नागरिकता विवाद में फंसे टीआरएस विधायक की सदस्यता पर लटकी तलवार

नई दिल्ली। केन्द्रीय गृह मंत्रालय ने टीआरएस(तेलंगाना राष्ट्र समिति) के विधायक चिन्नमनेनी रमेश की भारतीय नागरिकता को रद्द करने का आदेश जारी किया है। आरोप है कि जर्मन महिला से विवाह करने के बाद जर्मनी में बस गए चिन्नमनेनी रमेश ने गलत तथ्यों के आधार पर भारतीय नागरिकता के लिए आवेदन किया था।हाईकोर्ट के आदेश पर गठित हुई केन्द्रीय गृहमंत्रालय के अधिकारियों की तीन सदस्यीय टीम ने चिन्नमनेनी रमेश पर लगे आरोपों को सही पाया है।

मिली जानकारी के मुताबिक रमेश ने 31 मार्च 2008 में करीमनगर डीएम के पास भारतीय नागरिकता के लिए आवेदन करते हुए जानकारी दी थी कि वह 22 जनवरी 2007 से भारत में स्थायी रूप से निवास कर रहे हैं। रमेश ने वर्ष 2009 में तेलगू देशम पार्टी की टिकट पर वेमुलावाड़ा सीट से चुनाव लड़ा और जीत हासिल की। वर्ष 2010 में टीआरएस के शामिल होने का फैसला किया और उप चुनाव में विजयी रहते हुए विधानसभा पहुंचे। 2009 के चुनाव में वेमुलावाड़ा सीट पर रमेश ने कांग्रेस के उम्मीदवार रहे ए श्रीनिवास ने चुनाव हारने के बाद रमेश की नागरिकता को हाईकोर्ट के समक्ष चुनौती दी थी। श्रीनिवास की ओर से दाखिल की गई याचिका में रमेश चिन्नमनेनी पर भारतीय नागरिकता लेने के लिए गलत जानकारी देने का आरोप लगाया था। श्रीनिवास के मुताबिक चिन्नमनेनी ने जर्मनी में रहते भारतीय नागरिकता प्राप्त की थी।

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मजबूत राजनीतिक पृष्ठभूमि रखते हैं चिन्नमनेनी रमेश —

चिन्नमनेनी रमेश विमुलावाड़ा से विधायक हैं। उनके पिता राजेश्वर रॉव एक बड़े बामपंथी नेता के रूप में पहचान रखते थे, जो पांच बार विधायक चुने गए। उनके चाचा विद्यासागर रॉव महाराष्ट्र के राज्यपाल हैं। रमेश और तेलंगाना के मुख्यमंत्री चन्द्रशेखर रॉव रिश्तेदार हैं।

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नागरिकता विवाद में फंसे रमेश का कहना है कि उनके पास अपनी निरस्त हो चुकी नागरिकता के विरुद्ध केन्द्रीय गृहमंत्रालय के समक्ष साबित करने के लिए एक मौका है। वह गृहमंत्रालय की ओर से जारी आदेश का अध्ययन करने के बाद 30 दिनों के भीतर गृहमंत्रालय के सचिव के समक्ष अपील करेंगे। जहां वह अपना पक्ष रखने में सफल होंगे।

बताया जाता है कि रमेंश ने 1976 में जर्मन में रहने वाली महिला से शादी करने के बाद 1993 में जर्मन नागरिकता ग्रहण कर ली थी। चूंकि जर्मनी और भारत के कानून के मुताबिक दोनों देशों के नागरिक एक समय में एक ही देश की नागरिकता ग्रहण कर सकता है, इसलिए रमेश ने भारतीय नागरिकता को त्याग दिया था।

विधायक बनने के बाद भी जर्मनी में रहे रमेश—

कुछ रिपोर्टस में यह भी सामने आया है कि रमेश चिन्नमनेनी ने विधायक बनने के बाद दो सालों में केवल 10 दिन ही विधानसभा की कार्रवाई मे हिस्सा लिया। वह विधानसभा से सबसे ज्यादा अनुपस्थित रहने वाले विधायक रहे। उन पर वेमुलावाडा के नेताओं ने जर्मनी में रहकर अपने विधानसभा क्षेत्र के विकास कार्यों को ठप्प करने का आरोप भी लगाया।