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कोरोना काल में सरकार के तरफ से अधिवक्ताओं की अनदेखी दुर्भाग्यपूर्ण : मुलायम सिंह यादव

कोरोना का सर्वाधिक असर न्याय व्यवस्था पर दिखाई दे रहा है, जबकि आम और खास लोगों का आस्था का केंद्र न्यायालय होता है। जो करोना के भेंट चढ़ गया। न्याय मांगने वाले बिल बिला रहे हैं। उक्त विचार मुलायम सिंह यादव एडवोकेट पूर्व महामंत्री जिला बार एसोसिएशन कानपुर देहात ने जनपद न्यायालय परिसर झंडा पार्क में शुक्रवार को एक मीटिंग में कहीं ।

By संतोष सिंह 
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कानपुर देहात । कोरोना का सर्वाधिक असर न्याय व्यवस्था पर दिखाई दे रहा है, जबकि आम और खास लोगों का आस्था का केंद्र न्यायालय होता है। जो करोना के भेंट चढ़ गया। न्याय मांगने वाले बिल बिला रहे हैं। उक्त विचार मुलायम सिंह यादव एडवोकेट पूर्व महामंत्री जिला बार एसोसिएशन कानपुर देहात ने जनपद न्यायालय परिसर झंडा पार्क में शुक्रवार को एक मीटिंग में कहीं ।

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उन्होंने कहा कि महामारी के कारण मिलने वाला सस्ता व सुलभ न्याय पाने की अवधारणा पर ब्रेक लग रहा है ।लगभग 95 फीसदी अदालतो में काम बंद हैं, जिसके कारण न्याय प्रणाली कोरोना की भेंट चढ़ गई है। उन्होंने कहा कि न्यायालय बंद होने से अधिवक्ता बड़ी संख्या में वित्तीय संकट का सामना कर रहे हैं। कई वर्गों को शासन की ओर से विभिन्न योजनाओं के तहत आर्थिक मदद की गई। परंतु दुर्भाग्य है कि अधिवक्ताओं के लिए सरकारों द्वारा कुछ भी नहीं किया गया।

उत्तर प्रदेश में चार लाख से अधिक अधिवक्ता है। इसके अलावा नोटरी, दस्तावेज, लेखक ,टाइपिस्ट, क्लर्क व अन्य का काम बंद हो गया है। जिससे उनके आश्रित परिवार भी प्रभावित हुए हैं। उसका परिवार उन्हीं पर निर्भर है केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा इस वर्ग की और कोई ध्यान नहीं दिया गया। यहां तक कि आयुष्मान भारत योजना जिसके तहत 5 लाख तक मुफ्​त कैशलेस इलाज होता है। अधिवक्ताओं को शामिल नहीं किया गया। हाल ही में केंद्र सरकार द्वारा बजट में अधिवक्ताओं के लिए कुछ भी नहीं दिया गया। जो बहुत ही अफसोस एवं चिंताजनक है उन्होंने सर्वोच्च न्यायालय के प्रधान न्यायाधीश नूतल पति वेकट रमण को पत्र लिखकर शीघ्र ही न्यायालयों में संपूर्ण कार्य करने की मांग की है। जिससे न्याय व्यवस्था सुचारु रुप से चलें। आम और खास को न्याय मिल सकता है।

इस अवसर पर रवींद्र नाथ मिश्रा सुंदरलाल सचान,रमेश चंद्र सिंह गौर,सिद्धार्थ शंकर सिंह,अशोक कुमार श्रीवास्तव, सर्वेंद्र सिंह,शिवगिरजाशंकर, उमाशंकर कुशवाहा , अनुज सिंह भदौरिया ,कर्मवीर सिंह,विश्व्नाथ सिंह,सुभाष यादव, ,विशाल मिश्रा ,घनश्याम सिंह राठौर,धर्मेंद्र यादव,सुल्तान अली ,पंकज यादव, जितेंद्र बाबू,अनूप सिंह यादव आदि अधिवक्ता उपस्थित रहे।

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