देखना न भूले आज का ‘सुपर मून’, 65 साल बाद बना है यह संयोग

नई दिल्ली। वैसे तो हर महीने चंद्रमा धरती के करीब आता है लेकिन इस बार की कार्तिक पूर्णिमा की बात ही कुछ अलग है| 65 साल बाद आज रात को चांद धरती के सबसे करीब होगा। यह आकार में बड़ा होगा और इस दिन चांद की रोशनी भी 30 फीसदी ज्यादा होगी। चाँद जितना ही धरती के नजदीक होता है वो उतना ही चमकीला नजर आता है और जब चाँद ज्यादा चमकीला और बड़ा दिखता है तो उसे सुपर मून कहते हैं| वैसे, सुपर मून शब्द का पहली बार प्रयोग करीब 30 साल पहले एस्ट्रोलॉजर रिचर्ड नोएल ने किया था। जब चन्द्रमा 3 लाख 60 हजार किलोमीटर से कम दूरी पर रहता है तब इस सुपरमून कहा जाता है। वैज्ञानिकों के अनुसार इससे पहले इतना चमकीला चांद वर्ष 1948 में ही दिखा था।



This 14 November You Will Get To See The Largest Supermoon Since 1948 :

चांद की इस खूबसूरती को निहारने के लिए सूर्यास्त के बाद पूर्व दिशा में करीब आठ बजे के आस-पास देखिएगा। यह अनुमान लगाया गया है कि उत्तरी गोलार्द्ध में सूर्यास्त के बाद चंद्रमा उदित होगा, जबकि दक्षिणी में सूर्यास्त से पहले चंद्रमा उदित होगा। वैसे खगोल शास्त्रियों की माने तो चंद्रमा 14 नवंबर को जब धरती के सबसे करीब होगा तो भारत में दिन के 11 बज कर 22 मिनट हो रहे होंगे।

दुनिया में जिन जगहों पर उस समय रात होगी, वहां पर चंद्रमा की चमक एक तिहाई ज्यादा होगी। लेकिन घबराइए नहीं भारत में जब शाम को चंद्रोदय होगा तब भी इस की चमक आम पूर्णिमा के मुकाबले तकरीबन 30 फीसदी ज्यादा होगी। इसका आकार भी 14 फीसदी ज्यादा होगा। बता दें कि 14 नवम्बर के बाद यह अद्भुद नज़ारा 25 नवम्बर 2034 और 2052 में दिखाई देगा।

आस्था सिंह कि रिपोर्ट

नई दिल्ली। वैसे तो हर महीने चंद्रमा धरती के करीब आता है लेकिन इस बार की कार्तिक पूर्णिमा की बात ही कुछ अलग है| 65 साल बाद आज रात को चांद धरती के सबसे करीब होगा। यह आकार में बड़ा होगा और इस दिन चांद की रोशनी भी 30 फीसदी ज्यादा होगी। चाँद जितना ही धरती के नजदीक होता है वो उतना ही चमकीला नजर आता है और जब चाँद ज्यादा चमकीला और बड़ा दिखता है तो उसे सुपर मून कहते हैं| वैसे, सुपर मून शब्द का पहली बार प्रयोग करीब 30 साल पहले एस्ट्रोलॉजर रिचर्ड नोएल ने किया था। जब चन्द्रमा 3 लाख 60 हजार किलोमीटर से कम दूरी पर रहता है तब इस सुपरमून कहा जाता है। वैज्ञानिकों के अनुसार इससे पहले इतना चमकीला चांद वर्ष 1948 में ही दिखा था। चांद की इस खूबसूरती को निहारने के लिए सूर्यास्त के बाद पूर्व दिशा में करीब आठ बजे के आस-पास देखिएगा। यह अनुमान लगाया गया है कि उत्तरी गोलार्द्ध में सूर्यास्त के बाद चंद्रमा उदित होगा, जबकि दक्षिणी में सूर्यास्त से पहले चंद्रमा उदित होगा। वैसे खगोल शास्त्रियों की माने तो चंद्रमा 14 नवंबर को जब धरती के सबसे करीब होगा तो भारत में दिन के 11 बज कर 22 मिनट हो रहे होंगे।दुनिया में जिन जगहों पर उस समय रात होगी, वहां पर चंद्रमा की चमक एक तिहाई ज्यादा होगी। लेकिन घबराइए नहीं भारत में जब शाम को चंद्रोदय होगा तब भी इस की चमक आम पूर्णिमा के मुकाबले तकरीबन 30 फीसदी ज्यादा होगी। इसका आकार भी 14 फीसदी ज्यादा होगा। बता दें कि 14 नवम्बर के बाद यह अद्भुद नज़ारा 25 नवम्बर 2034 और 2052 में दिखाई देगा।आस्था सिंह कि रिपोर्ट