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UP Election 2022: जौनपुर की मल्हनी विधानसभा सीट का जानिए गणित, जहां से धनंजय सिंह हैं चुनावी मैदान में?

धनंजय सिंह और लकी यादव के आमने-सामने होने के बाद यहां का चुनाव में कांटे की टक्कर देखने को मिल रही है। हालांकि, नतीजे 10 मार्च को ही आएंगे। अगर हम बात करें धनंजय सिंह की तो लखनऊ विश्वविद्यालय से उन्होंने राजनीति की शुरूआत की थी।

By शिव मौर्या 
Updated Date

UP Election 2022: कुछ दिनों पहले पुलिस रिकॉर्ड में लापता चल रहे थे। तभी सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक वीडियो ने प्रदेश की राजनीति में नया भूचाल खड़ा कर दिया। ​विपक्षी नेता भाजपा सरकार पर ताबड़तोड़ हमले शुरू कर दिए। विपक्षी नेताओं का आरोप था कि योगी सरकार बाहुबली और माफियाओं को संरक्षण दे रही है। दरअसल, हम बात कर रहे हैं कुछ दिनों पहले पुलिस रिकॉर्ड में लापता चल रहे धनंजय सिंह (Dhananjay Singh) की, जो इस बार जदयू के टिकट पर मल्हनी विधानसभा से चुनावी मैदान में हैं। उनके सामने सपा ने पारसनाथ यादव के बेटे लकी यादव (Lucky Yadav) को उतारा है।

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2017 के चुनाव में यहां से पारसनाथ यादव ने जीत हासिल की थी। 2019 में उनेक निधन के बाद उनके बेटे लकी यादव (Lucky Yadav) ने उपचुनाव में धनंजय सिंह को हराकर चुनाव जीत लिया था। सपा ने एक बार फिर से लकी यादव को अपना प्रत्याशी बनाया है। धनंजय सिंह और लकी यादव के आमने-सामने होने के बाद यहां का चुनाव में कांटे की टक्कर देखने को मिल रही है। हालांकि, नतीजे 10 मार्च को ही आएंगे। अगर हम बात करें धनंजय सिंह की तो लखनऊ विश्वविद्यालय से उन्होंने राजनीति की शुरूआत की थी।

विश्वविद्यालय में वो छात्र नेताओं को चुनाव लड़वाते थे। वहां पर धनंजय, अभय सिंह और दयाशंकर सिंह की तिकडी चलती थी। हालांकि, समय के बाद सभी एक दूसरे से अलग हो गए। आपको बता दें कि, धनंजय सिंह पहली बार 2002 में निर्दलीय विधायक बने। इसके बाद 2007 में विधायक चुने गए। वहीं, 2008 में वो बसपा में चले गए। मायावती ने भरोसा जताया और 2009 में जौनपुर से लोकसभा प्रत्याशी बना दिया। यहां भी वह जीत गए। यही जीत अब तक की आखिरी जीत साबित हुई। 2011 में मायावती ने पार्टी के खिलाफ गतिविधियों में शामिल होने के कारण बर्खास्त कर दिया।

2009 के बाद से धनंजय सिंह अभी तक कोई चुनाव नहीं जीत पाए हैं। आपको बता दें कि, हाल में लखनऊ में हुए अजीत सिंह हत्याकांड में धनंजय सिंह सुर्खियों में आए थे। धनंजय सिंह पर गंभीर आरोप लगे थे। इसके बाद उनके खिलाफ पुलिस ने इनाम भी घोषित किया था। हालांकि, एसटीएफ ने जांच में धनंजय सिंह को बड़ी राहत दी थी। इनाम घोषित होने के बाद पुलिस ने उन्हें पकड़ने के लिए खानापूर्ति भी की थी। लेकिन कार्रवाई नहीं कर पाई। तभी क्रिकेट खेलता हुआ उनका एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया, जिसके कारण वो विपक्षी नेताओं के निशाने पर आ गए थे।

बता दें कि, यूपी में सातवें और आखिरी चरण के चुनाव के लिए 7 मार्च को वोटिंग होगी। सातवें चरण में 9 जिलों के 54 सीटों पर मतदान होगा। जिसमें जौनपुर, आजमगढ़, मऊ, वाराणसी, गाजीपुर, संत रविदासनगर, मिर्जापुर, चंदौली और सोनभद्र जिलों में वोट डाले जाएंगे।

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