अंडर-17 विश्व कप : इतिहास रचने उतरेगा मेजबान भारत

नई दिल्ली। हर खेल का इतिहास रहा है कि दोयम दर्ज की कई टीमों ने अपने से बेहतर और मजबूत टीमों को धूल चटाई है। फीफा अंडर-17 विश्व कप में शुक्रवार को भारत पहली बार उतर रहा है और उसकी नजरों में इसी तरह का ख्वाब है।

अपने पहले फीफा विश्व कप में भारत का सामना मजबूत टीम अमेरिका से राष्ट्रीय राजधानी के जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम में होगा। 21 किशोरों की प्रतिभाशाली, लेकिन थोड़ी नर्वस भारतीय टीम मैदान में उतरते ही इतिहास के पन्नों में दर्ज हो जाएगी। वह पहली ऐसी भारतीय टीम बन जाएगी जिसने फीफा के किसी टूर्नामेंट में हिस्सेदारी की।

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भारत को ग्रुप-ए में रखा गया है जहां उसके साथ अमेरिका के अलावा कोलंबिया और घाना जैसी फुटबाल की दिग्गज टीमें हैं। भारतीय टीम का सामना छह अक्टूबर को अमेरिका, नौ अक्टूबर को कोलंबिया और 12 अक्टूबर को घाना से होगा।

फुटबाल में भारत की स्थिति और प्रदर्शन को देखते हुए उसके नॉकआउट दौर में जाने की संभावना न के बराबर है, लेकिन मेजबान अपने सभी प्रतिद्वंद्वियों को कड़ी चुनौती देने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

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भारतीय टीम के मुख्य कोच लुइस नोर्टन डे माटोस ने कहा है कि उनकी टीम बिना किसी डर के शेर की तरह मुकाबले के लिए तैयार है और ‘फुटबाल में हर मैच जीता जा सकता है।’

माटोस चाहते हैं कि उनकी टीम विश्व कप में हर मैच का आनंद ले।

भारत फुटबाल के लिए मशहूर नहीं है जबकि अमेरिका के पास बेहतरीन टीम है। उन्होंने फीफा अंडर-17 विश्व कप के 16 में से 17 संस्करणों में हिस्सा लिया है। सिर्फ 2013 में ही अमेरिकी टीम इस विश्व कप में नहीं खेली थी।

घाना की टीम यहां अपने 1991 और 1995 के इतिहास को दोहराने की कोशिश करेगी जहां उसने खिताब अपने नाम किया था और 90 के दशक में वह पांच में से चार बार फाइनल में जगह बना चुकी है। 10 साल बाद वह एक बार फिर अंडर-17 विश्व कप में लौटी है।

कोलंबिया की टीम छठी बार अंडर-17 विश्व कप खेलेगी। वह 2009 में नाइजीरिया में खेले गए विश्व कप के बाद इस बड़े टूर्नामेंट में जगह बना पाई है। 2003 और 2009 में वह तीसरे स्थान पर रही थी।

ग्रुप-बी में माली की टीम नॉकआउट दौर में जाने की प्रबल दावेदार है। उसके साथ इस ग्रुप में पराग्वे भी नॉक ऑउट में जा सकती है। 2015 में वह अंडर-17 विश्व कप के फाइनल में पहुंची थी, लेकिन नाइजीरिया से हार गई थी।

इन दोनों के अलावा इस ग्रुप में तुर्की और न्यूजीलैंड की टीमें हैं।

ग्रुप-सी में जर्मनी जैसी मजबूत टीम है जो इस खिताब की प्रबल दावेदार मानी जा रही है। साथ ही वह इस ग्रुप से अगले दौर में जाने की पसंदीदा टीम है। जर्मनी के अलावा इस ग्रुप में ईरान, गिनिया और कोस्टारिका की टीमें हैं।

जर्मनी के पास अच्छा आक्रामण है और वह यूरोपियन क्वालीफाइंग टूर्नामेंट में पांच मैचों में 17 गोल करते हुए भारत आई है। वह अंडर-17 यूरोपियन चैम्पियनशिप के सेमीफाइनल में पहुंची थी लेकिन स्पेन के हाथों उसे मात खानी पड़ी थी।

ग्रुप-डी में तीन बार की विजेता और खिताब की मजबूत दावेदार ब्राजील को स्पेन, नाइजर और उत्तरी कोरिया से कड़ी चुनौती मिलेगी।

ब्राजील की टीम अपने स्टार खिलाड़ी विनिसियस जूनियर के बिना इस टूर्नामेंट में उतर रही है। ब्राजीलियाई मीडिया की खबरों के मुताबिक, फुटबाल क्लब फ्लामेंगो के साथ एक करार के कारण वह ब्राजील टीम का हिस्सा नहीं बन सके हैं। क्लब की शर्त थी कि वह विनिसियस को तभी विश्व कप में खेलने देगा जब वह कोपा डे ब्रासील का खिताब जीत जाएगा, लेकिन ऐसा हुआ नहीं और फ्लामेंगो को क्रूजिएरो से हार मिली। लेकिन, विनिसियस के बिना भी ब्राजील बेहद मजबूत टीम है।

ग्रुप-ई में फ्रांस सबसे मजबूत टीम है जो अगले दौर में जा सकती है। इस ग्रुप में जापाना, होंडुरास, न्यू कैलेडोनिया, फ्रांस को चुनौती देंगे।

फ्रांस ने 2001 में खिताब अपने नाम किया था। वह सिर्फ पांच बार अंडर-17 विश्व कप में हिस्सा ले सकी है।

ग्रुप-एफ में एशियाई विजेता इराक, कॉनकाकेफ चैम्पियन और दो बार की अंडर-17 विजेता मैक्सिको के अलावा चिली और इंग्लैंड हैं।

इस ग्रुप से मैक्सिको और चिली अगले दौर में जाने के प्रबल दावेदार हैं।