CM योगी के नाम से अफसरों पर रौब गांठते थे ये नटवरलाल, UP STF ने धर दबोचा

लखनऊ। यूपी एसटीएफ़(UP STF) ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नाम अफसरों पर रौब दिखाकर जालसाजी करने वाले तीन नटवरलाल गिरफ्तार किये हैं। लखनऊ के अलीगंज थाने में फर्जीवाड़े का मामला दर्ज कराया गया था। आरोपी कानपुर के डीएम, एसएसपी और उपश्रम आयुक्त को फोन करके कानपुर में किसी कंपनी को बंद करने का दवाब भी डाल रहे थे।

एसएसपी एसटीएफ़ मनोज तिवारी ने बताया, मूल रूप से उत्तराखंड के हरिद्वार जिले के सिडकुल थाना क्षेत्र का रहने वाला अतीश कुमार मिश्रा इस गिरोह का सरगना है। वह सिक्योरिटी एजेंसी चलाता है और एक डिग्री कॉलेज खोलने की तैयारी में है। उसके साथ बस्ती के वाल्टरगंज थाना क्षेत्र स्थित बंथला गांव का हनुमान शुक्ला तथा गोंडा जिले के तरबगंज थाना क्षेत्र स्थित मन्नीपुरवा गांव का राहुल उपाध्याय भी इस गिरोह में शामिल है।

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एसएसपी एसटीएफ़ के मुताबिक आरोपी हनुमान शुक्ला का लंबा आपराधिक इतिहास है। वह बस्ती जिले के कोतवाली थाना क्षेत्र में हुए राहुल मद्धेशिया अपहरण कांड में भी शामिल था, जिसमें उसके साथ पूर्व मंत्री अमरमणि त्रिपाठी भी अभियुक्त थे। इसके अलावा वह सिंचाई विभाग के जेई रवि प्रताप हत्याकांड का भी प्रमुख अभियुक्त था। उसके विरुद्ध लखनऊ, बस्ती, कानपुर नगर, सीतापुर व गोंडा में लगभग 10 मुकदमे दर्ज हैं।

ऐसे करते रहे खेल

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कानपुर के डीएम सुरेन्द्र कुमार सिंह के सीयूजी नंबर पर कॉल कर कहा गया, सीएम योगी ने आरएसपीएल ग्रुप के सभी प्रतिष्ठानों पर छापेमारी के आदेश दिए हैं। आप तत्काल कार्रवाई कर मुझे जानकारी दें। डीएम को इस कॉल पर शक हुआ तो उन्होंने पुलिस को जानकारी दी। डीएम ने पुलिस को बताया कि 26 जुलाई की सुबह 10 बजे एक शख्स ने उप श्रमायुक्त आरके मिश्र को फोन किया। उसने अपना नाम राकेश कुमार बताया।

जालसाज ने डीएम कानपुर सुरेन्द्र सिंह को फोन किया। जालसाज ने डीएम से भी वही सारी बातें की जो उसने उप श्रमायुक्त से की थी। डीएम सुरेन्द्र सिंह ने सबसे पहले इस कॉल की जानकारी एसएसपी कानपुर को दी। सर्विलांस की मदद से कॉल की डिटेल निकाली गयी। कॉल डिटेल पता लगाने पर पता लगा कि सिम लखनऊ के अलीगंज के सेक्टर-आर निवासी हसन के नाम पर है।

डीएम सुरेन्द्र कुमार सिंह ने एसएसपी लखनऊ दीपक कुमार को मामले की जानकारी दी। डीएम की तहरीर पर अलीगंज पुलिस ने हसन के खिलाफ आईपीसी की धारा 170, 182 और 416 के तहत मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की।

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