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संयुक्‍त राष्‍ट्र में तंगी का असर, अब शनिवार व रविवार को बंद रहेगा UN मुख्‍यालय

By रवि तिवारी 
Updated Date

मुंबई। संयुक्त राष्ट्र (यूएन) में नगदी की भारी कमी के चलते अब शनिवार व रविवार को मुख्‍यालय बंद रहेगा। इसके पूर्व मुख्‍यालय में हीटर और एसी को बंद करने का फैसला लिया गया था। यूएन की गतिविधियां संचालित करने के लिए उसके सदस्य देश एक तय राशि देते हैं। यूएन के मुताबिक, 4 अक्टूबर तक करीब 9800 करोड़ रुपए की राशि 65 देशों पर बकाया है। इनमें अकेले अमेरिका को 1 अरब डॉलर देने हैं। इसे लेकर खुद यूएन ने ट्वीट किया।  

यूएन ने ट्वीट कर लिखा, ‘न्यूयॉर्क में यूएनएचक्यू बिल्डिंग को अब छुट्टी वाले दिन (शनिवार-रविवार) को कैश की समस्या के कारण बंद रखने का फैसला लिया गया है। क्या आपके देश ने इस साल के नियमित संयुक्त राष्ट्र के बजट में अपना योगदान दिया है? देखें कौन से देश हैं ऑनर रोल पर हैं।’

लिफ्ट और एसी जैसी बुनियादी सुविधाएं बंद

193 देशों के संगठन संयुक्त राष्ट्र में नकदी की कमी हो गई है। यह संकट इतना गहरा गया है कि संगठन में काम बंद करने की नौबत आ गई है। हालात इस कदर खराब हैं कि लिफ्ट और एसी जैसी बुनियादी सुविधाएं बंद हो गई हैं। यूएन के पास सिर्फ 15 दिन केे खर्च के ही पैसे बचे हैं। इस मामले को समझने के लिए यह जानना जरूरी है कि आखिर यूएन को पैसा कहां से और कितना मिलता है ? वह इन पैसों को कहां खर्च करता है और इसके बाद ऐसा क्या हुआ कि यूएन के पास अब बिल्कुल भी फंड नहीं बचा है।

मैंबर्स द्वारा दिए जाने वाले फंड से चलता है संगठन

यूएन का खर्च उसके मैंबर्स द्वारा दिए जाने वाले फंड से चलता है। संयुक्त राष्ट्र के कुल 193 सदस्य देश हैं। ये सभी एक तय रकम यूएन को देते हैं। इनमें सबसे ज्यादा फंड अमेरिका देता है, जो कि करीब 10 बिलियन डॉलर सालाना है। इसके बाद इंग्लैंड और जापान अपना हिस्सा देते हैं। फंड देने वाले देशों की सूची में भारत टॉप-20 में शामिल नहीं है। हालांकि, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इसमें कटौती की बात करते रहे हैं।

भारत ने नियमित बजट का भुगतान किया

भारत संयुक्त राष्ट्र के उन 34 सदस्य देशों में शामिल है, जिसने अपने नियमित बजट का समय पर भुगतान किया है। भारत ने इस साल 31 जनवरी तक के नियमित बजट आकलन में 23.25 मिलियन डॉलर (165 करोड़ रु.) का भुगतान कर दिया है। इसके साथ ही अन्य 33 देशों ने भी संयुक्त राष्ट्र की 30 दिन की नियत अवधि के भीतर बकाया भुगतान कर दिया है। 30 दिन की नियत अवधि (31 जनवरी) की समाप्ति के बाद 95 अतिरिक्त सदस्य देशों ने पूर्ण रूप से भुगतान किया है।  

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