फिल्म ‘बाटला हाउस’ से रियल ‘बाटला हाउस एंकाउंटर’ में यह है फर्क

जॉन अब्राहम और डीसीपी संजय कुमार
फिल्म 'बाटला हाउस' से रियल 'बाटला हाउस एंकाउंटर' में यह है फर्क

मुंबई। बॉलीवुड एक्टर जॉन अब्राहम की फिल्म ‘बाटला हाउस’ 19 सितंबर 2008 को ‘बाटला हाउस एनकाउंटर’ पर आधारित है। यह फिल्म निखिल आडवाणी द्वारा निर्देशित किया गया है। जहां जॉन अब्राहम ने डीसीपी संजीव कुमार यादव के किरदार को बखूबी निभाया। वहीं, मृणाल ठाकुर ने संजीव कुमार की पत्नी और एक पत्रकार की भूमिका को बखूबी निभाया। आज हम जानेंगे फिल्म ‘बाटला हाउस’ से रियल ‘बाटला हाउस एंकाउंटर’ की कहानी में कितना फर्क है।

This Is The Difference Between The Real Batla House Encounter From The Film Batla House :

‘बाटला हाउस एंकाउंटर’ में कुछ ऐसा हुआ था:

साल 2005 से 2008 के बीच ISI ने लश्कर-ए-तैयबा के साथ मिलकर आतंकवाद को आउटसोर्स करने के लिए एक लोकल फ्रैंचाइजी बनाई। इस फ्रैंचाइजी यानी इंडियन मुजाहिदीन, जिसे भटकल भाइयों रियाज और यासीन ने हेड किया था, उसने भारत में जगह-जगह बम धमाके किए. इस काम को करने के लिए इंडियन मुजाहिदीन ने लोकल लड़कों को रखा, जिन्होंने जयपुर, अहमदाबाद, वाराणसी, दिल्ली और हैदराबाद में बम लगाकर सैंकड़ों लोगों की जान ली।

इन धमाकों का सिलसिला तब थमा जब दिल्ली के बाटला हाउस में, एक एनकाउंटर में दो संदिग्ध आतंकी और एक पुलिस अफसर की मौत के बाद इंडियन मुजाहिदीन के आतंकी सेल का भंडाफोड़ हुआ। दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल उन सीरियल बम धमाकों की जांच कर रही थी। जिसके चलते वो टीम 19 सितंबर 2008 को बाटला हाउस में एल-18 नंबर की इमारत की तीसरी मंजिल पर जा पहुंची। वहीं, पर पुलिस की इंडियन मुजाहीदीन के संदिग्ध आतंकियों से मुठभेड़ हुई।

इस मुठभेड़ में दो संदिग्धों की मौत हो गई थी। मरने वालों की पहचान मोहम्मद आतिफ अमीन और साजिद के रूप में हुई थी। दोनों यूपी के आजमगढ़ के रहने वाले थे। जबकि मौके से दो युवकों को गिरफ्तार किया गया था। एक युवक मौके से किसी तरह से भाग निकला था।

इस एनकाउंटर में टीम का नेतृत्व कर रहे मोहन चंद्र शर्मा को भी गोली लग गई थी।19 सितंबर को ही देर शाम मोहन चंद्र शर्मा की होली फैमिली अस्पताल में मौत हो गई थी। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के मुताबिक मोहन चंद्र शर्मा को तीन गोली लगी थी, एक पेट में एक जांघ में और एक दाहिने हाथ में। पुलिस ने मोहन चंद्र शर्मा की मौत के लिए शहजाद अहमद को जिम्मेदार ठहराया था।

बाटला हाउस एंकाउंटर के बाद संजीव कुमार सुसाइड़ करना चाहते थे। उसकी निजी जिंदगी पूरी तरह से बिखर गयी थी। उसकी पत्नी उन्हें छोड़ना चाहती थी। वह भारत सरकार के सवालों के घेरे में थे। आज की तारीख में उस इंसान ने नौ गैलेंटरी अवार्ड जीते हैं। उस वक्त तक उन्होंने छह जीते थे। वह हमारे देश के प्रतिष्ठित और सम्मानित ऑफिसर रहे हैं।

