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तुर्की से 4 युद्धपोत खरीद रहा PAK, राष्ट्रपति अर्दोआन ने निर्माण कार्य शुरू कराया

Turkey Construction Of Four Naval Warships For Pakistan Navy Imran Khan

By रवि तिवारी 
Updated Date

नई दिल्ली। पाकिस्तान (Pakistan) और तुर्की (Turkey) के बीच दोस्ती गहरी होती जा रही है। पाकिस्तान (Pakistan) और तुर्की (Turkey) के बीच दोस्ती गहरी होती जा रही है। पिछले दिनों संयुक्त राष्ट्र महासभा (United Nations General Assembly) में कश्मीर के मुद्दे पर पाकिस्तान का साथ देने वाला तुर्की अब उनके लिए जंगी जहाज (warship) बना रहा है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक दोनों देशों ने इसके लिए 2018 में एक करार पर हस्ताक्षर किए थे।

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पाकिस्तानी टीवी चैनल जियो न्यूज की खबर के मुताबिक तुर्की के राष्ट्रपति रजब तैयब एर्दोग़ान ने रविवार को एक कार्यक्रम में ये घोषणा की। खबर में तुर्की के राष्ट्रपति के हवाले से कहा गया है, ‘मैं आशा करता हूं कि तुर्की द्वारा मुहैया कराए जा रहे इस जंगी जहाज से पाकिस्तान को फायदा होगा।’

पाकिस्तानी नौसेना ने तुर्की से मिलगेम वर्ग के चार युद्धपोत की खरीदारी के लिए जुलाई 2018 में एक करार किया था। एर्दोग़ान के मुताबिक तुर्की दुनिया के उन 10 देशों में शामिल है जो राष्ट्रीय क्षमता का उपयोग कर युद्धपोत का निर्माण, डिजाइन और रख-रखाव कर सकते हैं।

पाकिस्तान-तुर्की की दोस्ती

पिछले हफ्ते संयुक्त राष्ट्र महासभा में तुर्की के राष्ट्रपति रजब तैयब एर्दोग़ान ने अपने भाषण के दौरान कश्मीर का मुद्दा उठाया। तुर्की एकमात्र मुस्लिम देश है, जिसने जम्मू-कश्मीर से आर्टिकल 370 हटाए जाने पर भारत की आलोचना की और पाकिस्तान का समर्थन किया। तुर्की के राष्ट्रपति ने कहा था कि कश्मीर के मौजूदा हालात से तनाव और बढ़ सकता है। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने महासभा में कश्मीर का मुद्दा उठाने के लिए तुर्की के राष्ट्रपति का शुक्रिया भी अदा किया था। 

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समुद्री ताकत बढ़ा रहा है पाकिस्तान?

गौरतलब है कि पाकिस्तान की ओर से लगातार अरब सागर में ताकत बढ़ाने की कोशिश हो रही है। एक तरफ तो वह तुर्की से ये चार युद्धपोत खरीद रहा है, तो दूसरी ओर चीन के लिए भी उसने ग्वादर बंदरगाह को खोल दिया है।

पाकिस्तान के बंदरगाहों पर चीन की दखल बढ़ रही है, चीनी निवेश इस ओर बढ़ रहा है जो भारत के लिए चिंता की बात हो सकती है। कई बार पाकिस्तान की ओर से कोशिश की गई है कि समुद्री रास्ते से आतंकियों को उसी तरह भारत में घुसाया जाए, जिस तरह 2008 के मुंबई हमले में हुआ था।

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