के 5 प्रसिद्ध मंदिर, पूरे देशभर में हैं विख्यात

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हिन्दू मान्यताओं में कई मंदिरो को सक्षात माना जाता हैं और कई देवी-देवताओं के मंदिर स्थापित हैं, जो अपनी-अपनी मान्यताओं के कारण बेहद प्रसिद्ध हैं। तो आईए जानतें है हनुमान जी के कुछ ऐसे ही अद्भुत मंदिरों के बारे जो न केवल भारत में बल्कि पूरे देशभर में विख्यात हैं।

These Are The 5 Famous Temples Of Pawanaputra Are Famous All Over The Country :

पवनपुत्र मंदिर इलाहाबाद


संगम बांध के ठीक नीचे हनुमान जी की एक विशाल मूर्ति है। यह अपने आप में अनोखी इसलिए है क्योंकि इसमें हनुमान जी को लेटे हुए विश्राम की स्थिति में दिखाया गया है। ऐसी मान्यता है कि हर साल बारिश के समय में गंगा जी का जल किनारों को पार करते हुए इस मंदिर तक आता है और हनुमान जी के चरणों का स्पर्श करने के बाद बाढ़ का पानी आगे नहीं बढ़ता बल्कि वहीं से वापस लौटने लगता है।

हनुमान गढ़ी, अयोध्या


हनुमान जी को समर्पित इस मंदिर को हनुमान जी का घर भी कहा जाता है। यह मंदिर अयोध्‍या में एक टीले पर स्थित है और यहां तक पहुंचने के लिए करीब 76 सीढ़ियां चढ़नी पड़ती हैं। हनुमान गढ़ी, वास्‍तव में एक गुफा मंदिर है जहां मां अंजनी और बाल हनुमान की मूर्ति है जिसमें हनुमान जी, अपनी मां अंजनी की गोदी में बालक रूप में लेटे हैं। लोगों का मानना है कि इस मंदिर में सभी मन्‍नतें पूरी होती हैं। साल भर इस मंदिर में भक्‍तों का तांता लगा रहता है।

सालासार बालाजी, राजस्थान


राजस्थान के चूरू जिले के सालासर गांव में है हनुमान जी का यह प्रसिद्ध मंदिर जिसे सालासर वाले बालाजी के नाम से जाना जाता है। हनुमानजी की यह प्रतिमा दाढ़ी-मूंछ से सुशोभित है। माना जाता है कि हनुमान जी की यह प्रतिमा एक किसान को जमीन जोतते समय मिली थी, जिसे सालासर में सोने के सिंहासन पर स्थापित किया गया। इस मंदिर में हर साल आश्विन, चैत्र और वैशाख की पूर्णिमा के दिन विशाल मेला लगता है।

संकटमोचन मंदिर वाराणसी


माना जाता है कि हनुमान जी के इस मंदिर का निर्माण गोस्वामी तुलसीदास जी ने कराया था। कहते हैं तुलसीदास जी ने रामचरितमानस का कुछ अंश संकटमोचन मंदिर के पास विशाल पीपल के पेड़े के नीचे बैठकर लिखा था। चैत्र महीने के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को यहां हनुमान जयंती धूमधाम से मनायी जाती है। इस दौरान मंदिर में बड़े स्तर पर कार्यक्रम आयोजित होता है। इसके अलावा हर मंगलवार और शनिवार को भी इस मंदिर में श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है।

गिरिजाबांध हनुमान मंदिर रतनपुर


संकट मोचक हनुमान जी के ब्रह्मचारी रूप से तो हर कोई परिचित है। लेकिन क्‍या आपने कभी सुना है कि एक ऐसा मंदिर भी है जहां नारी रूप में हनुमान जी की मूर्ति विराजित है। बिलासपुर के रतनपुर स्थित गिरिजाबंध के हनुमान मंदिर में पूजा करने के लिए लोग दूर-दूर से आते हैं। माना जाता है कि यह प्रतिमा करीब दस हजार साल पुरानी है। स्‍थानीय लोगों की मान्यता है कि जो भी व्यक्ति सच्चे मन से यहां उनकी पूजा करता है, उसकी मनोकामना जरूर पूरी होती है।

