यूपी: बेसिक शिक्षा विभाग में जूते मोजे के टेंडर में 200 करोड़ का खेल !

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यूपी: बेसिक शिक्षा विभाग में जूते मोजे के टेंडर में 200 करोड़ का खेल!

लखनऊ। बेसिक शिक्षा विभाग के करीब 200 करोड़ के जूते मोजे के टेंडर में बड़ा खेल सामने आया है। विभाग ने जिस फर्म को सबसे ज्यादा सप्लाई का टेंडर दिया उसने सैंपल में तो अच्छी क्वालिटी के जूते—मोजे दिखाए, जबकि स्कूलों में हल्की क्वालिटी के जूते सप्लाई कर दिए। मैनपुरी से मामला खुलने के बाद अब विभाग ने संबंधित फर्म पर कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।

Up Basic Education 200 Carore Scam :

बता दें कि बेसिक शिक्षा विभाग ने इस सत्र में कक्षा 1 से 8 तक के छात्र छात्राओं को जूते मोजे बांटने के लिए 200 करोड़ का टेंडर किया था। जब फर्म ने जूते—मोजे सप्लाई करने शुरु किए तो पता चला कि जो सैंपल दिखाया गया था उसमे और सप्लाई की क्वालिटी में काफी अंतर है। मामले ने तूल पकड़ा तो जिलाधिकारी ने शासन को लिखित शिकायत करते हुए कार्रवाई की संस्तुति कर दी।

अब जिलाधिकारी की संस्तुति के बाद अपर मुख्य सचिव बेसिक शिक्षा रेणुका कुमार ने निर्देश दिए हैं कि जरुरत लगे तो गड़बड़ी करने वाली फर्म पर FIR कराने के साथ ही उसे ब्लैक लिस्ट किया जाये। वहीं जब मैनपुरी में मामला खुला तो अन्य जिलों में जांच शुरु हुई तब इसी फर्म के एटा और कासगंज में सप्लाई किये गए जूते में भी खेल करने का मामला सामने आ रहा है। इसकी वजह से अब तक वहां बहुत से छात्र छात्राओं को जूते बंट ही नहीं पाये।

गौरतलब हो कि जूते मोजे के 200 करोड़ के टेंडर में करीब 148 करोड़ का टेंडर जूते का है और करीब 52 करोड़ का मोजे का। इस टेंडर हरियाणा की फर्म मंजीत प्लास्टिक ने सबसे कम रेट दिए थे। जिसके बाद इस फर्म को 25 प्रतिशत सप्लाई का टेंडर मिला। उसे उत्तर प्रदेश के 26 जिलों में सप्लाई का काम दिया गया है जिसकी कीमत करीब 37 करोड़ है। अब सवाल ये उठ रहा है कि जब इस फर्म ने तीन जिलों में गड़बड़ी की है तो अन्य जिलों में भी ऐसा ही किया होगा।

फिलहाल इस मामले में बेसिक शिक्षा राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. सतीश द्विवेदी ने कहा कि मैनपुरी की शिकायत पर कार्रवाई की गई है। जहां से भी शिकायत आएगी कार्रवाई की जायेगी। जरूरत पड़ी तो जिस फर्म की सप्लाई में गड़बड़ी मिली उसकी अन्य जिलों में सप्लाई की भी जांच होगी।

लखनऊ। बेसिक शिक्षा विभाग के करीब 200 करोड़ के जूते मोजे के टेंडर में बड़ा खेल सामने आया है। विभाग ने जिस फर्म को सबसे ज्यादा सप्लाई का टेंडर दिया उसने सैंपल में तो अच्छी क्वालिटी के जूते—मोजे दिखाए, जबकि स्कूलों में हल्की क्वालिटी के जूते सप्लाई कर दिए। मैनपुरी से मामला खुलने के बाद अब विभाग ने संबंधित फर्म पर कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। बता दें कि बेसिक शिक्षा विभाग ने इस सत्र में कक्षा 1 से 8 तक के छात्र छात्राओं को जूते मोजे बांटने के लिए 200 करोड़ का टेंडर किया था। जब फर्म ने जूते—मोजे सप्लाई करने शुरु किए तो पता चला कि जो सैंपल दिखाया गया था उसमे और सप्लाई की क्वालिटी में काफी अंतर है। मामले ने तूल पकड़ा तो जिलाधिकारी ने शासन को लिखित शिकायत करते हुए कार्रवाई की संस्तुति कर दी। अब जिलाधिकारी की संस्तुति के बाद अपर मुख्य सचिव बेसिक शिक्षा रेणुका कुमार ने निर्देश दिए हैं कि जरुरत लगे तो गड़बड़ी करने वाली फर्म पर FIR कराने के साथ ही उसे ब्लैक लिस्ट किया जाये। वहीं जब मैनपुरी में मामला खुला तो अन्य जिलों में जांच शुरु हुई तब इसी फर्म के एटा और कासगंज में सप्लाई किये गए जूते में भी खेल करने का मामला सामने आ रहा है। इसकी वजह से अब तक वहां बहुत से छात्र छात्राओं को जूते बंट ही नहीं पाये। गौरतलब हो कि जूते मोजे के 200 करोड़ के टेंडर में करीब 148 करोड़ का टेंडर जूते का है और करीब 52 करोड़ का मोजे का। इस टेंडर हरियाणा की फर्म मंजीत प्लास्टिक ने सबसे कम रेट दिए थे। जिसके बाद इस फर्म को 25 प्रतिशत सप्लाई का टेंडर मिला। उसे उत्तर प्रदेश के 26 जिलों में सप्लाई का काम दिया गया है जिसकी कीमत करीब 37 करोड़ है। अब सवाल ये उठ रहा है कि जब इस फर्म ने तीन जिलों में गड़बड़ी की है तो अन्य जिलों में भी ऐसा ही किया होगा। फिलहाल इस मामले में बेसिक शिक्षा राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. सतीश द्विवेदी ने कहा कि मैनपुरी की शिकायत पर कार्रवाई की गई है। जहां से भी शिकायत आएगी कार्रवाई की जायेगी। जरूरत पड़ी तो जिस फर्म की सप्लाई में गड़बड़ी मिली उसकी अन्य जिलों में सप्लाई की भी जांच होगी।