सख्त कानून बनाने की तैयारी में मोदी सरकार, मोदी-माल्या जैसे भगोड़ों की संपत्ति होगी जब्त

नई दिल्ली। बैंकों से लोन लेकर विदेश भागने वाले नीरव मोदी व विजय माल्या जैसे मामलों में कर्ज की वसूली सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने ‘द फ्यूजीटिव इकनॉमिक ऑफेंडर आर्डीनेंस-2018’ को मंजूरी दी है। इसके बाद विजय माल्या, नीरव मोदी और मेहुल चौकसी जैसे आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की जा सकेगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने शनिवार को इसके मसौदे पर मुहर लगायी। राष्ट्रपति की मंजूरी मिलने और गजट में अधिसूचना जारी होने के बाद यह अध्यादेश लागू हो जाएगा। इसके तहत भगोड़े अपराधियों की देश-विदेश स्थित संपत्ति को जब्त करने का प्रावधान है।

Union Cabinet Approves Promulgation Of Fugitive Economic Offenders Ordinance :

क्या है यें  अध्यादेश

इस अध्यादेश के प्रावधान ऐसे आर्थिक अपराधियों पर लागू होंगे जो देश वापस आने से इनकार कर देते हैं, जिन लोगों के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी हो चुके हैं और जिन पर 100 करोड़ रुपये से अधिक का बकाया है और उन्हें जानबूझकर कर्ज न चुकाने वाला घोषित किया जा चुका है। इस तरह के आरोपियों के खिलाफ धन शोधन निरोधक कानून के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। इसके तहत अभियोजन से बचने के लिए विदेश भाग जाने वाले या मामले का सामना करने के लिए वापस लौटने से इनकार करने वाले को भगोड़ा अपराधी माना जाएगा।

पीएमएलए 2002 के तहत नियुक्त निदेशक या उपनिदेशक किसी व्यक्ति विशेष को भगोड़ा घोषित करने के लिए विशेष अदालत में आवेदन कर सकता है। उसे संबंधित व्यक्ति के ठिकाने, उसकी जब्त की जाने वाली संपत्तियों , जब्त की जाने वाली बेनामी और विदेशी संपत्तियों की सूची और ऐसे व्यक्तियों की सूची देनी होगी जिनका इन संपत्तियों से हित जुड़ा है। अदालत इस अर्जी के बाद भगोड़े व्यक्ति को हाजिर होने के लिए छह सप्ताह का समय देगा। यदि इस दौरान वह व्यक्ति हाजिर हो जाता है तो अदालत इस अध्यादेश के प्रावधानों के तहत शुरू की गयी कार्रवाई रोक देगा। विशेष अदालत के आदेश के खिलाफ अपील उच्च न्यायालय में दाखिल की जा सकती है।

नई दिल्ली। बैंकों से लोन लेकर विदेश भागने वाले नीरव मोदी व विजय माल्या जैसे मामलों में कर्ज की वसूली सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने 'द फ्यूजीटिव इकनॉमिक ऑफेंडर आर्डीनेंस-2018' को मंजूरी दी है। इसके बाद विजय माल्या, नीरव मोदी और मेहुल चौकसी जैसे आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की जा सकेगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने शनिवार को इसके मसौदे पर मुहर लगायी। राष्ट्रपति की मंजूरी मिलने और गजट में अधिसूचना जारी होने के बाद यह अध्यादेश लागू हो जाएगा। इसके तहत भगोड़े अपराधियों की देश-विदेश स्थित संपत्ति को जब्त करने का प्रावधान है।

क्या है यें  अध्यादेश

इस अध्यादेश के प्रावधान ऐसे आर्थिक अपराधियों पर लागू होंगे जो देश वापस आने से इनकार कर देते हैं, जिन लोगों के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी हो चुके हैं और जिन पर 100 करोड़ रुपये से अधिक का बकाया है और उन्हें जानबूझकर कर्ज न चुकाने वाला घोषित किया जा चुका है। इस तरह के आरोपियों के खिलाफ धन शोधन निरोधक कानून के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। इसके तहत अभियोजन से बचने के लिए विदेश भाग जाने वाले या मामले का सामना करने के लिए वापस लौटने से इनकार करने वाले को भगोड़ा अपराधी माना जाएगा। पीएमएलए 2002 के तहत नियुक्त निदेशक या उपनिदेशक किसी व्यक्ति विशेष को भगोड़ा घोषित करने के लिए विशेष अदालत में आवेदन कर सकता है। उसे संबंधित व्यक्ति के ठिकाने, उसकी जब्त की जाने वाली संपत्तियों , जब्त की जाने वाली बेनामी और विदेशी संपत्तियों की सूची और ऐसे व्यक्तियों की सूची देनी होगी जिनका इन संपत्तियों से हित जुड़ा है। अदालत इस अर्जी के बाद भगोड़े व्यक्ति को हाजिर होने के लिए छह सप्ताह का समय देगा। यदि इस दौरान वह व्यक्ति हाजिर हो जाता है तो अदालत इस अध्यादेश के प्रावधानों के तहत शुरू की गयी कार्रवाई रोक देगा। विशेष अदालत के आदेश के खिलाफ अपील उच्च न्यायालय में दाखिल की जा सकती है।