UNESCO ने जनरल कॉन्फ्रेंस के 40वें सत्र में पाकिस्तान को लगाई फटकार, जानें क्यों

emran khan
UNESCO ने जनरल कॉन्फ्रेंस के 40वें सत्र में पाकिस्तान को लगाई फटकार, जानें क्यों

नई दिल्ली। पड़ोसी देश पाकिस्तान का हाल बेहाल है। कश्मीर और अयोध्या का निर्णय आने पर UNESCO में भारत ने पाकिस्तान को करारा जवाब दिया। भारत ने पड़ोसी मुल्क की आलोचना करते हुए कहा कि पाकिस्तान को हमारे अंदरूनी मामलों में टांग अड़ाने की मानसिक बीमारी है। आतंकवाद के मुद्दे पर भारत ने पाकिस्तान को घेरते हुए कहा कि पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद से दुनिया परेशान है।

Unesco Scolded Pakistan For 40th Session Of General Conference Know Why :

दरअसल, UNESCO मुख्यालय पेरिस में आयोजित यूनेस्को के जनरल कॉन्फ्रेंस के 40वें सत्र की सामान्य नीति बहस पर पाकिस्तान के शफाकत महमूद ने कश्मीर का मसला उठाया था। उसका जवाब देते हुए भारत ने कहा- “पाकिस्तान प्रोपैंगेडा रच रहा है और भारत के आंतरिक मामले में हस्तक्षेप कर रहा है। सुप्रीम कोर्ट ने कानून के आधार पर फैसला दिया है। पाकिस्तान हमारे आंतरिक मामले में दखल कर रहा है। वह जिस तरह की घृणास्पद बातें फैला रहा है वो निंदनीय है।”

वहीं, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख केंद्र शासित प्रदेशों के बारे में बोलते हुए भारत ने कहा कि ये दोनों भारत का अंदरुनी हिस्सा है और पाकिस्तान की ओर से कश्मीर में अवैध तरीके से घुसपैठ कराया जा रहा है। भारत ने आगे कहा कि पाकिस्तान लगातार भारत के अंदरुनी मामलों में हस्तक्षेप कर रहा है जो किसी तरह से स्वीकार्य नहीं है। सीमापार की ओर से आतंकवादी गतिविधियों को भी बढ़ावा दिया जा रहा है।

बता दें, इससे पहले पाकिस्तान के शिक्षा एवं व्यावसायिक प्रशिक्षण के संघीय मंत्री शफकत महमूद ने बुधवार को यूनेस्को में कश्मीर का मसला उठाया। संघीय शिक्षा और विशेष प्रशिक्षण मंत्री शफाकत महमूद ने यूनेस्को से जम्मू-कश्मीर और कश्मीर के लोगों के मौलिक अधिकारों को बहाल करने और प्रतिबंध हटाने को लेकर भारत सरकार को मनाने के लिए अपने नैतिक अधिकार का उपयोग करने का आह्वान किया था।

इतना ही नहीं फ्रांस में पाकिस्तान के राजदूत और यूनेस्को के लिए पाकिस्तान के स्थायी प्रतिनिधि मोइन उल हक ने भी सत्र में भाग लिया। पाक मंत्री ने कश्मीर के लोगों के मानवाधिकार से जुड़े मुद्दों को उठाया। उनका कहना था कि कश्मीर में पिछले 100 दिन से जारी कर्फ्यू के कारण 80 लाख से ज्यादा कश्मीरियों के मौलिक अधिकारों का हनन किया गया। भारत पहले भी कश्मीर मसले को भारत का अंदरूनी मामला कह चुका है और वैश्विक स्तर पर उसे दुनिया के कई देशों से समर्थन भी मिला है।

नई दिल्ली। पड़ोसी देश पाकिस्तान का हाल बेहाल है। कश्मीर और अयोध्या का निर्णय आने पर UNESCO में भारत ने पाकिस्तान को करारा जवाब दिया। भारत ने पड़ोसी मुल्क की आलोचना करते हुए कहा कि पाकिस्तान को हमारे अंदरूनी मामलों में टांग अड़ाने की मानसिक बीमारी है। आतंकवाद के मुद्दे पर भारत ने पाकिस्तान को घेरते हुए कहा कि पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद से दुनिया परेशान है। दरअसल, UNESCO मुख्यालय पेरिस में आयोजित यूनेस्को के जनरल कॉन्फ्रेंस के 40वें सत्र की सामान्य नीति बहस पर पाकिस्तान के शफाकत महमूद ने कश्मीर का मसला उठाया था। उसका जवाब देते हुए भारत ने कहा- "पाकिस्तान प्रोपैंगेडा रच रहा है और भारत के आंतरिक मामले में हस्तक्षेप कर रहा है। सुप्रीम कोर्ट ने कानून के आधार पर फैसला दिया है। पाकिस्तान हमारे आंतरिक मामले में दखल कर रहा है। वह जिस तरह की घृणास्पद बातें फैला रहा है वो निंदनीय है।" वहीं, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख केंद्र शासित प्रदेशों के बारे में बोलते हुए भारत ने कहा कि ये दोनों भारत का अंदरुनी हिस्सा है और पाकिस्तान की ओर से कश्मीर में अवैध तरीके से घुसपैठ कराया जा रहा है। भारत ने आगे कहा कि पाकिस्तान लगातार भारत के अंदरुनी मामलों में हस्तक्षेप कर रहा है जो किसी तरह से स्वीकार्य नहीं है। सीमापार की ओर से आतंकवादी गतिविधियों को भी बढ़ावा दिया जा रहा है। बता दें, इससे पहले पाकिस्तान के शिक्षा एवं व्यावसायिक प्रशिक्षण के संघीय मंत्री शफकत महमूद ने बुधवार को यूनेस्को में कश्मीर का मसला उठाया। संघीय शिक्षा और विशेष प्रशिक्षण मंत्री शफाकत महमूद ने यूनेस्को से जम्मू-कश्मीर और कश्मीर के लोगों के मौलिक अधिकारों को बहाल करने और प्रतिबंध हटाने को लेकर भारत सरकार को मनाने के लिए अपने नैतिक अधिकार का उपयोग करने का आह्वान किया था। इतना ही नहीं फ्रांस में पाकिस्तान के राजदूत और यूनेस्को के लिए पाकिस्तान के स्थायी प्रतिनिधि मोइन उल हक ने भी सत्र में भाग लिया। पाक मंत्री ने कश्मीर के लोगों के मानवाधिकार से जुड़े मुद्दों को उठाया। उनका कहना था कि कश्मीर में पिछले 100 दिन से जारी कर्फ्यू के कारण 80 लाख से ज्यादा कश्मीरियों के मौलिक अधिकारों का हनन किया गया। भारत पहले भी कश्मीर मसले को भारत का अंदरूनी मामला कह चुका है और वैश्विक स्तर पर उसे दुनिया के कई देशों से समर्थन भी मिला है।