आरएसएस का तीन दिवसीय कार्यक्रम आज से शुरू, नही शामिल होंगे विपक्षी दलों के शीर्ष नेता

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आरएसएस का तीन दिवसीय कार्यक्रम आज से शुरू, नही शामिल होंगे विपक्षी दलों के शीर्ष नेता

नई दिल्ली। राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ की तीन दिवसीय व्याख्यानमाला सोमवार से दिल्ली में शुरू हो रही है। इस कार्यक्रम में विपक्ष के बहुत ही कम शीर्ष नेताओं के शामिल होने की संभावना है। कार्यक्रम के तीनों दिन आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत द्वारा राष्ट्रीय महत्व के विभिन्न समसामयिक विषयों पर संघ का विचार प्रस्तुत किया जाना है।

Three Day Meeting Of Rss Starts From Today At New Delhi :

बताया जा रहा है कि इस कार्यक्रम में करीब 700-750 मेहमान शामिल हो सकते है। इनमें से 90 फीसदी लोग संघ से नहीं हैं। मोहन भागवत शुरुआती दो दिन में कार्यक्रम को संबोधित करेंगे, जबकि आ​खिरी दिन वो जनता द्वारा पूछे जाने वाले सवालों का जवाब देंगे। मोहन भागवत इस दौरान करीब 200 से अधिक सवालों का जवाब देंगे।

बताया जा रहा है कि उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने इस कार्यक्रम में शामिल न होने का अपना फैसला बता दिया है, जबकि सीपीएम ने कहा कि येचुरी यात्रा पर हैं और आरएसएस की तरफ से कोई आमंत्रण भी नहीं आया है। वहीं कांग्रेस के प्रवक्ता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने कहा कि आरएसएस और बीजेपी आमंत्रण भेजने को लेकर फर्जी खबर फैला रहे हैं, जैसे मानो यह किसी सम्मान का कोई मेडल हो।

सुरजेवाला ने कहा कि आरएसएस की स्थापना साल 1925 में हुई थी और यह सत्तारूढ़ बीजेपी के विचारधारा का स्रोत है। आरएसएस के एक प्रवक्ता ने कहा कि संघ की आलोचना सभी के द्वारा की जा रही है, खास तौर से विपक्ष द्वारा। उन्होंने कहा कि यह कार्यक्रम हमारे विचार को प्रस्तुत करने के लिए है। यह बताने के लिए है कि हम उन मुद्दों को कैसे देखते है, जिसे विपक्ष हमें और सरकार को निशाना बनाने के लिए इस्तेमाल कर रहा है।

आरएसएस मानता है कि समाज के बड़े तबके की उत्कंठा बढ़ रही है, जिसमें बुद्धिजीवी और युवा भी शामिल हैं, जो विभिन्न मुद्दों पर आरएसएस का नजरिया जानना चाहते हैं। इस व्याख्यानमाला का आयोजन विज्ञान भवन में किया जा रहा है, जिसमें संघ प्रमुख लोगों के सवालों का भी जवाब देंगे।

नई दिल्ली। राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ की तीन दिवसीय व्याख्यानमाला सोमवार से दिल्ली में शुरू हो रही है। इस कार्यक्रम में विपक्ष के बहुत ही कम शीर्ष नेताओं के शामिल होने की संभावना है। कार्यक्रम के तीनों दिन आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत द्वारा राष्ट्रीय महत्व के विभिन्न समसामयिक विषयों पर संघ का विचार प्रस्तुत किया जाना है।बताया जा रहा है कि इस कार्यक्रम में करीब 700-750 मेहमान शामिल हो सकते है। इनमें से 90 फीसदी लोग संघ से नहीं हैं। मोहन भागवत शुरुआती दो दिन में कार्यक्रम को संबोधित करेंगे, जबकि आ​खिरी दिन वो जनता द्वारा पूछे जाने वाले सवालों का जवाब देंगे। मोहन भागवत इस दौरान करीब 200 से अधिक सवालों का जवाब देंगे।बताया जा रहा है कि उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने इस कार्यक्रम में शामिल न होने का अपना फैसला बता दिया है, जबकि सीपीएम ने कहा कि येचुरी यात्रा पर हैं और आरएसएस की तरफ से कोई आमंत्रण भी नहीं आया है। वहीं कांग्रेस के प्रवक्ता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने कहा कि आरएसएस और बीजेपी आमंत्रण भेजने को लेकर फर्जी खबर फैला रहे हैं, जैसे मानो यह किसी सम्मान का कोई मेडल हो।सुरजेवाला ने कहा कि आरएसएस की स्थापना साल 1925 में हुई थी और यह सत्तारूढ़ बीजेपी के विचारधारा का स्रोत है। आरएसएस के एक प्रवक्ता ने कहा कि संघ की आलोचना सभी के द्वारा की जा रही है, खास तौर से विपक्ष द्वारा। उन्होंने कहा कि यह कार्यक्रम हमारे विचार को प्रस्तुत करने के लिए है। यह बताने के लिए है कि हम उन मुद्दों को कैसे देखते है, जिसे विपक्ष हमें और सरकार को निशाना बनाने के लिए इस्तेमाल कर रहा है।आरएसएस मानता है कि समाज के बड़े तबके की उत्कंठा बढ़ रही है, जिसमें बुद्धिजीवी और युवा भी शामिल हैं, जो विभिन्न मुद्दों पर आरएसएस का नजरिया जानना चाहते हैं। इस व्याख्यानमाला का आयोजन विज्ञान भवन में किया जा रहा है, जिसमें संघ प्रमुख लोगों के सवालों का भी जवाब देंगे।