खुद पर लगे बैन को मायावती ने बताया काला दिन, चुनाव आयोगा पर साधा निशाना

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लखनऊ। चुनाव प्रचार के दौरान विवादित टिप्पणी के मामले में चुनाव आयोग ने बड़ी कार्रवाई करते हुए बीएसपी प्रमुख मायावती पर 48 घंटे का चुनाव प्रचार को लेकर बैन लगा दिया है। इस पर मायावती ने चुनाव आयोग पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा किए चुनाव आयोग का यह फैसला एकतरफा है। मुझे बोलने और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के मौलिक अधिकार से भी वंचित किया गया है। चुनाव आयोग के इतिहास में यह एक काला दिन है।

This Day Will Be Known As A Black Day In The History Of Election Commission Mayawati :

चुनाव आयोग की ओर से मायावती पर लगाए गए प्रचार बैन के मुताबिक मायावती अब 48 घंटे तक चुनाव प्रचार नहीं कर पाएंगी। यह प्रतिबंध मंगलवार यानि 16 अप्रैल सुबह 6 बजे से प्रभावी होगा। इस प्रतिबंध के मद्देनजर अब मायावती 18 अप्रैल को होने वाले दूसरे चरण के मतदान के लिए प्रचार नहीं कर पाएंगी। बसपा प्रमुख मायावती ने चुनाव आयोग द्वारा उन पर लगाये गये 48 घंटे के प्रतिबंध को दबाव में लिया गया फैसला करार देते हुए कहा कि यह एक साजिश और लोकतंत्र की हत्या है।

मायावती पर किसी भी चुनावी गतिविधि में शामिल होने पर 48 घंटे के प्रतिबंध की मियाद मंगलवार सुबह छह बजे शुरू होगी। उन्होंने सोमवार देर रात प्रेस वार्ता में कहा कि आयोग ने सहारनपुर के देवबंद में दिये गये बयान पर उनकी सफाई को नजरअंदाज करते हुए उन पर पाबंदी लगा दी और यह लोकतंत्र की हत्या है। उन्होंने कहा संविधान के अनुच्छेद 19 के तहत किसी को अपनी बात रखने से वंचित नहीं किया जा सकता लेकिन आयोग ने अभूतपूर्व आदेश देकर मुझे बगैर किसी सुनवाई के असंवैधानिक तरीके से क्रूरूरतापूर्वक वंचित कर दिया। यह दिन काला दिवस के रूप में याद किया जाएगा। यह फैसला किसी दबाव में लिया गया ही प्रतीत होता है।

मालूम हो कि आयोग ने गत सात अप्रैल को सहारनपुर के देवबंद में आयोजित चुनावी रैली में खासकर मुस्लिम समुदाय से वोट मांगकर आचार संहिता का उल्लंघन करने के आरोप में सोमवार को किसी भी चुनावी गतिविधि में शामिल होने पर 48 घंटे के लिये प्रतिबंध लगा दिया। बसपा प्रमुख ने कहा कि हमें अपने कार्यकर्ताओं पर भरोसा है कि वह आयोग के इस फैसले के पीछे की मंशा को जरूर समझें और निडर होकर बसपा तथा गठबंधन प्रत्याशियों को पूरा समर्थन देकर भाजपा तथा अन्य विरोधियों की जमानत जब्त कराएं। मायावती ने कहा कि आयोग को अच्छी तरह मालूम है कि लोकसभा चुनाव के दूसरे चरण कर मतदान 18 अप्रैल को है और प्रचार का समय कल 16 अप्रैल को खत्म हो जाएगा।

उन्होंने कहा कि आयोग के इस आदेश के कारण वह मंगलवार को आगरा में होने वाली महागठबंधन की संयुक्त रैली में बसपा और गठबंधन प्रत्याशी के पक्ष में अपील नहीं कर सकेंगी। अगर आयोग की मंशा गलत नहीं थी तो वह उसे एक दिन बाद उसे लागू करता।

उन्होंने कहा कि आयोग ने 11 अप्रैल को उन्हें जो नोटिस भेजा था उसमें भड़काऊ भाषण देने का आरोप नहीं लगाया गया था। नोटिस के जवाब में साफ कहा गया था कि उन्होंने धार्मिक भावनाओं को नहीं भड़काया था बल्कि देवबंद की रैली में दो अलग अलग लोगों से वोट बांटने की नहीं बल्कि दो मुस्लिम उम्मीदवारों में से एक ही मुस्लिम उम्मीदवार को वोट देने की बात कही गयी थी ताकि प्रतिद्वंद्वी प्रत्याशी को हराया जा सके।

