ऐसे हुई थी Zomato की शुरुआत , आज 1000 करोड़ से ज़्यादा हो चुकी कंपनी की कीमत

zomato story

लखनऊ। सोशल मीडिया पर इन दिनों zomato के साथ हुए एक हादसे की खबर सुर्खियों में बनी हुई है। दरअसल एक ग्राहक ने जोमैटो से खाना ऑर्डर किया और जब डिलिवरी बॉय खाना लेकर ग्राहक के वहां पहुंचा तो उसने खाने लेने से इसलिए मना कर दिया क्योंकि डेलीवरी बॉय गैर-हिन्दू था। इस हादसे के बाद zomato ने सोशल मीडिया एक पोस्ट शेयर की। जिसके बाद से हर कोई इस पर बहस कर रहा है। वहीं बहुत सारे लोग जोमैटो के इस पोस्ट की खूब तारीफ भी कर रहें हैं। zomato से तो घर बैठे हम सभी खाना ऑर्डर करते हैं लेकिन क्या आपको मालूम है कब और किसने इस कंपनी की शुरुआत की। आज हम zomato की कहानी आप सब के साथ शुरू करेंगे।

This Was The Beginning Of The Zomato The Companys Cost Of Over 1000 Crore Today :

बता दें कि zomato कंपनी जिसकी आज एक हजार करोड़ नेट वर्थ है उसके संस्थापक दीपेन्द्र गोयल है। पहले zomato का नाम फूडीबे था। अब zomato अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया समेत 23 देशों में अपनी सुविधा देता है। दीपेन्द्र के कामयाबी की कहानी कुछ ऐसी है कि जब उन्होंने एक कमरे से उन्होंने अपने बिजनेस की शुरुआत की थी। मगर आज दीपिंदर गोयल की कंपनी की कीमत 1000 करोड़ से ज्यादा हो चुकी है।

दीपेन्द्र बताते हैं कि बचपन से उन्हेंही पढ़ाई में कोई खास दिलचस्पी नहीं थी। वह छठीं कक्षा और कॉलेज के प्रथम वर्ष में फेल भी हो गए थे। फेल होने से दीपिंदर को इतना दुख पहुंचा कि उन्होंने खूब मन लगाकर पढ़ाई करने की ठानी। उन्होंने दिन रात एक करके मेहनत की और आईआईटी के लिए चयनित हो गए। आईआईटी से डिग्री पूरी करने के बाद उन्होंने मल्टीनेशनल कंपनी ‘बेन एंड कंपनी’ में काम किया।

दीपेन्द्र ने बताया कि उन्हें इस काम का आइडिया तब आया जब रोज़ की तरह वो काम करने के बाद कैंटीन में आएं तो, खाने का इंतज़ार कर रहे थे, तभी उन्हें महसूस हुआ कि इसमें काफी वक्त जाया होता है। उन्होंने खाने का मेन्यू स्कैन कर के ऑनलाइन डाला जिसे लोगों ने काफी पसंद किया। यही से उन्हें जोमैटो का आईडिया आया। ऑनलाइन मेन्यू पर अच्छा रिसपॉन्स मिलता देख उन्होंने वेबसाइट खोलने का सोची जिसमें लोगों को आसपास के रेस्टोरेंट की जानकारी मिल सके। अपने सहकर्मी पंकज चड्ढा के साथ मिलकर उन्होंने 2008 में ‘फूडीबे’ खोली जिसमें रेस्टोरेंट के मेन्यू से लेकर उसकी समीक्षा भी होती थी।

लखनऊ। सोशल मीडिया पर इन दिनों zomato के साथ हुए एक हादसे की खबर सुर्खियों में बनी हुई है। दरअसल एक ग्राहक ने जोमैटो से खाना ऑर्डर किया और जब डिलिवरी बॉय खाना लेकर ग्राहक के वहां पहुंचा तो उसने खाने लेने से इसलिए मना कर दिया क्योंकि डेलीवरी बॉय गैर-हिन्दू था। इस हादसे के बाद zomato ने सोशल मीडिया एक पोस्ट शेयर की। जिसके बाद से हर कोई इस पर बहस कर रहा है। वहीं बहुत सारे लोग जोमैटो के इस पोस्ट की खूब तारीफ भी कर रहें हैं। zomato से तो घर बैठे हम सभी खाना ऑर्डर करते हैं लेकिन क्या आपको मालूम है कब और किसने इस कंपनी की शुरुआत की। आज हम zomato की कहानी आप सब के साथ शुरू करेंगे। बता दें कि zomato कंपनी जिसकी आज एक हजार करोड़ नेट वर्थ है उसके संस्थापक दीपेन्द्र गोयल है। पहले zomato का नाम फूडीबे था। अब zomato अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया समेत 23 देशों में अपनी सुविधा देता है। दीपेन्द्र के कामयाबी की कहानी कुछ ऐसी है कि जब उन्होंने एक कमरे से उन्होंने अपने बिजनेस की शुरुआत की थी। मगर आज दीपिंदर गोयल की कंपनी की कीमत 1000 करोड़ से ज्यादा हो चुकी है। दीपेन्द्र बताते हैं कि बचपन से उन्हेंही पढ़ाई में कोई खास दिलचस्पी नहीं थी। वह छठीं कक्षा और कॉलेज के प्रथम वर्ष में फेल भी हो गए थे। फेल होने से दीपिंदर को इतना दुख पहुंचा कि उन्होंने खूब मन लगाकर पढ़ाई करने की ठानी। उन्होंने दिन रात एक करके मेहनत की और आईआईटी के लिए चयनित हो गए। आईआईटी से डिग्री पूरी करने के बाद उन्होंने मल्टीनेशनल कंपनी 'बेन एंड कंपनी' में काम किया। दीपेन्द्र ने बताया कि उन्हें इस काम का आइडिया तब आया जब रोज़ की तरह वो काम करने के बाद कैंटीन में आएं तो, खाने का इंतज़ार कर रहे थे, तभी उन्हें महसूस हुआ कि इसमें काफी वक्त जाया होता है। उन्होंने खाने का मेन्यू स्कैन कर के ऑनलाइन डाला जिसे लोगों ने काफी पसंद किया। यही से उन्हें जोमैटो का आईडिया आया। ऑनलाइन मेन्यू पर अच्छा रिसपॉन्स मिलता देख उन्होंने वेबसाइट खोलने का सोची जिसमें लोगों को आसपास के रेस्टोरेंट की जानकारी मिल सके। अपने सहकर्मी पंकज चड्ढा के साथ मिलकर उन्होंने 2008 में 'फूडीबे' खोली जिसमें रेस्टोरेंट के मेन्यू से लेकर उसकी समीक्षा भी होती थी।