हिन्दू मान्यताओं में कई मंदिरो को सक्षात माना जाता हैं और कई देवी-देवताओं के मंदिर स्थापित हैं, जो अपनी-अपनी मान्यताओं के कारण बेहद प्रसिद्ध हैं। तो आईए जानतें है हनुमान जी के कुछ ऐसे ही अद्भुत मंदिरों के बारे जो न केवल भारत में बल्कि पूरे देशभर में विख्यात हैं। पवनपुत्र मंदिर इलाहाबाद
संगम बांध के ठीक नीचे हनुमान जी की एक विशाल मूर्ति है। यह अपने आप में अनोखी इसलिए है क्योंकि इसमें हनुमान जी को लेटे हुए विश्राम की स्थिति में दिखाया गया है। ऐसी मान्यता है कि हर साल बारिश के समय में गंगा जी का जल किनारों को पार करते हुए इस मंदिर तक आता है और हनुमान जी के चरणों का स्पर्श करने के बाद बाढ़ का पानी आगे नहीं बढ़ता बल्कि वहीं से वापस लौटने लगता है। हनुमान गढ़ी, अयोध्या
हनुमान जी को समर्पित इस मंदिर को हनुमान जी का घर भी कहा जाता है। यह मंदिर अयोध्‍या में एक टीले पर स्थित है और यहां तक पहुंचने के लिए करीब 76 सीढ़ियां चढ़नी पड़ती हैं। हनुमान गढ़ी, वास्‍तव में एक गुफा मंदिर है जहां मां अंजनी और बाल हनुमान की मूर्ति है जिसमें हनुमान जी, अपनी मां अंजनी की गोदी में बालक रूप में लेटे हैं। लोगों का मानना है कि इस मंदिर में सभी मन्‍नतें पूरी होती हैं। साल भर इस मंदिर में भक्‍तों का तांता लगा रहता है। सालासार बालाजी, राजस्थान
राजस्थान के चूरू जिले के सालासर गांव में है हनुमान जी का यह प्रसिद्ध मंदिर जिसे सालासर वाले बालाजी के नाम से जाना जाता है। हनुमानजी की यह प्रतिमा दाढ़ी-मूंछ से सुशोभित है। माना जाता है कि हनुमान जी की यह प्रतिमा एक किसान को जमीन जोतते समय मिली थी, जिसे सालासर में सोने के सिंहासन पर स्थापित किया गया। इस मंदिर में हर साल आश्विन, चैत्र और वैशाख की पूर्णिमा के दिन विशाल मेला लगता है। संकटमोचन मंदिर वाराणसी
माना जाता है कि हनुमान जी के इस मंदिर का निर्माण गोस्वामी तुलसीदास जी ने कराया था। कहते हैं तुलसीदास जी ने रामचरितमानस का कुछ अंश संकटमोचन मंदिर के पास विशाल पीपल के पेड़े के नीचे बैठकर लिखा था। चैत्र महीने के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को यहां हनुमान जयंती धूमधाम से मनायी जाती है। इस दौरान मंदिर में बड़े स्तर पर कार्यक्रम आयोजित होता है। इसके अलावा हर मंगलवार और शनिवार को भी इस मंदिर में श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है। गिरिजाबांध हनुमान मंदिर रतनपुर
संकट मोचक हनुमान जी के ब्रह्मचारी रूप से तो हर कोई परिचित है। लेकिन क्‍या आपने कभी सुना है कि एक ऐसा मंदिर भी है जहां नारी रूप में हनुमान जी की मूर्ति विराजित है। बिलासपुर के रतनपुर स्थित गिरिजाबंध के हनुमान मंदिर में पूजा करने के लिए लोग दूर-दूर से आते हैं। माना जाता है कि यह प्रतिमा करीब दस हजार साल पुरानी है। स्‍थानीय लोगों की मान्यता है कि जो भी व्यक्ति सच्चे मन से यहां उनकी पूजा करता है, उसकी मनोकामना जरूर पूरी होती है।