बिहार चुनाव में छह सीटों की लड़ाई प्रतीकात्मक नहीं, गंभीर: ओवैसी    

हैदराबाद। बिहार विधानसभा चुनाव में सीमांचल की छह विधानसभा सीटों पर अपने उम्मीदवारों को उतारकर अपनी दावेदारी पेश करने वाले मजलिस इत्तेहादुल मुसलमीन (एमआईएम) के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने जमकर दम भरा है।  उनका कहना है कि उनकी पार्टी भले ही बिहार में केवल 6 सीटों पर चुनाव लड़ रही हो लेकिन यह कोई प्रतीकात्मक लड़ाई नहीं है। वे एमआईएम मुख्यालय दारुस्सलाम में पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित कर रहे थे।ओवैसी ने कहा कि यह शुरुआत है। निश्चित ही हम भविष्य…

हैदराबाद। बिहार विधानसभा चुनाव में सीमांचल की छह विधानसभा सीटों पर अपने उम्मीदवारों को उतारकर अपनी दावेदारी पेश करने वाले मजलिस इत्तेहादुल मुसलमीन (एमआईएम) के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने जमकर दम भरा है।  उनका कहना है कि उनकी पार्टी भले ही बिहार में केवल 6 सीटों पर चुनाव लड़ रही हो लेकिन यह कोई प्रतीकात्मक लड़ाई नहीं है। वे एमआईएम मुख्यालय दारुस्सलाम में पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित कर रहे थे।

ओवैसी ने कहा कि यह शुरुआत है। निश्चित ही हम भविष्य में पूरे बिहार में पार्टी को फैलाएंगे। हमने राज्य के सबसे पिछड़े इलाके, सीमांचल से शुरुआत की है। खुद को फिलहाल 6 सीट तक सीमित किया है। उन्होने कहा कि यह एक गंभीर लड़ाई है और हम जीतने के लिए चुनाव मैदान में उतरे हैं।

आपको बता दें कि बिहार विधानसभा में कुल 243 सीट हैं जबकि इनमे से 24 सीटें सीमांचल में पड़ती हैं। एमआईएम सीमांचल की छह पर चुनाव लड़ रही है। कुछ राजनीतिक दलों ने आरोप लगाते हुए कहा है कि धर्मनिरपेक्ष मतों के बंटने की आलोचना से बचने के लिए ओवैसी ने सिर्फ छह सीटों पर चुनाव लड़ने का फैसला किया है। ओवैसी ने पार्टी मुख्यालय में कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए इस बात को सिरे से खाजीर किया।

ओवैसी ने कहा कि ऐसा बिलकुल भी नहीं है कि आलोचनाओं से बचने के लिए हमने छह सीटों पर चुनाव लड़ने का फैसला लिया है। बल्कि आलोचना या प्रशंसा हमारे फैसले पर असर नहीं डालते। यह पार्टी का फैसला है। उन्होने कहा कि एमआईएम पर धर्मनिरपेक्ष मतों के बंटवारे का आरोप नहीं लगाया जा सकता क्योंकि धर्मनिरपेक्ष धड़ा 237 ऐसी सीटों पर चुनाव लड़ रहा है जहां एमआईएम नहीं है।

ओवैसी से कहा कि हमारी पहली प्राथमिकता भाजपा को हराना है. हमने लोगों से अपील की है कि वे धर्मनिरपेक्ष धड़ों के धर्मनिरपेक्ष उम्मीदवारों को मत दें। उन्होने कहा कि अगर धर्मनिरपेक्ष मतों के बंटवारे के लिए किसी को निशाना बनाया ही जाना चाहिए तो वह वाम मोर्चा है जो 200 सीटों पर लड़ रहा है। उन्होंने कहा कि यह पूरी बहस (धर्मनिरपेक्ष मतों का बंटवारा) बेइमानी है। भारत जैसे विशाल देश में दो दलीय व्यवस्था या दो गठबंधन की व्यवस्था नहीं चल सकती।

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