कैक्टस पौधे में पाए गए ये गुण, जोड़ों के दर्द और बवासीर की बीमारी में आता है काम

research on cactus found medical properties
कैक्टस पौधे में पाए गए ये गुण, जोड़ों के दर्द और बवासीर की बीमारी में आता है काम

लखनऊ। बंजर भूमि पर उगने वाले कांटेदार कैक्टस के पौधे को लोग फालतू समझते हैं। मगर क्या आप जानते हैं इस कांटेदार कैक्टस में एक ऐसी खूबी है जो लोगों की बीमारियों में काम आता है। कैक्टस के पौधे में ऐसा औषधीय गुण हैं जो जोड़ों के दर्द और बवासीर की समस्या से छुटकारा दिलाने में मदद करता है। हिमाचल में इस पौधे को लोग छूहीं के नाम से जानते हैं।

These Properties Found In Cactus Plants Joint Pain And Hemorrhoid Disease Comes In The Work :

मंडी के वल्लभ महाविद्यालय के वनस्पति शास्त्र विभाग ने रिसर्च कर इस बात का खुलासा किया है कि पर्यावरण, विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग की ओर से मिले एक प्रोजेक्ट के तहत शोध के दौरान छूहीं में कई औषधीय गुण सामने आए हैं जो गहरे जख्म को तेजी से भरने के साथ-साथ जोड़ों के दर्द और बवासीर की बीमारी में भी काम आता है।

मंडी कॉलेज में वनस्पति शास्त्र की विभागाध्यक्ष डॉ. तारा सेन ठाकुर ने बताया, ‘छूहीं कैक्टस से बनने वाले कई प्रकार के व्यंजन कॉलेज में शोध के दौरान भी तैयार किए गए। 6.40 लाख रुपये के इस प्रोजेक्ट पर दो साल शोध करने के बाद इसे सरकार के संबंधित विभाग को सौंपा जाएगा। अभी प्रोजेक्ट पर काम करते हुए एक साल हुआ है। हिमाचल में कैक्टस तो हैं लेकिन इससे बनाई जान वाली सब्जी से वाकिफ नहीं हैं, जो एक एक औषधि की तरह काम करता है।’

लखनऊ। बंजर भूमि पर उगने वाले कांटेदार कैक्टस के पौधे को लोग फालतू समझते हैं। मगर क्या आप जानते हैं इस कांटेदार कैक्टस में एक ऐसी खूबी है जो लोगों की बीमारियों में काम आता है। कैक्टस के पौधे में ऐसा औषधीय गुण हैं जो जोड़ों के दर्द और बवासीर की समस्या से छुटकारा दिलाने में मदद करता है। हिमाचल में इस पौधे को लोग छूहीं के नाम से जानते हैं। मंडी के वल्लभ महाविद्यालय के वनस्पति शास्त्र विभाग ने रिसर्च कर इस बात का खुलासा किया है कि पर्यावरण, विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग की ओर से मिले एक प्रोजेक्ट के तहत शोध के दौरान छूहीं में कई औषधीय गुण सामने आए हैं जो गहरे जख्म को तेजी से भरने के साथ-साथ जोड़ों के दर्द और बवासीर की बीमारी में भी काम आता है। मंडी कॉलेज में वनस्पति शास्त्र की विभागाध्यक्ष डॉ. तारा सेन ठाकुर ने बताया, 'छूहीं कैक्टस से बनने वाले कई प्रकार के व्यंजन कॉलेज में शोध के दौरान भी तैयार किए गए। 6.40 लाख रुपये के इस प्रोजेक्ट पर दो साल शोध करने के बाद इसे सरकार के संबंधित विभाग को सौंपा जाएगा। अभी प्रोजेक्ट पर काम करते हुए एक साल हुआ है। हिमाचल में कैक्टस तो हैं लेकिन इससे बनाई जान वाली सब्जी से वाकिफ नहीं हैं, जो एक एक औषधि की तरह काम करता है।'