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यूपी विधानसभा के इतिहास में पहली बार अपनी ही सरकार के खिलाफ मोर्चा खोले सत्तापक्ष के विधायक

Up Assembly Bjp Mla And Mlc Sat In Protest Against Yogi Government And Speaker

By रवि तिवारी 
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लखनऊ। उत्तर प्रदेश के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ जब सत्ताधारी पार्टी के विधायक ही अपनी सरकार के खिलाफ लामबंद हो गए हो, ऐसा नजारा मंगलवार को यूपी विधानसभा सत्र के दौरान देखने को मिला। यूपी की सत्ताधारी पार्टी में विधायक नन्द किशोर गुर्जर सदन में अपनी बात रखने का प्रयास कर रहे थे इस दौरान विधायकों ने सदन में हंगामा शुरू कर दिया। विधानसभा स्पीकर ने सदन में बीजेपी के गाजियाबाद के लोनी से विधायक नन्द किशोर को उनकी बात रखने से मना कर दिया। नंद किशोर का आरोप है कि उन्हें गाजियाबाद पुलिस ने प्रताड़ित किया है। इसी बात को लेकर वह विधानसभा में अपनी बात रखना चाहते थे, लेकिन सदन के अंदर उन्हें बोलने नहीं दिया गया। विधायक नंद किशोर इस बात से नाराज होकर विधानसभा के अंदर धरने पर बैठ गए। इस दौरान उन्हें अन्य बीजेपी विधायकों का भी समर्थन मिल गया।

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दरअसल, लोनी के भाजपा विधायक नंद किशोर गुर्जर पुलिस उत्पीड़न के खिलाफ सदन में अपना पक्ष रखना चाह रहे थे, लेकिन उन्हें बोलने का मौका नहीं मिला। विधानसभा अध्यक्ष ने उनसे बैठ जाने को कहा लेकिन विधायक उनकी बात को अनसुना करते हुये अपनी खड़े रहे। इस दौरान सदन में वापस लौटे विपक्षी सदस्यों की नजर नंद किशोर गुर्जर पर पड़ी और वे उनके समर्थन में लामबंद हो गये।

इस बीच संसदीय कार्यमंत्री सुरेश खन्ना ने भी विधायक को इशारे से बैठ जाने को कहा लेकिन हाथ में एक पर्चा थामे विधायक बोलने की अनुमति मांगते रहे। इस दौरान समाजवादी पार्टी (सपा) के सदस्य वेल पर आकर विधायक के समर्थन में नारेबाजी करने लगे। उनका कहना था कि सदन में जब सत्ता पक्ष के सदस्य को ही कुछ कहने की अनुमति नही है तो विपक्ष की क्या सुनी जायेगी। विपक्षी ‘सदस्य को न्याय दो’ के नारे लगा रहे थे। गुर्जर के समर्थन में करीब 150 बीजेपी विधायक आ गए और विधानसभा में धरना देने लगे।

सत्ता पक्ष के अन्य सदस्यों की गुजारिश पर आखिरकार गुर्जर बैठ गये और विपक्षी अपनी सीट पर चले गये लेकिन कुछ देर बाद लोनी के विधायक संसदीय कार्यमंत्री के हाथों में एक पर्चा थमा कर सदन से बाहर चले गये। गौरतलब है कि खाद्य सुरक्षा अधिकारी से मारपीट के मामले में नामजद भाजपा विधायक नंद किशोर गुर्जर को पिछली एक दिसम्बर को पार्टी ने कारण बताओ नोटिस जारी किया था और सात दिन के भीतर जवाब मांगा था। गुर्जर का कहना था कि भाजपा में उनके खिलाफ साजिश हो रही हैं। एफआईआर दर्ज कराने में कई लोग शामिल हैं।

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