आज हाईकोर्ट में पेश होंगे जल निगम के अध्यक्ष आजम खान, कोर्ट में देंगे जवाब

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के नगर विकास मंत्री और जल निगम के अध्यक्ष मोहम्मद आजम खान की एक बार फिर से मुश्किलें बढ़ सकती हैं। आज आजम खान हाइकोर्ट में पेश होंगे। आरोप है कि कोर्ट में जल निगम ने गलत हलफनामा दायर किया था। इस पर हाईकोर्ट ने जवाब मांगा है।

Up Cabinet Minister Azam Khan Will Appear In Highcourt For Water Corporation Dispute :

आजम खान को यूपी जल निगम अध्यक्ष पद से हटाने के लिए याचिका

इससे पहले मंत्री आजम खान को सुप्रीम कोर्ट से राहत मिली थी। सुप्रीम कोर्ट ने यूपी जल निगम के प्रमुख से हटाने की याचिका पर सुनवाई से इंकार कर दिया था। सुप्रीम कोर्ट का कहना था कि आजम खान को निगम के प्रमुख के पद पर बने रहने दिया जाए। इसके बाद याचिकाकर्ता ने याचिका वापस ले ली थी।




बता दें कि रामसेवक शुक्ल ने सर्वोच्च न्यायालय में दाखिल याचिका में आजम खान को उत्तर प्रदेश के जल निगम के प्रमुख से हटाने की मांग की थी। याचिकाकर्ता के वकील विष्णु जैन का कहना था कि आजम खान की नियुक्ति उत्तर प्रदेश के जल निगम के प्रमुख के तौर पर केवल तीन साल के लिए हुई थी… जो अवधि 29 मार्च 2015 को ख़त्म हो चुकी है। उसके बावजूद आज़म खान नियमों को ताक पर रखते हुए उत्तर प्रदेश के जल निगम के प्रमुख के तौर पर बने हुए हैं। ऐसे में याचिकाकर्ता ने मांग की मांग थी कि आजम खान को तुरंत जल निगम के प्रमुख पद से हटाया जाए।




याचिका में कानून का प्रश्न उठाते हुए कहा गया है कि क्या किसी नियम कानून की अनुपस्थित में भी कोई राज्य के किसी पदेन पद को धारण कर सकता है। क्या प्रदेश में शहरी विकास मंत्री होने के कारण आजम खान निगम के पदेन अध्यक्ष हो सकते हैं। लेकिन अगर कोई पदेन होता है तो उसकी नियुक्ति के आदेश में स्पष्ट तौर पर इसका जिक्र होना चाहिये।

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के नगर विकास मंत्री और जल निगम के अध्यक्ष मोहम्मद आजम खान की एक बार फिर से मुश्किलें बढ़ सकती हैं। आज आजम खान हाइकोर्ट में पेश होंगे। आरोप है कि कोर्ट में जल निगम ने गलत हलफनामा दायर किया था। इस पर हाईकोर्ट ने जवाब मांगा है।

आजम खान को यूपी जल निगम अध्यक्ष पद से हटाने के लिए याचिका

इससे पहले मंत्री आजम खान को सुप्रीम कोर्ट से राहत मिली थी। सुप्रीम कोर्ट ने यूपी जल निगम के प्रमुख से हटाने की याचिका पर सुनवाई से इंकार कर दिया था। सुप्रीम कोर्ट का कहना था कि आजम खान को निगम के प्रमुख के पद पर बने रहने दिया जाए। इसके बाद याचिकाकर्ता ने याचिका वापस ले ली थी। बता दें कि रामसेवक शुक्ल ने सर्वोच्च न्यायालय में दाखिल याचिका में आजम खान को उत्तर प्रदेश के जल निगम के प्रमुख से हटाने की मांग की थी। याचिकाकर्ता के वकील विष्णु जैन का कहना था कि आजम खान की नियुक्ति उत्तर प्रदेश के जल निगम के प्रमुख के तौर पर केवल तीन साल के लिए हुई थी... जो अवधि 29 मार्च 2015 को ख़त्म हो चुकी है। उसके बावजूद आज़म खान नियमों को ताक पर रखते हुए उत्तर प्रदेश के जल निगम के प्रमुख के तौर पर बने हुए हैं। ऐसे में याचिकाकर्ता ने मांग की मांग थी कि आजम खान को तुरंत जल निगम के प्रमुख पद से हटाया जाए। याचिका में कानून का प्रश्न उठाते हुए कहा गया है कि क्या किसी नियम कानून की अनुपस्थित में भी कोई राज्य के किसी पदेन पद को धारण कर सकता है। क्या प्रदेश में शहरी विकास मंत्री होने के कारण आजम खान निगम के पदेन अध्यक्ष हो सकते हैं। लेकिन अगर कोई पदेन होता है तो उसकी नियुक्ति के आदेश में स्पष्ट तौर पर इसका जिक्र होना चाहिये।