मुंबई। बॉलीवुड एक्टर जॉन अब्राहम की फिल्म 'बाटला हाउस' 19 सितंबर 2008 को 'बाटला हाउस एनकाउंटर' पर आधारित है। यह फिल्म निखिल आडवाणी द्वारा निर्देशित किया गया है। जहां जॉन अब्राहम ने डीसीपी संजीव कुमार यादव के किरदार को बखूबी निभाया। वहीं, मृणाल ठाकुर ने संजीव कुमार की पत्नी और एक पत्रकार की भूमिका को बखूबी निभाया। आज हम जानेंगे फिल्म 'बाटला हाउस' से रियल 'बाटला हाउस एंकाउंटर' की कहानी में कितना फर्क है।
'बाटला हाउस एंकाउंटर' में कुछ ऐसा हुआ था:
साल 2005 से 2008 के बीच ISI ने लश्कर-ए-तैयबा के साथ मिलकर आतंकवाद को आउटसोर्स करने के लिए एक लोकल फ्रैंचाइजी बनाई। इस फ्रैंचाइजी यानी इंडियन मुजाहिदीन, जिसे भटकल भाइयों रियाज और यासीन ने हेड किया था, उसने भारत में जगह-जगह बम धमाके किए. इस काम को करने के लिए इंडियन मुजाहिदीन ने लोकल लड़कों को रखा, जिन्होंने जयपुर, अहमदाबाद, वाराणसी, दिल्ली और हैदराबाद में बम लगाकर सैंकड़ों लोगों की जान ली। इन धमाकों का सिलसिला तब थमा जब दिल्ली के बाटला हाउस में, एक एनकाउंटर में दो संदिग्ध आतंकी और एक पुलिस अफसर की मौत के बाद इंडियन मुजाहिदीन के आतंकी सेल का भंडाफोड़ हुआ। दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल उन सीरियल बम धमाकों की जांच कर रही थी। जिसके चलते वो टीम 19 सितंबर 2008 को बाटला हाउस में एल-18 नंबर की इमारत की तीसरी मंजिल पर जा पहुंची। वहीं, पर पुलिस की इंडियन मुजाहीदीन के संदिग्ध आतंकियों से मुठभेड़ हुई। इस मुठभेड़ में दो संदिग्धों की मौत हो गई थी। मरने वालों की पहचान मोहम्मद आतिफ अमीन और साजिद के रूप में हुई थी। दोनों यूपी के आजमगढ़ के रहने वाले थे। जबकि मौके से दो युवकों को गिरफ्तार किया गया था। एक युवक मौके से किसी तरह से भाग निकला था। इस एनकाउंटर में टीम का नेतृत्व कर रहे मोहन चंद्र शर्मा को भी गोली लग गई थी।19 सितंबर को ही देर शाम मोहन चंद्र शर्मा की होली फैमिली अस्पताल में मौत हो गई थी। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के मुताबिक मोहन चंद्र शर्मा को तीन गोली लगी थी, एक पेट में एक जांघ में और एक दाहिने हाथ में। पुलिस ने मोहन चंद्र शर्मा की मौत के लिए शहजाद अहमद को जिम्मेदार ठहराया था। बाटला हाउस एंकाउंटर के बाद संजीव कुमार सुसाइड़ करना चाहते थे। उसकी निजी जिंदगी पूरी तरह से बिखर गयी थी। उसकी पत्नी उन्हें छोड़ना चाहती थी। वह भारत सरकार के सवालों के घेरे में थे। आज की तारीख में उस इंसान ने नौ गैलेंटरी अवार्ड जीते हैं। उस वक्त तक उन्होंने छह जीते थे। वह हमारे देश के प्रतिष्ठित और सम्मानित ऑफिसर रहे हैं।