यूपी आवास विकास परिषद की अंधेरगर्दी: ओपी चेंस को 2016 में नीलामी में दी जमीन, 2017 में याद आया, नहीं किया था अधिग्रहण

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यूपी आवास विकास परिषद की अंधेरगर्दी: ओपी चेंस को 2016 में नीलामी में दी जमीन, 2017 में याद आया, नहीं किया था अधिग्रहण

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के आगरा शहर के जाने माने बिल्डर ओपी चेंस ग्रुप की दबंगई का सबसे बड़ा प्रमाण तब देखने को मिला, जब सरकारी संस्था आवास विकास परिषद ने सारे नियम कायदों को ताक पर रख एक बिल्डर को प्रत्यक्ष रूप से लाभ पहुंचाना शुरू कर दिया। पर्दाफाश इससे पहले भी आपको बता चुका है कि ओपी चेंस ग्रुप ने आवास विकास के उच्च अधिकारियों की मदद से करोड़ों रुपये की विवादित जमीन को कौड़ियों के भाव हथिया लिया।

Up Avas Vikas Parishad Op Chains Ka Pardaphash :

दरअसल, साल 2016 में विभाग ने जो जमीन नीलाम की थी, उसे आवास विकास ने कभी अधिग्रहित ही नहीं किया। बिना अधिग्रहण के जमीन की नीलामी की बात जब किसानों के सामने आई तो किसानो ने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया, तब कोर्ट ने इस जमीन पर यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया। जिसके बाद आवास विकास को अपनी गलती का एहसास हुआ। जिसके बाद विभाग ने उक्त जमीन का जिलाधिकारी आगरा व आवास विकास के उच्च अधिकारियों से जमीन का मूल्यनिर्धारण कर किसानों को भुगतान करने का आदेश दिया। अब सवाल इस बात का उठता है कि जिस जमीन को आवास विकास ने साल 2016 में नीलाम कर दिया, उस जमीन का एक वर्ष बाद किस आधार पर मुआवजा दिया गया। इस बाबत एक पत्र सामने आया जिसमें आरोपों की पुष्टि स्पष्ट तौर पर हो रही ।

पर्दाफाश इससे पहले ओपी चेंस ग्रुप की धांधली और मनमानी को लेकर कई खबरें आपके समक्ष ला चुका है। सारे नियम और कायदों को ताक पर रख ओपी चेंस ने अपने विवादित प्रोजेक्ट ऐंथम पर कोर्ट के स्टे के बावजूद काम जारी रखा और अखबारों में विज्ञापन के माध्यम से इस प्रोजेक्ट का शुभारंभ भी कर दिया। इन बातों से साफ अंदाजा लगाया जा सकता है कि ओपी चेंस ने यूपी सरकार की एक ब दी संस्था को पैसों के आगे नतमस्तक कर रखा था।

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के आगरा शहर के जाने माने बिल्डर ओपी चेंस ग्रुप की दबंगई का सबसे बड़ा प्रमाण तब देखने को मिला, जब सरकारी संस्था आवास विकास परिषद ने सारे नियम कायदों को ताक पर रख एक बिल्डर को प्रत्यक्ष रूप से लाभ पहुंचाना शुरू कर दिया। पर्दाफाश इससे पहले भी आपको बता चुका है कि ओपी चेंस ग्रुप ने आवास विकास के उच्च अधिकारियों की मदद से करोड़ों रुपये की विवादित जमीन को कौड़ियों के भाव हथिया लिया।

दरअसल, साल 2016 में विभाग ने जो जमीन नीलाम की थी, उसे आवास विकास ने कभी अधिग्रहित ही नहीं किया। बिना अधिग्रहण के जमीन की नीलामी की बात जब किसानों के सामने आई तो किसानो ने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया, तब कोर्ट ने इस जमीन पर यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया। जिसके बाद आवास विकास को अपनी गलती का एहसास हुआ। जिसके बाद विभाग ने उक्त जमीन का जिलाधिकारी आगरा व आवास विकास के उच्च अधिकारियों से जमीन का मूल्यनिर्धारण कर किसानों को भुगतान करने का आदेश दिया। अब सवाल इस बात का उठता है कि जिस जमीन को आवास विकास ने साल 2016 में नीलाम कर दिया, उस जमीन का एक वर्ष बाद किस आधार पर मुआवजा दिया गया। इस बाबत एक पत्र सामने आया जिसमें आरोपों की पुष्टि स्पष्ट तौर पर हो रही ।

पर्दाफाश इससे पहले ओपी चेंस ग्रुप की धांधली और मनमानी को लेकर कई खबरें आपके समक्ष ला चुका है। सारे नियम और कायदों को ताक पर रख ओपी चेंस ने अपने विवादित प्रोजेक्ट ऐंथम पर कोर्ट के स्टे के बावजूद काम जारी रखा और अखबारों में विज्ञापन के माध्यम से इस प्रोजेक्ट का शुभारंभ भी कर दिया। इन बातों से साफ अंदाजा लगाया जा सकता है कि ओपी चेंस ने यूपी सरकार की एक ब दी संस्था को पैसों के आगे नतमस्तक कर रखा था।