यूको बैंक ने यशोवर्धन बिड़ला को डीफॉल्टर घोषित किया, जानें पूरा मामला

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यूको बैंक ने यशोवर्धन बिड़ला को डीफॉल्टर घोषित किया, जानें पूरा मामला

नई दिल्ली। यूको बैंक ने यशोवर्धन बिड़ला को विलफुल डिफॉल्टर घोषित कर दिया है। यश बिड़ला के ग्रुप की एक कंपनी बिड़ला सूर्या लिमिटेड द्वारा 67 करोड़ रुपये का कर्ज न चुकाने के चलते उन्हें डिफॉल्टर घोषित किया गया है। एसबीआई, पीएनबी और बैंक ऑफ इंडिया के कंसोर्शियम के साथ यूको बैंक ने बिड़ला सूर्या को लोन दिया था। बिड़ला सूर्या लिमिटेड में यशोवर्धन बिड़ला डायरेक्टर हैं। वे यश बिड़ला ग्रुप के चेयरमैन भी हैं।

Uco Bank Declares Yashovardhan Birla A Wilful Defaulter :

आपको बता दें कि यूको बैंक की स्थापना यश बिड़ला के पड़दादा, घनश्याम दास बिड़ला ने की थी. जी. डी. बिड़ला के भाई रामेश्वर दास बिड़ला यश बिड़ला के पिता अशोक बिड़ला के दादा थे। यश बिड़ला ने 23 साल की उम्र में उस समय परिवार का कारोबार संभाला जब बेंगलुरु में एक एयर क्रैश में उनके माता-पिता की मृत्यु हो गई थी।

अब क्या होगा-अगर किसी प्रमोटर को बैंक या फिर NBFC कंपनी विलफुल डिफॉल्टर घोषित कर देती है तो उसे मौजूदा बिजनेस ही नहीं बल्कि किसी भी कंपनी जिसमें वह डायरेक्टर है, उसे फंडिंग नहीं मिलती हैं।

कौन होता है विलफुल डिफॉल्टर?

बैंकर्स के मुताबिक, किसी कर्जदार को विलफुल डिफॉल्टर घोषित करना एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें उन्हें अपनी स्थिति को पेश करने का पर्याप्त मौका मिलता है। किसी कर्जदार को ‘विलफुल डिफॉल्टर’ तब बताया जाता है जब वह जानबूझ कर कर्ज नहीं चुकाता है। यानी, उसके पास कर्ज चुकाने के लिए पर्याप्त संसाधन है, फिर भी लोन रीपेमेंट नहीं कर रहा। इसके अलावा कर्जदाता को बिना बताए ऐसेट्स की बिक्री और पैसे को दूसरे कामों में लगाने के चलते भी किसी व्यक्ति को विलफुल डिफॉल्टर घोषित किया जाता है।

जानिए कौन हैं यश बिड़ला

यश बिड़ला यशोवर्धन बिड़ला ग्रुप के चेयरमेन हैं।
उनके समूह का मशीन टूल्स, इंजन पाइप्स, इंफोटक,ट्रेवल, स्टील समेत अनेक क्षेत्रों में तगड़ा कारोबार है।
वे बॉडी बिल्डिंग भी करते हैं, वे किसी फिल्मी सितारे की तरह हैंडसम लगते हैं।
यश बिड़ला की धर्म-कर्म में गहरी आस्था है।
उनके पिता अशोक बिड़ला भी देश के नामी उद्योगपति थे, उनका एक विमान हादसे में निधन हुआ था।
वे मुंबई में गोपी बिड़ला स्कूल और अशोक बिड़ला अस्पताल भी चलाते हैं।
वे सुजाता बिड़ला चैरिटी ट्रस्ट भी चलाते हैं।
यश बिड़ला के समूह में करीब तीन हजार से ज्यादा मुलाजिम हैं।
वे कॉरपोरेट घरानों के संगठनों जैसे फिक्की या सीआईआई की राजनीति से दूर रहते हैं।
वे रोज करीब दो घंटे जिम भी जाते हैं।

नई दिल्ली। यूको बैंक ने यशोवर्धन बिड़ला को विलफुल डिफॉल्टर घोषित कर दिया है। यश बिड़ला के ग्रुप की एक कंपनी बिड़ला सूर्या लिमिटेड द्वारा 67 करोड़ रुपये का कर्ज न चुकाने के चलते उन्हें डिफॉल्टर घोषित किया गया है। एसबीआई, पीएनबी और बैंक ऑफ इंडिया के कंसोर्शियम के साथ यूको बैंक ने बिड़ला सूर्या को लोन दिया था। बिड़ला सूर्या लिमिटेड में यशोवर्धन बिड़ला डायरेक्टर हैं। वे यश बिड़ला ग्रुप के चेयरमैन भी हैं। आपको बता दें कि यूको बैंक की स्थापना यश बिड़ला के पड़दादा, घनश्याम दास बिड़ला ने की थी. जी. डी. बिड़ला के भाई रामेश्वर दास बिड़ला यश बिड़ला के पिता अशोक बिड़ला के दादा थे। यश बिड़ला ने 23 साल की उम्र में उस समय परिवार का कारोबार संभाला जब बेंगलुरु में एक एयर क्रैश में उनके माता-पिता की मृत्यु हो गई थी। अब क्या होगा-अगर किसी प्रमोटर को बैंक या फिर NBFC कंपनी विलफुल डिफॉल्टर घोषित कर देती है तो उसे मौजूदा बिजनेस ही नहीं बल्कि किसी भी कंपनी जिसमें वह डायरेक्टर है, उसे फंडिंग नहीं मिलती हैं। कौन होता है विलफुल डिफॉल्टर? बैंकर्स के मुताबिक, किसी कर्जदार को विलफुल डिफॉल्टर घोषित करना एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें उन्हें अपनी स्थिति को पेश करने का पर्याप्त मौका मिलता है। किसी कर्जदार को 'विलफुल डिफॉल्टर' तब बताया जाता है जब वह जानबूझ कर कर्ज नहीं चुकाता है। यानी, उसके पास कर्ज चुकाने के लिए पर्याप्त संसाधन है, फिर भी लोन रीपेमेंट नहीं कर रहा। इसके अलावा कर्जदाता को बिना बताए ऐसेट्स की बिक्री और पैसे को दूसरे कामों में लगाने के चलते भी किसी व्यक्ति को विलफुल डिफॉल्टर घोषित किया जाता है। जानिए कौन हैं यश बिड़ला यश बिड़ला यशोवर्धन बिड़ला ग्रुप के चेयरमेन हैं। उनके समूह का मशीन टूल्स, इंजन पाइप्स, इंफोटक,ट्रेवल, स्टील समेत अनेक क्षेत्रों में तगड़ा कारोबार है। वे बॉडी बिल्डिंग भी करते हैं, वे किसी फिल्मी सितारे की तरह हैंडसम लगते हैं। यश बिड़ला की धर्म-कर्म में गहरी आस्था है। उनके पिता अशोक बिड़ला भी देश के नामी उद्योगपति थे, उनका एक विमान हादसे में निधन हुआ था। वे मुंबई में गोपी बिड़ला स्कूल और अशोक बिड़ला अस्पताल भी चलाते हैं। वे सुजाता बिड़ला चैरिटी ट्रस्ट भी चलाते हैं। यश बिड़ला के समूह में करीब तीन हजार से ज्यादा मुलाजिम हैं। वे कॉरपोरेट घरानों के संगठनों जैसे फिक्की या सीआईआई की राजनीति से दूर रहते हैं। वे रोज करीब दो घंटे जिम भी जाते हैं।