महाराष्ट्र सरकार में तकरार : उद्धव ने भीमा कोरेगांव हिंसा मामले की जांच NIA को सौंपी, खफा हुए शरद पवार

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महाराष्ट्र सरकार में तकरार : उद्धव ने भीमा कोरेगांव हिंसा मामले की जांच NIA को सौंपी, खफा हुए शरद पवार

नई दिल्ली। राकांपा प्रमुख शरद पवार (Sharad Pawar) ने एल्गार परिषद मामले की जांच महाराष्ट्र पुलिस से लेकर एनआईए (NIA) को सौंपे जाने को लेकर उद्धव ठाकरे (Uddhav Thackeray) सरकार की शुक्रवार को आलोचना की। कोल्हापुर में पत्रकारों से बातचीत में शरद पवार ने कहा कि केंद्र सरकार ने मामले की जांच पुणे पुलिस से लेकर एनआईए को सौंपकर ठीक नहीं किया क्योंकि कानून-व्यवस्था राज्य सरकार का विषय है।

Trouble In Maharashtra Government Uddhav Thackeray Handed Over Investigation Of Bhima Koregaon Violence Case To Nia Angry Sharad Pawar :

एनसीपी चीफ शरद पवार ने कहा, ‘मामले की जांच एनआईए को सौंपकर केंद्र सरकार ने ठीक नहीं किया और इससे भी ज्यादा गलत बात यह हुई कि राज्य सरकार ने इसका समर्थन किया।’ गौरतलब है कि राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) शिवसेना के नेतृत्व वाले महा विकास आघाड़ी (एमवीए) सरकार की सहयोगी है और इसके नेता अनिल देशमुख राज्य के गृहमंत्री हैं।

अचानक एनएआई को जांच क्यों?

अब सवाल उठाए जा रहे हैं कि आखिर दो साल बाद अचानक केंद्र सरकार को ये मामला एनआईए को देने की क्यों सूझी। इसे केंद्र की ओर से राज्य सरकार के अधिकारों पर अतिक्रमण के तौर पर भी देखा जा रहा है, क्योंकि कानून व्यवस्था संभालने की जिम्मेदारी राज्य सरकार का विषय है। एनआई एक्ट में जांच एजेंसी को ये अधिकार दिए गए हैं कि वो खुद से किसी मामले की जांच अपने अधीन लेकर तहकीकात शुरू करें। महाराष्ट्र के गृह मंत्री अनिल देशमुख के मुताबिक केंद्र सरकार को इस मामले में दखलअंदाजी नहीं करनी चाहिए थी उन्होंने इस हरकत को असंवैधानिक बताया।

NIA को जांच सौंपना गृहमंत्री ने बताया गलत

25 जनवरी को महाराष्ट्र सरकार ने विशेष अदालत में जांच एनआईए को सौंपे जाने पर अपना विरोध जताया। इसके बाद गृहमंत्री अनिल देशमुख ने एलान किया कि जांच पुणे पुलिस के आधीन ही रहेगी, लेकिन 13 फरवरी को गृहमंत्री के मत को दरकिनार करते हुए उद्धव ठाकरे ने मामला एनआईए को सौंपने के लिये अपनी मंजूरी दे दी।

शरद पवार ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “मुख्यमंत्री को जांच एनआईए को सौंपने का अधिकार है, लेकिन इस मामले की जांच को एनआईए को सौंपा जाना ठीक नहीं।” बीजेपी नेता किरीट सौमैया ने इस पर चुटकी लेते हुए कहा, “उद्धव ठाकरे सरकार का काम करने का तरीका अजीब है॰”

नई दिल्ली। राकांपा प्रमुख शरद पवार (Sharad Pawar) ने एल्गार परिषद मामले की जांच महाराष्ट्र पुलिस से लेकर एनआईए (NIA) को सौंपे जाने को लेकर उद्धव ठाकरे (Uddhav Thackeray) सरकार की शुक्रवार को आलोचना की। कोल्हापुर में पत्रकारों से बातचीत में शरद पवार ने कहा कि केंद्र सरकार ने मामले की जांच पुणे पुलिस से लेकर एनआईए को सौंपकर ठीक नहीं किया क्योंकि कानून-व्यवस्था राज्य सरकार का विषय है। एनसीपी चीफ शरद पवार ने कहा, 'मामले की जांच एनआईए को सौंपकर केंद्र सरकार ने ठीक नहीं किया और इससे भी ज्यादा गलत बात यह हुई कि राज्य सरकार ने इसका समर्थन किया।' गौरतलब है कि राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) शिवसेना के नेतृत्व वाले महा विकास आघाड़ी (एमवीए) सरकार की सहयोगी है और इसके नेता अनिल देशमुख राज्य के गृहमंत्री हैं। अचानक एनएआई को जांच क्यों? अब सवाल उठाए जा रहे हैं कि आखिर दो साल बाद अचानक केंद्र सरकार को ये मामला एनआईए को देने की क्यों सूझी। इसे केंद्र की ओर से राज्य सरकार के अधिकारों पर अतिक्रमण के तौर पर भी देखा जा रहा है, क्योंकि कानून व्यवस्था संभालने की जिम्मेदारी राज्य सरकार का विषय है। एनआई एक्ट में जांच एजेंसी को ये अधिकार दिए गए हैं कि वो खुद से किसी मामले की जांच अपने अधीन लेकर तहकीकात शुरू करें। महाराष्ट्र के गृह मंत्री अनिल देशमुख के मुताबिक केंद्र सरकार को इस मामले में दखलअंदाजी नहीं करनी चाहिए थी उन्होंने इस हरकत को असंवैधानिक बताया। NIA को जांच सौंपना गृहमंत्री ने बताया गलत 25 जनवरी को महाराष्ट्र सरकार ने विशेष अदालत में जांच एनआईए को सौंपे जाने पर अपना विरोध जताया। इसके बाद गृहमंत्री अनिल देशमुख ने एलान किया कि जांच पुणे पुलिस के आधीन ही रहेगी, लेकिन 13 फरवरी को गृहमंत्री के मत को दरकिनार करते हुए उद्धव ठाकरे ने मामला एनआईए को सौंपने के लिये अपनी मंजूरी दे दी। शरद पवार ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, "मुख्यमंत्री को जांच एनआईए को सौंपने का अधिकार है, लेकिन इस मामले की जांच को एनआईए को सौंपा जाना ठीक नहीं।" बीजेपी नेता किरीट सौमैया ने इस पर चुटकी लेते हुए कहा, "उद्धव ठाकरे सरकार का काम करने का तरीका अजीब है॰"