आरपीएफ का यह जवान बना ‘कैप्टन रेलवे’, चलती ट्रेन में महिला तक पहुंचाया दूध का पैकेट

rpf-constable-who-delivers-milk-to-a-hungry-girl-in-train-for-two-days-will-be-rewarded_359832

नई दिल्ली: अमेरिकी कॉमिक्स पर आधारित फेमस फिल्म कैरेक्टर ‘कैप्टन अमेरिका’ की तरह ही भारत में अब ‘कैप्टन रेलवे’ है। इन्होंने अपनी ड्यूटी से आगे जाकर श्रमिक स्पेशल ट्रेन से यात्रा कर रहे प्रवासी मजदूरों की मदद की। यह खिताब और कैश पाने वाले रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) के कॉन्सटेबल इंदर सिंह यादव बने। जो एक महिला के 4 साल के बच्चे के लिए दूध लेकर आए और चलती ट्रेन में दौड़कर उन तक पैकेट को पहुंचाया।

This Rpf Jawan Becomes Captain Railway Milk Packet Carried To Woman In Moving Train :

बीते 5 मई को बेलगाम से गोरखपुर जा रही श्रमिक स्पेशल ट्रेन नंबर 06299 भोपाल स्टेशन पहुंची थी। सूत्रों के अनुसार रात 8 बजकर 45 मिनट पर ट्रेन भोपाल के प्लेटफॉर्म नंबर एक पर खड़ी थी। वहीं ड्यूटी पर लगे कॉन्सटेबल इंदर ने महसूस किया कि एक महिला यात्री इशारे से कुछ कहना चाह रही है। पूछने पर महिला ने बताया कि जब से ट्रेन चली है, उनका बच्चा भूखा है। वह दूध का इंतजाम नहीं कर सकी। बच्चा भूखा है और रोए जा रहा है।

यह सुनते ही इंदर तुरंत दूध खरीदने के लिए दौड़ पड़े। लेकिन दूध लेकर वह लौटे तो देखा कि ट्रेन धीरे-धीरे प्लेटफॉर्म से निकल रही है। इंदर ने महिला की कोच की तरफ दौड़ना शुरू किया। ट्रेन की स्पीड बढ़ चुकी थी लेकिन इसके बावजदू एक हाथ में सर्विस राइफल और दूसरे में दूध का पैकेट लिए इंदर ने दौड़ लगाई और महिला को पैकेट थमा दिया।

ग्वालियर के रहने वाले 33 वर्षीय इंदर ने 2009 में आरपीएफ जॉइन किया था। पहले वह लखनऊ में तैनात थे और फिर बाद में भोपाल में पांच सालों से ड्यूटी कर रहे हैं। उन्होंने यह साबित कर दिया कि खाकी पहने इंसान के अंदर नेकदिल इंसान बसता है।

रेलवे ने विभिन्न राज्यों से 3 जून तक 4197 श्रमिक स्पेशल ट्रेनें चलाई। 34 दिनों में 58 लाख से अधिक प्रवासी मजदूरों को उनके घरों तक पहुंचाया गया। सबसे ज्यादा ट्रेनें गुजरात (1026), महाराष्ट्र (802), पंजाब (416) से चलीं। श्रमिक स्पेशल के अलावा रेलवे नई दिल्ली से कनेक्ट करने वाली स्पेशल राजधानी टाइप की 15 जोड़ी ट्रेन शुरू की।

नई दिल्ली: अमेरिकी कॉमिक्स पर आधारित फेमस फिल्म कैरेक्टर 'कैप्टन अमेरिका' की तरह ही भारत में अब 'कैप्टन रेलवे' है। इन्होंने अपनी ड्यूटी से आगे जाकर श्रमिक स्पेशल ट्रेन से यात्रा कर रहे प्रवासी मजदूरों की मदद की। यह खिताब और कैश पाने वाले रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) के कॉन्सटेबल इंदर सिंह यादव बने। जो एक महिला के 4 साल के बच्चे के लिए दूध लेकर आए और चलती ट्रेन में दौड़कर उन तक पैकेट को पहुंचाया। बीते 5 मई को बेलगाम से गोरखपुर जा रही श्रमिक स्पेशल ट्रेन नंबर 06299 भोपाल स्टेशन पहुंची थी। सूत्रों के अनुसार रात 8 बजकर 45 मिनट पर ट्रेन भोपाल के प्लेटफॉर्म नंबर एक पर खड़ी थी। वहीं ड्यूटी पर लगे कॉन्सटेबल इंदर ने महसूस किया कि एक महिला यात्री इशारे से कुछ कहना चाह रही है। पूछने पर महिला ने बताया कि जब से ट्रेन चली है, उनका बच्चा भूखा है। वह दूध का इंतजाम नहीं कर सकी। बच्चा भूखा है और रोए जा रहा है। यह सुनते ही इंदर तुरंत दूध खरीदने के लिए दौड़ पड़े। लेकिन दूध लेकर वह लौटे तो देखा कि ट्रेन धीरे-धीरे प्लेटफॉर्म से निकल रही है। इंदर ने महिला की कोच की तरफ दौड़ना शुरू किया। ट्रेन की स्पीड बढ़ चुकी थी लेकिन इसके बावजदू एक हाथ में सर्विस राइफल और दूसरे में दूध का पैकेट लिए इंदर ने दौड़ लगाई और महिला को पैकेट थमा दिया। ग्वालियर के रहने वाले 33 वर्षीय इंदर ने 2009 में आरपीएफ जॉइन किया था। पहले वह लखनऊ में तैनात थे और फिर बाद में भोपाल में पांच सालों से ड्यूटी कर रहे हैं। उन्होंने यह साबित कर दिया कि खाकी पहने इंसान के अंदर नेकदिल इंसान बसता है। रेलवे ने विभिन्न राज्यों से 3 जून तक 4197 श्रमिक स्पेशल ट्रेनें चलाई। 34 दिनों में 58 लाख से अधिक प्रवासी मजदूरों को उनके घरों तक पहुंचाया गया। सबसे ज्यादा ट्रेनें गुजरात (1026), महाराष्ट्र (802), पंजाब (416) से चलीं। श्रमिक स्पेशल के अलावा रेलवे नई दिल्ली से कनेक्ट करने वाली स्पेशल राजधानी टाइप की 15 जोड़ी ट्रेन शुरू की।