गोरखपुर और फूलपुर उपचुनाव में भाजपा की हार के पांच मुख्य कारण

गोरखपुर और फूलपुर उपचुनाव में भाजपा की हार , पांच मुख्य कारण
गोरखपुर और फूलपुर उपचुनाव में भाजपा की हार के पांच मुख्य कारण

Up Bypoll Election Results Why Yogi Adityanath Lose Seat 5 Reasons

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्या के इस्तीफे के बाद रिक्त हुई गोरखपुर और फूलपुर संसदीय सीट पर हुए उपचुनावों के परिणाम भाजपा के पक्ष में नहीं रहे। मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री के इस्तीफे से रिक्त हुई दोनों सीटों भाजपा के साथ—साथ इन दोनों नेताओं के लिए प्रतिष्ठा का कारण बनी थीं। सामने आए नतीजों में भाजपा को गोरखपुर में करीब 21,000 और फूलपुर में 59,613 मतों से हार का सामना किया है। भाजपा अब इन दोनों ही सीटों पर मिली हार की समीक्षा करने की बात कह रही है, लेकिन हम आपको वे पांच कारण बताने जा रहे हैं, जिनकी वजह से भाजपा को हार का सामना करना पड़ा।

1— कार्यकर्ताओं का साथ न मिलना— भाजपा जिस तरह से देशभर में जीत के झंडे गाढ़ रही है उसके पीछे सबसे बड़ी ताकत पार्टी के कार्यकर्ताओं की है। अगर उत्तर प्रदेश की बात करें तो यहां 2014 में केन्द्र की सत्ता भाजपा को मिलने के बाद से कार्यकर्ता सूबे में सरकार बनाने के लिए जी जान से जुटा था। ​जिसका नतीजा 2017 के विधानसभा चुनावों के परिणाम के रूप में सामने आया। कार्यकर्ताओं की मेहनत और लगन के ​ही बल पर भाजपा 327 सीटों को जीतने में कामयाब रही। अब उत्तर प्रदेश में भाजपा की सरकार बने एक साल पूरा हो रहा है। इस एक साल में पार्टी के उन कार्यकर्ताओं की हालत में कोई बदलाव नहीं आया है।

पार्टी के कार्यकर्ताओं की मांग को लगातार नजरंदाज किया जा रहा है। कार्यकर्ताओं की सुनवाई न तो सरकार में है और न ही अधिकारी उनकी बात सुन रहे हैं। कार्यकर्ताओं के नेताओं के चक्कर काटने पड़ रहे हैं। कार्यकर्ता सरकार और उसके नेतृत्व की अनदेखी के कारण नाखुश है। जिसने अपनी ताकत का अहसास गोरखपुर और फूलपुर उपचुनाव में करवा दिया है।

2— उम्मीदवारों के चुनाव में गलती— फूलपुर उप चुनाव में भाजपा ने कौशलेन्द्र पटेल को उम्मीदवार बनाया था। कौशलेन्द्र पटेल मूलरूप से मिर्जापुर जिले के रहने वाले हैं। स्थानीय कार्यकर्ताओं को यह बात नागवार गुजरी।

3— सपा के मिले बसपा के समर्थन को नजरंदाज करना— राजनीति में कहावत है कि हमेशा 1 और 1 ग्यारह नहीं होता। शायद भाजपा इस कहावत को इतनी गंभीरता से ले गई कि उसे राज्यसभा चुनाव को लेकर अखिलेश यादव और मायावती के बीच पकी खिचड़ी का पता ही नहीं चला। पार्टी नेतृत्व जिसे सांप और छछूंदर की दोस्ती समझता रहा, उस दोस्ती का रंग ऐसा चढ़ा कि भाजपा को गोरखपुर जैसी मजबूत सीट तक से बेदखल होना पड़ा।

4— नौकरशाही पर ज्यादा भरोसा करना— उत्तर प्रदेश की योगी सरकार अपनी नौकरशाही पर आंख मूंदकर भरोसा कर रही है। ज्यादातर अधिकारी वही हैं जिन्होंने पूर्व में अखिलेश यादव और मायावती के साथ भी काम किया है। इन अधिकारियों पर भरोसे का ​परिणाम ही है कि जनता और सरकार के बीच माध्यम बनने वाले कार्यकर्ताओं की भूमिका खत्म हो गई है। न तो अधिकारी कार्यकर्ताओं की बात सुन रहे हैं और न ही उनकी आवाज सरकार तक पहुंच पा रही है।

5— आधे अधूरे कामों के लिए मीडिया प्रबंधन के जरिए खुद की पीठ थपथपाना— यह एक कटु सत्य है कि कोई पार्टी चुनाव में जितने वादे करती है, उन्हें शत प्रतिशत पूरा नहीं कर पाती। नजीर के तौर पर योगी सरकार के उस वादे को ले सकते हैं जिसमें उसने उत्तर प्रदेश की सड़कों को 45 दिनों में गढ्ढ़ा मुक्त बनाने की बात कही थी। ये वादा भले ही किसी छोटी सोच के साथ किया गया हो, लेकिन सरकार अपने पहले प्रयास में अपने टारगेट को पूरा करने में नाकाम रही और उसने नए लक्ष्य के साथ गढ्ढ़ा मुक्ति का मिशन चलाया। आज एक साल बीत गया है, और उत्तर प्रदेश का हर निवासी जानता है कि उसे रोज सैकड़ों गढ्ढ़ों का सामना करना पड़ता है।वहीं सरकार अपने मंहगे टीवी विज्ञापनों में इस बात के लिए अपनी पीठ थपथपाती नजर आती है।

कुछ ऐसा ही हाल किसानों की कर्जामुक्ति का है, जहां किसानों के 10 पैसे से लेकर 100 रुपए तक के कर्ज माफ करने का कारनामा योगी सरकार ने अंजाम दिया और अपनी पीठ खुद ही थपथपा ली। किसानों की कर्जमुक्ति का प्रचार जोर शोर से किया गया। स्पष्ट है कि 10 पैसे का कर्ज माफ करयोगी सरकार किसी किसान को अपनी योजना का लाभार्थी तो बना सकती है, लेकिन उसे अपना समर्थक तो नहीं बना पाएगी।

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्या के इस्तीफे के बाद रिक्त हुई गोरखपुर और फूलपुर संसदीय सीट पर हुए उपचुनावों के परिणाम भाजपा के पक्ष में नहीं रहे। मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री के इस्तीफे से रिक्त हुई दोनों सीटों भाजपा के साथ—साथ इन दोनों नेताओं के लिए प्रतिष्ठा का कारण बनी थीं। सामने आए नतीजों में भाजपा को गोरखपुर में करीब 21,000 और फूलपुर में 59,613 मतों से हार का सामना किया है। भाजपा अब…