इस मौलवी ने यूपीएससी परीक्षा पास कर दिया ऐसा बयान, लोग हो गए हैरान

shahid raza khan
इस मौलवी ने यूपीएससी परीक्षा पास कर लोगों दिया ऐसा बयान, लोगों को हो रहा है गर्व

नई दिल्ली। आप चाहे धार्मिक नीतियों से कितना भी जुड़े हुए क्यों ना हो लेकिन आपकी चाह आपके सपनों की उड़ान को नहीं रोक सकती। कुछ ऐसी ही कहानी है बिहार के के गया जिले के रहने वाले एक मुस्लिम युवक की जो एक मौलवी है। इस मौलवी ने अपने धर्म को सिर्फ अपना हिस्सा नहीं बनाया बल्कि दुनिया में कुछ करने की चाह ने उसे 2018 यूपीएससी की परीक्षा में 751वां स्थान प्राप्त कराया। इस मौलवी की कहानी रूढ़ी वादी सोच को नहीं बल्कि मानवता और अपनी इच्छा के अनुसार जीना सिखाती है।

This Maulvi Passed The Upsc Examination Such A Statement People Are Shocked :

गया जिले के अमीनाबाद गांव के रहने वाले इस शख्स का नाम शाहिद रजा खान है। शाहिद ने अपनी शुरुआती पढ़ाई बड़ी मुश्किलों के साथ शुरू की थी। पिछले दिनों यूपीएससी का रिजल्ट आने के कई दिनों बाद शाहिद सुर्खियों में बने हुए हैं। शाहिद ने अपने विचार और व्यक्तिगत जीवन के बारे में बताते हुए कहा कि “मदरसे में पढ़ाई के दौरान ही वो सिविल सर्विसेज में जाना चाहते थे।”

शाहिद का कहना है कि ”मेरी प्रारंभिक शिक्षा एक छोटे से गांव के कस्बे में हुई थी। इसके बाद मैं आगे की पढ़ाई के लिए आजमगढ़ के मुबारकपुर स्थित अल जमातुल अशर्फिया से उच्च शिक्षा प्राप्त की।” शाहिद ने 2011 में जेएनयू में अरबी भाषा पढ़ने के लिए बीए में दाखिला लिया था फिर एमए भी वहीं से किया। उसके बाद शाहिद ने स्कूल ऑफ इंटरनेशनल स्टडीज से एम-फिल के बाद अब जेएनयू से ही पीएचडी कर रहे हैं।

शाहिद रज़ा का मानना है कि “मेरी सफलता के पीछे मेरी मां और मेरे परिवार का हाथ है। मैं जो कुछ भी करना चाहता था, उसमें मेरी मां ने मेरा साथ दिया। मेरी मां मुझे प्रेरणा देती हैं, कि कोई भी मदरसा, मस्जिद या फिर धर्म रूढ़ नहीं होना चाहिए। धर्म हमें मानवता की सेवा करना सिखाता है, और मैं लोगों को अपने जीवन में मानवता का पाठ पढ़ाऊंगा।”

शाहिद के परिवार की बात करें तो उनके घर में उनकी मां के अलावा 7 भाई और 4 बहनें हैं। शाहिद के भाई-बहनों ने भी उनकी कामयाबी में पूरा साथ दिया है। शाहिद के साथियों के मुताबिक बिहार बोर्ड से मैट्रिक पास करने के बाद मदरसे में शिक्षा पाने के दौरान उन्हें गजलें लिखने का भी शौक है।

नई दिल्ली। आप चाहे धार्मिक नीतियों से कितना भी जुड़े हुए क्यों ना हो लेकिन आपकी चाह आपके सपनों की उड़ान को नहीं रोक सकती। कुछ ऐसी ही कहानी है बिहार के के गया जिले के रहने वाले एक मुस्लिम युवक की जो एक मौलवी है। इस मौलवी ने अपने धर्म को सिर्फ अपना हिस्सा नहीं बनाया बल्कि दुनिया में कुछ करने की चाह ने उसे 2018 यूपीएससी की परीक्षा में 751वां स्थान प्राप्त कराया। इस मौलवी की कहानी रूढ़ी वादी सोच को नहीं बल्कि मानवता और अपनी इच्छा के अनुसार जीना सिखाती है। गया जिले के अमीनाबाद गांव के रहने वाले इस शख्स का नाम शाहिद रजा खान है। शाहिद ने अपनी शुरुआती पढ़ाई बड़ी मुश्किलों के साथ शुरू की थी। पिछले दिनों यूपीएससी का रिजल्ट आने के कई दिनों बाद शाहिद सुर्खियों में बने हुए हैं। शाहिद ने अपने विचार और व्यक्तिगत जीवन के बारे में बताते हुए कहा कि "मदरसे में पढ़ाई के दौरान ही वो सिविल सर्विसेज में जाना चाहते थे।" शाहिद का कहना है कि ''मेरी प्रारंभिक शिक्षा एक छोटे से गांव के कस्बे में हुई थी। इसके बाद मैं आगे की पढ़ाई के लिए आजमगढ़ के मुबारकपुर स्थित अल जमातुल अशर्फिया से उच्च शिक्षा प्राप्त की।" शाहिद ने 2011 में जेएनयू में अरबी भाषा पढ़ने के लिए बीए में दाखिला लिया था फिर एमए भी वहीं से किया। उसके बाद शाहिद ने स्कूल ऑफ इंटरनेशनल स्टडीज से एम-फिल के बाद अब जेएनयू से ही पीएचडी कर रहे हैं। शाहिद रज़ा का मानना है कि "मेरी सफलता के पीछे मेरी मां और मेरे परिवार का हाथ है। मैं जो कुछ भी करना चाहता था, उसमें मेरी मां ने मेरा साथ दिया। मेरी मां मुझे प्रेरणा देती हैं, कि कोई भी मदरसा, मस्जिद या फिर धर्म रूढ़ नहीं होना चाहिए। धर्म हमें मानवता की सेवा करना सिखाता है, और मैं लोगों को अपने जीवन में मानवता का पाठ पढ़ाऊंगा।" शाहिद के परिवार की बात करें तो उनके घर में उनकी मां के अलावा 7 भाई और 4 बहनें हैं। शाहिद के भाई-बहनों ने भी उनकी कामयाबी में पूरा साथ दिया है। शाहिद के साथियों के मुताबिक बिहार बोर्ड से मैट्रिक पास करने के बाद मदरसे में शिक्षा पाने के दौरान उन्हें गजलें लिखने का भी शौक है।