लखनऊ। चुनाव प्रचार के दौरान विवादित टिप्पणी के मामले में चुनाव आयोग ने बड़ी कार्रवाई करते हुए बीएसपी प्रमुख मायावती पर 48 घंटे का चुनाव प्रचार को लेकर बैन लगा दिया है। इस पर मायावती ने चुनाव आयोग पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा किए चुनाव आयोग का यह फैसला एकतरफा है। मुझे बोलने और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के मौलिक अधिकार से भी वंचित किया गया है। चुनाव आयोग के इतिहास में यह एक काला दिन है। चुनाव आयोग की ओर से मायावती पर लगाए गए प्रचार बैन के मुताबिक मायावती अब 48 घंटे तक चुनाव प्रचार नहीं कर पाएंगी। यह प्रतिबंध मंगलवार यानि 16 अप्रैल सुबह 6 बजे से प्रभावी होगा। इस प्रतिबंध के मद्देनजर अब मायावती 18 अप्रैल को होने वाले दूसरे चरण के मतदान के लिए प्रचार नहीं कर पाएंगी। बसपा प्रमुख मायावती ने चुनाव आयोग द्वारा उन पर लगाये गये 48 घंटे के प्रतिबंध को दबाव में लिया गया फैसला करार देते हुए कहा कि यह एक साजिश और लोकतंत्र की हत्या है। मायावती पर किसी भी चुनावी गतिविधि में शामिल होने पर 48 घंटे के प्रतिबंध की मियाद मंगलवार सुबह छह बजे शुरू होगी। उन्होंने सोमवार देर रात प्रेस वार्ता में कहा कि आयोग ने सहारनपुर के देवबंद में दिये गये बयान पर उनकी सफाई को नजरअंदाज करते हुए उन पर पाबंदी लगा दी और यह लोकतंत्र की हत्या है। उन्होंने कहा संविधान के अनुच्छेद 19 के तहत किसी को अपनी बात रखने से वंचित नहीं किया जा सकता लेकिन आयोग ने अभूतपूर्व आदेश देकर मुझे बगैर किसी सुनवाई के असंवैधानिक तरीके से क्रूरूरतापूर्वक वंचित कर दिया। यह दिन काला दिवस के रूप में याद किया जाएगा। यह फैसला किसी दबाव में लिया गया ही प्रतीत होता है। मालूम हो कि आयोग ने गत सात अप्रैल को सहारनपुर के देवबंद में आयोजित चुनावी रैली में खासकर मुस्लिम समुदाय से वोट मांगकर आचार संहिता का उल्लंघन करने के आरोप में सोमवार को किसी भी चुनावी गतिविधि में शामिल होने पर 48 घंटे के लिये प्रतिबंध लगा दिया। बसपा प्रमुख ने कहा कि हमें अपने कार्यकर्ताओं पर भरोसा है कि वह आयोग के इस फैसले के पीछे की मंशा को जरूर समझें और निडर होकर बसपा तथा गठबंधन प्रत्याशियों को पूरा समर्थन देकर भाजपा तथा अन्य विरोधियों की जमानत जब्त कराएं। मायावती ने कहा कि आयोग को अच्छी तरह मालूम है कि लोकसभा चुनाव के दूसरे चरण कर मतदान 18 अप्रैल को है और प्रचार का समय कल 16 अप्रैल को खत्म हो जाएगा। उन्होंने कहा कि आयोग के इस आदेश के कारण वह मंगलवार को आगरा में होने वाली महागठबंधन की संयुक्त रैली में बसपा और गठबंधन प्रत्याशी के पक्ष में अपील नहीं कर सकेंगी। अगर आयोग की मंशा गलत नहीं थी तो वह उसे एक दिन बाद उसे लागू करता। उन्होंने कहा कि आयोग ने 11 अप्रैल को उन्हें जो नोटिस भेजा था उसमें भड़काऊ भाषण देने का आरोप नहीं लगाया गया था। नोटिस के जवाब में साफ कहा गया था कि उन्होंने धार्मिक भावनाओं को नहीं भड़काया था बल्कि देवबंद की रैली में दो अलग अलग लोगों से वोट बांटने की नहीं बल्कि दो मुस्लिम उम्मीदवारों में से एक ही मुस्लिम उम्मीदवार को वोट देने की बात कही गयी थी ताकि प्रतिद्वंद्वी प्रत्याशी को हराया जा सके।