इस भारतीय ने बनाई ऐसी मशीन जो पढ़ लेगी दूसरों के मन की बात

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This Indian Man Developed A Device That Will Read Others Mind

एक आदमी अपने मन में कुछ सोच रहा है और उसके पास बैठा दूसरा आदमी उसके मन की सारी बातें जान लें. ऐसी चीजें आमतौर हॉलीवुड फिल्मों और साइंस के उपन्यासों में ही देखऩे को मिलती हैं. हालांकि, यह सब अब हकीकत में सच होने जा रहा है. मैसाच्यूएसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (MIT) के मीडिया लैब में भारतीय मूल के एक रिसर्चर की अगुवाई वाली टीम ने एक खास डिवाइस (मशीन) तैयार की है. इस मशीन को पहनकर आप अपने पास बैठे व्यक्ति के मन में चल रही बातों को सुन सकते हैं और इसमें किसी तरह का साउंड भी नहीं होगा.

मशीन का नाम AlterEgo है. इसे बनाने वाली टीम की अगुवाई भारतीय मूल के अर्णव कपूर ने की है. यह मशीन एक माइंडरीडिंग डिवाइस है. सफेद रंग का यह गैजेट अभी आपके चेहरे पर लगे किसी अजब-गजब मेडिकल डिवाइस जैसी दिखाई देती है. आगे चलकर, यह मशीन छोटी और स्मार्ट लुक के साथ आ सकती है.

मैसाच्यूएसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी के इस सिस्टम में इलेक्ट्रोड्स हैं. अगर कोई व्यक्ति दिमाग में कुछ सोचता है तो इलेक्ट्रोड्स सिग्नल लेते हैं. इन सिग्नल को एक कंप्यूटर में भेजा जाता है, जो कि सोचे गए शब्द पहचानने के लिए इन सिग्नल का इस्तेमाल करता है. MIT मीडिया लैब की वेबसाइट ने स्पष्ट किया है कि यह मशीन आपका दिमाग नहीं पढ़ सकती है…सिस्टम की दिमाग की गतिविधियों तक कोई सीधी पहुंच नहीं है. ऐसे में यह उपभोक्ता के खुद के विचारों को नहीं पढ़ सकती है.

इस मशीन AlterEgo की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि यह कितनी सत्यता के साथ दिमाग के वाइब्रेशऩ को शब्दों में बदलती है. कपूर की टीम का दावा है कि मौजूदा समय में इस मशीन की सत्यता 92 फीसदी है, जो कि गूगल के वॉयस ट्रांसक्रिप्शऩ से थोड़े ही कम है.

एक आदमी अपने मन में कुछ सोच रहा है और उसके पास बैठा दूसरा आदमी उसके मन की सारी बातें जान लें. ऐसी चीजें आमतौर हॉलीवुड फिल्मों और साइंस के उपन्यासों में ही देखऩे को मिलती हैं. हालांकि, यह सब अब हकीकत में सच होने जा रहा है. मैसाच्यूएसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (MIT) के मीडिया लैब में भारतीय मूल के एक रिसर्चर की अगुवाई वाली टीम ने एक खास डिवाइस (मशीन) तैयार की है. इस मशीन को पहनकर आप अपने…