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बेरोजगारी 27.1 फीसदी के उच्चस्तर पर पहुंची, हर चौथे में से एक की गई नौकरी

Unemployment Reached A High Of 27 1 Percent One In Every Four Jobs Done

By टीम पर्दाफाश 
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नई दिल्ली: वैश्विक महामारी की कोरोना की मार ने देश में आर्थिक हालात बिगाड़ दिए है। बेरोजगारी दर तीन मई को खत्म सप्ताह में 27.1 फीसदी के ऑल-टाइम हाई लेवल पर पहुंच गई। यानी हर 4 में से एक शख्स अब बेरोजगार हो गया है। सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकनॉमी (सीएमआईई) ने मंगलवार को कहा कि आने वाले हफ्तों में स्थिति और भी बदतर हो सकती है। 25 मार्च से शुरू 40 दिनों के देशव्यापी लॉकडाउन के दौरान वेतन पाने वाले हर पांच कर्मचारियों में से एक की नौकरी चली गई है।

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पिछले महीने बेरोजगारी दर 23.5 फीसदी थी लेकिन लॉकडाउन लगने के बाद लाखों श्रमिकों ने अपनी नौकरी गंवा दी। सीएमआईई ने कहा, ‘यह अब तक की सबसे अधिक बेरोजगारी दर है। ऐसा लगता है कि यह वृद्धि श्रम भागीदारी दर में इजाफे, जॉब मार्केट में काम की तलाश करने वालों की संख्या में बढ़ोतरी की वजह से हुई है जो 21 अप्रैल वाले हफ्ते में 35.4 फीसदी थी और 3 मई को खत्म सप्ताह में बढ़कर 36.2 फीसदी हो गई। यह बढ़ोतरी नौकरी चाहने वालों के लिए निराशाजनक थी क्योंकि उन्हें रोजगार नहीं मिला। उनके श्रम बल में वृद्धि से बेरोजगारी दर में इजाफा ही हुआ।’

सीएमआईई के मुताबिक, मई के पहले हफ्ते के डेटा से जाहिर होता है कि हालात और भी बदतर होने वाले हैं क्योंकि लॉकडाउन के जल्दी हटने के आसार नहीं दिख रहे हैं। सीएमआईई ने कहा, ‘लॉकडाउन ने शुरुआत में कमजोर वर्ग के श्रमिकों को नुकसान पहुंचाया जो असंगठित क्षेत्र में काम करते थे लेकिन इसने धीरे-धीरे सुरक्षित मानी जानी वाली नौकरियों को भी अपनी चपेट में लेना शुरू कर दिया है।’ कन्ज्यूमर पिरामिड्स हाउसहोल्ड सर्वे का जिक्र करते हुए सीएमआईई ने अनुमान लगाया कि अप्रैल 2020 में रोजगार में 11.4 करोड़ की भारी गिरावट आई है। मार्च 2020 में रोजगार पहले गिरकर 39.6 करोड़ पर आ गया था। इसका डेटा जुटाना चार साल पहले शुरू हुआ था और यह तबसे सबसे कम एंप्लॉयमेंट था। सीएमआईई ने कहा कि इस निचले स्तर पर अप्रैल में 29 फीसदी की नाटकीय गिरावट आई और यह 28.2 करोड़ पर आ गया।

सीएमआईई के अनुमान के मुताबिक, पिछले लगभग एक महीने में 9.1 करोड़ दैनिक वेतनभोगी और फेरीवालों ने अपनी कमाई का जरिया खो दिया। वहीं अचल संपत्ति वाले 23 फीसदी बड़े उद्यमियों ने एंप्लॉयमेंट लॉस की जानकारी दी है। इसने बताया कि 2019-20 में सैलरी पाने वाले कर्मचारियों की संख्या 8.6 करोड़ थी जो अप्रैल 2020 में 21 फीसदी घटकर 6.8 करोड़ पर आ गई। इस दौरान कृषि एकमात्र ऐसे सेक्टर के तौर पर उभरा है जिसमें किसानों की संख्या बढ़ी है। 2019-20 में किसानों की औसत गिनती में पांच प्रतिशत यानी 60 लाख की बढ़ोतरी दर्ज की गई। यह चीज हैरान करने वाली नहीं है क्योंकि अन्य क्षेत्रों में रोजगार गंवाने वाले लोग अपने खेतों की ओर वापस लौटेंगे जिसमें रोजगार देने की काफी अधिक क्षमता है।

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