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ममता बनर्जी की ये जीत डर और भय के माहौल की है : बीजेपी सांसद मनोज तिवारी

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी (West Bengal Chief Minister Mamata Banerjee) की भवानीपुर विधानसभा उपचुनाव (Bhawanipur assembly by-election) में रविवार को बड़ी जीत हासिल की है। इस जीत पर बीजेपी सांसद मनोज तिवारी( BJP MP Manoj Tiwari)  ने तंज कसते हुए कहा कि यह जीत ममता बनर्जी की नहीं, बल्कि डर और भय के माहौल की है। उन्होंने कहा कि ममता बनर्जी (Mamata Banerjee ) भले ही जीत गई हों, लेकिन उनको यह नहीं भूलना चाहिए कि कुछ महीनों पहले ही हुए विधानसभा चुनावों में जनता उनको नकार भी चुकी है।

By संतोष सिंह 
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नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी (West Bengal Chief Minister Mamata Banerjee) की भवानीपुर विधानसभा उपचुनाव (Bhawanipur assembly by-election) में रविवार को बड़ी जीत हासिल की है। इस जीत पर बीजेपी सांसद मनोज तिवारी( BJP MP Manoj Tiwari)  ने तंज कसते हुए कहा कि यह जीत ममता बनर्जी की नहीं, बल्कि डर और भय के माहौल की है। उन्होंने कहा कि ममता बनर्जी (Mamata Banerjee ) भले ही जीत गई हों, लेकिन उनको यह नहीं भूलना चाहिए कि कुछ महीनों पहले ही हुए विधानसभा चुनावों में जनता उनको नकार भी चुकी है।

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बता दें कि पश्चिम बंगाल के भवानीपुर सीट पर हुए उपचुनाव में ममता बनर्जी (Mamata Banerjee)ने बीजेपी उम्मीदवार प्रियंका टिबरेवाल को 58 हजार से ज्यादा मतों से मात दी है। ममता बनर्जी की यह भवानीपुर विधानसभा से लगातार तीसरी बार जीत है। हालांकि इसी साल अप्रैल में ही महीने में हुए विधानसभा चुनावों में ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) नंदीग्राम से सुवेंदु अधिकारी (Nandigram to Suvendu Adhikari) से चुनाव हार गई थीं, लेकिन ममता बनर्जी (Mamata Banerjee)ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। नियमों के हिसाब से अगर मंत्री या मुख्यमंत्री सदन का सदस्य नहीं है तो उसको शपथ लेने के 6 महीने के भीतर सदन का सदस्य होना जरूरी है। अगर ऐसा नहीं होता तो मंत्री या मुख्यमंत्री को अपना पद छोड़ना पड़ सकता था।

बीजेपी सांसद मनोज तिवारी ( BJP MP Manoj Tiwari) ने कहा कि बंगाल में मतदाता डरा हुआ है। वह मतदाता जो बीजेपी के पक्ष में वोट करना चाहता है। उसको घर से नहीं निकलने दिया जाता है। यहां तक कि अगर यह भी पता चल जाए कि कोई मतदाता बीजेपी के पक्ष में वोट करके आया है। तो मतदान के बाद भी उसके और उसके परिवार के साथ मारपीट की जाती है। ऐसे में बंगाल का एक आम मतदाता डरा और सहमा हुआ है। लिहाजा ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) की जीत को एक निष्पक्ष माहौल में हुए चुनाव में जीत नहीं कहा जा सकता क्योंकि यह जीत तो डर और भय के माहौल में हुए चुनाव में मिली जीत है।

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