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विस्थापित कश्मीरी पंडितों का दर्द समझें सरकारें और घाटी के आवाम : उपराष्ट्रपति

By बलराम सिंह 
Updated Date

Understand The Pain Of Displaced Kashmiri Pandits Governments And The People Of The Valley Vice President

नई दिल्ली। उपराष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू ने तीन दशकों से विस्थापित होकर उपेक्षा के शिकार हो रहे कश्मीरी पंडितों के दर्द को आवाज दी। उपराष्ट्रपति ने सोमवार को ट्वीट कर कहा कि कश्मीरी पंडितों को उनकी जन्मभूमि में वापस पुनर्वास करने की अपेक्षा को सरकारों को सहानुभूति पूर्वक समझना चाहिए। वेंकैया नायडू ने ट्वीट कर कहा कि मेरे विचार से कश्मीरी पंडितों की सरकार और समाज से ये अपेक्षा जायज है कि वे उनकी पीड़ा और वेदना को सहानुभुति पूर्वक समझें और उनके पुनर्वास के लिए यथासंभव प्रयास करें।

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कश्मीरी पंडितों के सुरक्षित पुनर्वास में कश्मीर की जनता से सकारात्मक पहल करने की अपील करते हुए नायडू ने कहा कि ये सम्पूर्ण देश और विशेषकर कश्मीरी जनता का नैतिक दायित्व है कि वे उस भूमि के सपूतों को उनके लौटने पर सुरक्षा प्रदान करें, जो भारत के पड़ोसी द्वारा प्रायोजित आतंकवाद और हिंसा के कारण अपने ही घरों से निर्वासित कर दिए गए। उपराष्ट्रपति ने कहा कि यह आज आवश्यक है कि कश्मीरी पंडितों तथा अन्य विस्थापित लोगों के पुनर्वास करने संबंधी न्यायोचित मांगों पर विचार किया जाए तथा उन्हें उनकी जन्मभूमि पर पुनर्स्थापित होने में सहायता की जाए।

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