मेहनत तो पूरी हुई, फिर चूक कहां हुई

सुलतानपुर : गत 27 फरवरी को जिले में पड़े मतदान में यहां के वोटर खुद अपना ही पूर्व रिकार्ड नहीं तोड़ पाये जिसको लेकर सवाल उठना लाजमी हो गया। पहली बार निर्वाचन आयोग की ओर से जिले में वोटरों को जगाने आयी ब्रान्ड अम्बेस्डर पर्वतारोही पद्मश्री अरूणिमा सिन्हा का भी कोई खास असर देखने को नहीं मिला करोड़ों रूपये पानी की तरह बहे लेकिन बदइन्तजामी और खराब रणनीत के चलते यहां का मतदान ‘‘फर्स्ट डिविजन‘‘ नहीं आ सका। 60 : मतदान होने से रह गया।

लोकतंत्र के उत्सव में लोक सक्रिय हो उनकी भागीदारी बढ़े इसके लिये अभियान दर अभियान चलाया तो गया मेहनत भी पूरी हुई फिर चूक कहां हुई खूबसारे प्रयासो के बाद भी कारगर नतीजा नही निकला निर्वाचन आयोग द्वारा विभिन्न तरीके से खूब प्रचार प्रसार किया गया शासन प्रशासन के साथ ही समाजिक संगठनो सरकारी अर्धसरकारी संस्थानो ने भी इस अभियान में हिस्सा लिया बड़े-बड़े दावे किये गये लेकिन परिणाम सार्थक नही निकला सरकारी मशीनरी का यहां प्रयास औपचारिकता की रस्म अदायगी भर रहा।




सुलतानपुर जनपद में महिला पुरुष मिलाकर लगभग 17लाख से अधिक मतदाता है। प्रशासन का दावा है कि इन 17लाख मतदाताओं को शतप्रतिशत मतदान के लिए प्रेरित करने के लिये लगभग 243 महकमे के सहयोग से 107 स्थानो पर विभिन्न तरीके से मतदाता जागरुकता कार्यक्रमो का आयोजन किया गया जिसमे ढाई लाख से अधिक लोगो ने हिस्सा लिया और स्वयं मतदान में बढचढ कर भागीदारी के साथ ही जिले के 17लाख मतदाताओं को भी मतदान के लिये प्रेरित करने का संकल्प लिया था।




लेकिन चुनाव बाद मतदान प्रतिशत का परिणाम उजागर हुआ तो सब के दावे की पोल खुल गयी गतवर्ष 2012 के विधानसभा चुनाव में यहां मतदान प्रतिशत 58.60 रिकार्ड हुआ था वहीं 2017 के इस चुनाव में 57.49 मतदान प्रतिशत रिकार्ड किया गया यानि पिछला रिकार्ड भी बरकरार न रहा जबकि जिला प्रशासन का दावा यह भी था कि जिले में मतदान प्रतिशत कम होने वाले चिन्हित साढे छा सौ बूथो पर मतदान प्रतिशत बढ़ाने के लिये चौपाल भी लगाई गयी यही नही जिले की पांचो विधानसभा चुनाव में तीन सौ के करीब माडल बूथ भी बनाये गये थे जहां टेन्ट लगे कुर्सिया धरी गयी बूथो को खूब सजाया गया था।

मतदान बाद जलपान की व्यस्था भी थी लेकिन इसके बावजूद भी दुलहन की तरह सजे ये बूथ मतदाता को अकर्षित न कर सके। अब आप प्रशासन के दावो से इतर सच्चाई भी जानिये मेहनत तो पूरी हुई लेकिन चूक कहां हुई चुनाव आयोग द्वारा चलाये गये मतदाता जागरुकता वाले इस कार्यक्रम में आम जनता की भागीदारी कहां कब कितनी रही..? और मतदान के प्रति किसे जागरुक किया गया सवाल यह भी है मतदाता में जगरुकता पैदा करने के लिये मानव मानचित्र, कैण्डिल मार्च पतंग उत्सव स्कूलो में मतदाता मेलां सहित विभिन्न आयोजन जहां हुए वहीं मतदाता एक्सप्रेस बस भी यहां आयी लेकिन इनसब कार्यक्रमो में एक ही चेहरे हर जगह शामिल रहे।




जागंरुकता पढ़े-लिखो के बीच ही पैदा की गयी शहरो तक ही सीमित रही आयोजन बंद हालो में हुए मतदान की महत्ता उन्हे ही को बतायी गयी जो पहले से ही वाकिफ रहे। अब जनता ही सवाल उठा रही है काश जगरुकता से जुड़े ये सारे कार्यक्रम ग्रामीण अंचलो में हुए होते तो आज मतदान प्रतिशत की तस्वीर दूसरी होती बाक्स मतदाताओं को जागरुक करने मुंबई से हास्य कलाकार एहशान कुरैशी सुलतानपुर आये उनका कार्यक्रम सुलतानपुर में पंडित राम नरेश त्रिपाठी सभागार में हुआ जहां आमंत्रित प्रबुद्ध वर्ग का जमावड़ा रहा कुरैशी ने इन सबको मतदान की महत्ता बताई वोट देने के फायदे गिनाये फिर सब ने सेल्फी ली फोटो खिचावाई दूसरे दिन ग्रामीणो को अखबारे से पता चला कि एहशान कुरैशी आये थें ।

सप्ताह भर बाद चुनाव आयोग की ब्राण्ड अम्बेस्डर पर्वतारोही पद्मश्री अरुणिमा सिन्हा जिले में आयी रविवार का दिन था उनका कार्यक्रम केएनआई व गनपत सहाय महाविद्यालय में कराया गया। रविवार का दिन होने के कारण पूरे कालेज परिसर में छुट्टी रही जिससे अधिकांश छात्र व स्टाफ नदारत रहे कुछ चयनित लोगो के बीच कार्यक्रम का औपचारिक समापन हुआ।

सुलतानपुर से बृजेश श्रीवास्तव की रिपोर्ट