दुधवा नेशनल पार्क में आए दो दुर्लभ पक्षी, पार्क प्रशासन में खुशी की लहर

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दुधवा नेशनल पार्क में आए दो दुर्लभ पक्षी, पार्क प्रशासन में खुशी की लहर

लखनऊ। उत्तर प्रदेश स्थित दुधवा टाइगर रिजर्व में दुर्लभ रेड हेडेड वल्चर व ब्लैक क्रस्टेड बुलबुल मिले है। तीन दिन से नेशनल पार्क में पक्षियों की गिनती चल रही थी। जिसमें दुर्लभ प्रजाति के पक्षी मिले हैं। इससे पार्क प्रशासन में खुशी की लहर है। इससे पहले बुलबुल को दुधवा में तो रेड हेडेड वल्चर को किशनपुर में देखा गया था।

Two Rare Birds In Dudhwa National Park The Wave Of Happiness In The Park Administration :

दरअसल, दुधवा नेशनल पार्क में इस बार सात जून से नौ जून तक पहली बार ग्रीष्मकालीन पक्षी गणना का काम किया गया। तीन दिन तक चले गणना में विशेषज्ञों ने करीब 160 प्रजाति के पक्षियों को देखा और उन्हे कैमरे में कैद किया। इस बार की गणना में कई दक्षिण भारतीय पक्षी भी दिखे जो कर्नाटक व तमिलनाडु से यहां आए हैं।

वहीं, ग्रीष्म कालीन पक्षी गणना में तीन एनजीओ ने सहयोग किया। जिसमें विश्व प्रकृति निधि, कतर्निया फाउंडेशन व रोहेलखंड नेचर क्लब बरेली शामिल है। इनके विशेषज्ञों ने पक्षी गणना को मूर्त रूप दिया। तीनों एनजीओ के 10 विशेषज्ञ गणना कार्य में शामिल थे।

बता दें, ग्रीष्मकालीन पक्षी गणना में कई दुर्लभ पक्षी देखे गए हैं जिसमें रेड हेडेड वल्चर व ब्लैक क्रस्टेड बुलबुल मुख्य है। इसके अलावा दुर्लभ ग्रेट हार्नविल, ग्रेट स्लेटी वुडकीपर, स्वांप फ्रैकोलिन, ग्रे हेडेड फिश ईगल, अरेंज ब्रेस्टेड पीजन, इंडियन पेटा, चेस्टनट हेडेड बी ईटर प्रजाति के पक्षी भी दिखे। इसमें रेड हेडेड वल्चर तो विशेष तौर से इंडेनग्रीड प्रजाति का है जबकि ब्लैक क्रस्टेड बुलबुल हिमालयन प्रजाति की पक्षी है।

इतना ही नहीं दुधवा नेशनल पार्क के उपनिदेशक महावीर कौजलगि का कहना है कि ग्रीष्मकाल में पक्षियों की संख्या कम दिखती है क्योंकि बाहर ठंडे प्रदेशों से आने वाले पक्षी वापस चले जाते हैं, लेकिन 160 प्रजाति के पक्षियों का इस गणना में दिखना उत्साहवर्धक है। इससे यह भी साबित होता है कि दुधवा की विविधता को सही ढ़ंग से सहेजा गया है। उन्होंने कहा कि रेड हेडेड वल्चर व ब्लैक क्रस्टेड बुलबुल का यहां देखा जाना बड़ी उपलब्धि है।

लखनऊ। उत्तर प्रदेश स्थित दुधवा टाइगर रिजर्व में दुर्लभ रेड हेडेड वल्चर व ब्लैक क्रस्टेड बुलबुल मिले है। तीन दिन से नेशनल पार्क में पक्षियों की गिनती चल रही थी। जिसमें दुर्लभ प्रजाति के पक्षी मिले हैं। इससे पार्क प्रशासन में खुशी की लहर है। इससे पहले बुलबुल को दुधवा में तो रेड हेडेड वल्चर को किशनपुर में देखा गया था। दरअसल, दुधवा नेशनल पार्क में इस बार सात जून से नौ जून तक पहली बार ग्रीष्मकालीन पक्षी गणना का काम किया गया। तीन दिन तक चले गणना में विशेषज्ञों ने करीब 160 प्रजाति के पक्षियों को देखा और उन्हे कैमरे में कैद किया। इस बार की गणना में कई दक्षिण भारतीय पक्षी भी दिखे जो कर्नाटक व तमिलनाडु से यहां आए हैं। वहीं, ग्रीष्म कालीन पक्षी गणना में तीन एनजीओ ने सहयोग किया। जिसमें विश्व प्रकृति निधि, कतर्निया फाउंडेशन व रोहेलखंड नेचर क्लब बरेली शामिल है। इनके विशेषज्ञों ने पक्षी गणना को मूर्त रूप दिया। तीनों एनजीओ के 10 विशेषज्ञ गणना कार्य में शामिल थे। बता दें, ग्रीष्मकालीन पक्षी गणना में कई दुर्लभ पक्षी देखे गए हैं जिसमें रेड हेडेड वल्चर व ब्लैक क्रस्टेड बुलबुल मुख्य है। इसके अलावा दुर्लभ ग्रेट हार्नविल, ग्रेट स्लेटी वुडकीपर, स्वांप फ्रैकोलिन, ग्रे हेडेड फिश ईगल, अरेंज ब्रेस्टेड पीजन, इंडियन पेटा, चेस्टनट हेडेड बी ईटर प्रजाति के पक्षी भी दिखे। इसमें रेड हेडेड वल्चर तो विशेष तौर से इंडेनग्रीड प्रजाति का है जबकि ब्लैक क्रस्टेड बुलबुल हिमालयन प्रजाति की पक्षी है। इतना ही नहीं दुधवा नेशनल पार्क के उपनिदेशक महावीर कौजलगि का कहना है कि ग्रीष्मकाल में पक्षियों की संख्या कम दिखती है क्योंकि बाहर ठंडे प्रदेशों से आने वाले पक्षी वापस चले जाते हैं, लेकिन 160 प्रजाति के पक्षियों का इस गणना में दिखना उत्साहवर्धक है। इससे यह भी साबित होता है कि दुधवा की विविधता को सही ढ़ंग से सहेजा गया है। उन्होंने कहा कि रेड हेडेड वल्चर व ब्लैक क्रस्टेड बुलबुल का यहां देखा जाना बड़ी उपलब्धि है।