यूपी के पर्यटन विभाग में करोड़ों का घोटाला, तत्कालीन निदेशक समेत 12 पर FIR

लखनऊ। सूबे में योगी सरकार बनने के बाद समाजवादी सरकार में शुरु हुई कई परियोजनाओं में गोरखधंधे का खुलासा होना शुरू हो गया है। ताजा मामला यूपी के पर्यटन विभाग का है, जिसमें करोड़ों के घोटाले की पुष्टि होने के बाद गाजीपुर जिले के गहमर थाने में एफ़आईआर दर्ज कराई गयी है। इस एफ़आईआर में 12 लोगों के नाम सामने आए हैं, जिनमें राजकीय निर्माण निगम के तत्कालीन परियोजना निदेशक डीपी सिंह, एई गुरफान अली, जेई जितेंद्र सिंह सहित संबंधित नौ ठेकेदारों के नाम शामिल हैं। बता दें कि यह घोटाला तत्कालीन सपा सरकार के पूर्व मंत्री ओम प्रकाश सिंह के कार्यकाल के दौरान हुआ है। ओम प्रकाश सिंह जमानिया विधानसभा सीट से विधायक भी रह चुके हैं।

तत्कालीन पर्यटन मंत्री ओम प्रकाश सिंह की पहल पर साल 2012-13 और 2013-14 में राज्य योजना के तहत जमानियां विधानसभा क्षेत्र में करोड़ों की परियोजनाएं मंजूर हुईं थीं। आरोप है कि इनमें कई परियोजनाएं पूरी तो नहीं हो पायी लेकिन परियोजना के लिए स्वीकृत रकम जरूर निकाल ली गयी। विधानसभा चुनाव होने के बाद सत्ता में आई भाजपा सरकार में जमानियां की विधायक सुनीता सिंह चुनी गईं।

{ यह भी पढ़ें:- गाजीपुर: RSS कार्यकर्ता को बदमाशों ने मारी गोली, इलाज के दौरान मौत }

विधायक सुनीता सिंह की पहल पर यह पूरा मामला मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ तक पहुंचा। मुख्यमंत्री के निर्देश पर मौजूदा पर्यटन मंत्री रीता बहुगुणा जोशी ने विभागीय समीक्षा बैठक में इस मामले की जांच का आदेश दिया। इस मामले की जांच के लिए एक कमेटी गठित की गयी। कहा जा रहा है कि कमेटी के लोगों ने घोटाले की पुष्टी कर शासन को चिट्ठी लिख दी।

ऊपर से आदेश मिलने के बाद विभाग के संयुक्त निदेशक वाराणसी अविनाश चंद्र मिश्र अपनी टीम के साथ गहमर थाना मुख्यालय पहुंचे। उन्होंने घोटाले में शामिल इंजीनियरों, ठेकेदारों के खिलाफ तहरीर दी। पुलिस अधीक्षक गाजीपुर सोमेन वर्मा ने बताया, एफ़आईआर दर्ज कर ली गयी है और मामले की जांच की जा रही है।

{ यह भी पढ़ें:- नाबालिग गैंगरेप पीड़िता ने किया सुसाइड, CM योगी ने दिया था सुरक्षा का भरोसा }

इन परियोजनाओं में हुआ घोटाला-

तहरीर में कामाख्या धाम में पर्यटन विकास के साथ सेवराई के चीरा पोखरा तथा परेमन पोखरा के सुंदरीकरण के अलावा कीनाराम स्थल देवल व देवकली में पर्यटन विकास की परियोजना शामिल हैं। इन परियोजनाओं के लिए करीब आठ करोड़ रुपये स्वीकृत थे। इस राशि का भुगतान भी हो गया।

आरोप है कि इन परियोजनाओं के लिये करीब आठ करोड़ रुपये स्वीकृत थे। राशि का भुगतान भी हो गया, जबकि जांच में मौके पर छह करोड़ 99 लाख 48 हजार रुपये से अधिक का घोटाला मिलने की बात कही गयी है।

{ यह भी पढ़ें:- भ्रष्टाचार पर योगी सरकार का सेल्फी वार }