US ने फिर दी भारत को चेतावनी, कहा-रूस से न ले एस-400 मिसाइल रक्षा प्रणाली

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US ने फिर दी भारत को चेतावनी, कहा-रूस से न ले एस-400 मिसाइल रक्षा प्रणाली

नई दिल्ली। ट्रंप प्रशासन एक बार फिर भारत को रूस के साथ S-400 मिसाइल रक्षा प्रणाली का सौदा करने से रोकने की कोशिश कर रहा है। अमेरिका का कहना है कि लॉन्ग टर्म में यह फैसला भारत के हित में नहीं होगा। इससे भारत के साथ उसकी रणनीतिक साझेदारी पर असर पड़ेगा। ट्रंप प्रशासन का यह बयान अमेरिकी विदेश मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी द्वारा कुछ सप्ताह पहले दी गई ऐसी ही एक चेतावनी के बाद आया है।

Trump Admin Warns India S 400 From Russia Would Limit Cooperation :

अमेरिका के सहयोगी विदेश मंत्री अलाइस वेल्स ने कहा कि दक्षिण एशिया के देशों को खुद चुनना होगा कि वे कहां से हथियार खरीदेंगे। उन्होंने कहा कि समझौतों के मुताबिक अमेरिका से ज्यादा हथियारों की खरीदारी होनी चाहिए लेकिन भारत रूस से एस-400 मिसाइल रक्षा प्रणाली खरीदने जा रहा है।

उन्होंने कहा कि इस सरकार का उद्देश्य भारत की रक्षा सौदों में मदद करना है और रक्षा सौदे के मामले में अमेरिका भारत का सबसे बड़ा सहयोगी है। उन्होंने कहा कि रूस के साथ सौदा हमारे सहयोग पर असर डालेगा। बता दें कि अमेरिका ने भारत को एस-400 की जगह पैट्रियॉट- 3 मिसाइल खरीदने का भी ऑफर दिया। ट्रंप प्रशासन ने संकेत दिए हैं कि वह दिल्ली को टर्मिनल हाई अल्टीट्यूड एरिया डिफेंस और पैट्रियॉट -3 बेचना चाहता है।

बता दें कि राष्ट्रपति पुतिन और पीएम मोदी के बीच व्यापक चर्चा के बाद 5 अरब डॉलर का समझौता किया गया है जिसमें एस-400 रक्षा प्रणाली की खरीद शामिल है। एस-400 मिसाइल सक्षा प्रणाली सौदे का परिणाम अमेरिकी प्रतिबंधों के रूप में भी सामने आ सकता है जैसा कि प्रशासन ने सहयोग घटाने के संकेत भी दिए हैं। रूस लंबे समय से भारत का सहयोगी रहा है ऐसे में यह डील कैंसल करके रिश्तों में खटास लाने का काम नहीं किया जा सकता है।

नई दिल्ली। ट्रंप प्रशासन एक बार फिर भारत को रूस के साथ S-400 मिसाइल रक्षा प्रणाली का सौदा करने से रोकने की कोशिश कर रहा है। अमेरिका का कहना है कि लॉन्ग टर्म में यह फैसला भारत के हित में नहीं होगा। इससे भारत के साथ उसकी रणनीतिक साझेदारी पर असर पड़ेगा। ट्रंप प्रशासन का यह बयान अमेरिकी विदेश मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी द्वारा कुछ सप्ताह पहले दी गई ऐसी ही एक चेतावनी के बाद आया है। अमेरिका के सहयोगी विदेश मंत्री अलाइस वेल्स ने कहा कि दक्षिण एशिया के देशों को खुद चुनना होगा कि वे कहां से हथियार खरीदेंगे। उन्होंने कहा कि समझौतों के मुताबिक अमेरिका से ज्यादा हथियारों की खरीदारी होनी चाहिए लेकिन भारत रूस से एस-400 मिसाइल रक्षा प्रणाली खरीदने जा रहा है। उन्होंने कहा कि इस सरकार का उद्देश्य भारत की रक्षा सौदों में मदद करना है और रक्षा सौदे के मामले में अमेरिका भारत का सबसे बड़ा सहयोगी है। उन्होंने कहा कि रूस के साथ सौदा हमारे सहयोग पर असर डालेगा। बता दें कि अमेरिका ने भारत को एस-400 की जगह पैट्रियॉट- 3 मिसाइल खरीदने का भी ऑफर दिया। ट्रंप प्रशासन ने संकेत दिए हैं कि वह दिल्ली को टर्मिनल हाई अल्टीट्यूड एरिया डिफेंस और पैट्रियॉट -3 बेचना चाहता है। बता दें कि राष्ट्रपति पुतिन और पीएम मोदी के बीच व्यापक चर्चा के बाद 5 अरब डॉलर का समझौता किया गया है जिसमें एस-400 रक्षा प्रणाली की खरीद शामिल है। एस-400 मिसाइल सक्षा प्रणाली सौदे का परिणाम अमेरिकी प्रतिबंधों के रूप में भी सामने आ सकता है जैसा कि प्रशासन ने सहयोग घटाने के संकेत भी दिए हैं। रूस लंबे समय से भारत का सहयोगी रहा है ऐसे में यह डील कैंसल करके रिश्तों में खटास लाने का काम नहीं किया जा सकता है।