विस चुनाव: 15 दिसम्बर के बाद किसी भी समय हो सकती है चुनाव तिथियों की घोषणा

लखनऊ: उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनावों की घोषणा 15 दिसम्बर के बाद की जा सकती है। निर्वाचन आयोग विधानसभा चुनाव की तैयारियों को लेकर तेजी से जुटा हुआ है। इसके चलते आयोग मौजूदा समय में शत-प्रतिशत शुद्ध मतदाता सूची तैयार कराने व मतदान केन्द्रों पर सभी सुविधाएं उपलब्ध कराने के प्रयास में लगा हुआ है।निर्वाचन आयोग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि हमें 15 दिसम्बर के बाद किसी भी समय चुनाव तिथियों की घोषणा के लिए तैयार रहने को कहा गया है।




इसके मद्देनजर मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय को देश के सबसे बड़े राज्य में चुनाव की तैयारियों के लिए बहुत थोड़ा समय मिलेगा। फिलहाल हमारा सारा ध्यान निर्वाचन सूचियों के पुनरीक्षण कार्य पर है। उन्होंने कहा कि हम विधानसभा चुनाव के लिए मतदाता सूची को दो जनवरी को होने वाले प्रकाशन की तैयारी कर रहे हैं। इसी सूची के आधार पर ही राज्य के विधानसभा चुनाव कराये जाने हैं। चुनाव तिथियों की घोषणा के लिए आयोग को मतदाता सूची के प्रकाशन का इंतजार करने की कोई जरूरत नहीं है। हालांकि अभी यह तय नहीं हो पाया है कि प्रदेश के विधानसभा चुनाव कितने चरणों में कराये जाएंगे।उन्होंने कहा कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण का काम सुचारु रूप से चल रहा है और इस काम के लिए निर्वाचन आयोग की ओर से लक्ष्य को पूरा किया जाएगा।




आयोग ने इस बार मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर युवा और महिलाओं को जोड़ने का लक्ष्य निर्धारित किया है। उत्तर प्रदेश के साथ ही देश के पंजाब, गोवा, मणिपुर और उत्तराखंड राज्य में भी जनवरी के अंतिम सप्ताह से मार्च के पहले हफ्ते के बीच राज्य विधान सभा के चुनाव हो सकते हैं। आयोग को पहले चरण के चुनाव की तिथियों के एलान के 45 दिन में पहले चरण का मतदान कराना होता है। चुनाव की तिथि की घोषणा के साथ ही आदर्श आचार संहिता लागू हो जाती है और विकास के कायरे की गति थम जाती है। ज्ञात हो कि उत्तर प्रदेश में 2012 में हुए राज्य विधानसभा चुनाव की तिथियां 24 दिसम्बर 2011 को घोषित की गयीं थी। गत राज्य विधानसभा की 403 सीटों के लिए आठ फरवरी से तीन मार्च के बीच सात चरणों में मतदान हुआ था और मतों की गणना छह मार्च को गयी थी।

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