यूपी : करोड़ों खर्च करने के बाद भी पर्यावरण सुरक्षा के नाम पर कागजों में ही लग रहे ‘रस्म अदायगी के पेड़’

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यूपी : करोड़ों खर्च करने के बाद भी पर्यावरण सुरक्षा के नाम पर कागजों में लग रहे 'रस्म अदायगी के पेड़'

लखनऊ। पर्यावरण सुरक्षा को लेेकर यूपी सरकार पेड़ लगाने के तमाम दावे करती है। इसको लेकर खूब शोर भी सुनाई देता है। समय-समय पर वृक्षारोपण भी होता है लेकिन जमीन से ज्यादा यह कागजों में देखने को मिलता है। क्योंकि यह सिर्फ औपचारिकता भर निभाई जाती है। वहीं, जो पेड़ लगते भी हैं उनको सहेजने की कोई योजना भी नहीं है। लिहाजा वह पनपने से पहले ही दम तोड़ देते हैं।

Up Even After Spending Crores Trees Appearing On Paper In The Name Of Environmental Protection :

दिल्ली से लेकर उत्तर प्रदेश तक प्रदूषण बढ़ता जा रहा है। राजधानी लखनऊ समेेत कई शहरों की हवा में जहर घुल चुका है। इसका असर लोगों की सेहत पर भी पड़ने लगा है। बच्चों से लेकर बुजुर्ग तक बढ़ते प्रदूषण का शिकार हो रहे हैं। यह स्थिति पेड़ों की कटाई और कम वृक्षारोपण के कारण उत्तपन हो रही है। ऐसे में सरकार ने समय समय पर वृक्षारोपण भी कराया लेकिन यह अभियान सिर्फ रस्म अदायगी भर ही रह गया।

​वहीं, वृक्षारोपरण के दौरान जो पेड़ लगे भी उनको सहेजने की कोई योजना नहीं बनी। लिहाजा वह पनपने से पहले ही सूख गए। इस बीच वृक्षारोपण के नाम पर धांधली का एक ऐसा ही मामला लखनऊ में गोमती रिवर फ्रंट पर खाटू श्याम मंदिर से हनुमान सेतु के बीच सामने आया है, जहां एलडीए के कागज पर 4,324 पेड़ लगाए गए थे, जबकि जमीन पर सिर्फ 750 ही मिले।

वहीं, एक पड़ताल में सामने आया कि यहां करीब दो हजार पौधे मिले। इन्हें महज एक साल पहले ही रोपा गया था। इसके अलावा यहां बड़े पेड़ों की संख्या 750 के करीब मिली है। ऐसे में एलडीए की ओर से नगर निगम व शासन को भेजी गई रिपोर्ट पर सवाल खड़े हो गए हैं, जिसमें चार हजार से ज्यादा वृक्ष होने का दावा किया गया है।

आंकड़ो में हमेशा दिखाए जाते हैं ज्यादा वृक्षारोपण
वृक्षारोपण के दौरान सरकार की तरफ से करोड़ों रुपये खर्च किए जाते हैं। सरकार पर्यावरण सुरक्षा को लेकर चिंतित भी दिखती है लेकिन अफसर सरकार आंख में धूल झोंक देते हैं। पर्यावरण के जानकारों की माने तो वृक्षारोपण के नाम पर कागजों में आंकड़ों का भी खेल होता है। ऐसे में इस बात पर आश्चर्य नहीं करना चाहिए कि बजट खपाने के लिए रिवर फ्रंट पर कागजों में ज्यादा पौधरोपण दिखा दिया गया होगा।

लखनऊ। पर्यावरण सुरक्षा को लेेकर यूपी सरकार पेड़ लगाने के तमाम दावे करती है। इसको लेकर खूब शोर भी सुनाई देता है। समय-समय पर वृक्षारोपण भी होता है लेकिन जमीन से ज्यादा यह कागजों में देखने को मिलता है। क्योंकि यह सिर्फ औपचारिकता भर निभाई जाती है। वहीं, जो पेड़ लगते भी हैं उनको सहेजने की कोई योजना भी नहीं है। लिहाजा वह पनपने से पहले ही दम तोड़ देते हैं। दिल्ली से लेकर उत्तर प्रदेश तक प्रदूषण बढ़ता जा रहा है। राजधानी लखनऊ समेेत कई शहरों की हवा में जहर घुल चुका है। इसका असर लोगों की सेहत पर भी पड़ने लगा है। बच्चों से लेकर बुजुर्ग तक बढ़ते प्रदूषण का शिकार हो रहे हैं। यह स्थिति पेड़ों की कटाई और कम वृक्षारोपण के कारण उत्तपन हो रही है। ऐसे में सरकार ने समय समय पर वृक्षारोपण भी कराया लेकिन यह अभियान सिर्फ रस्म अदायगी भर ही रह गया। ​वहीं, वृक्षारोपरण के दौरान जो पेड़ लगे भी उनको सहेजने की कोई योजना नहीं बनी। लिहाजा वह पनपने से पहले ही सूख गए। इस बीच वृक्षारोपण के नाम पर धांधली का एक ऐसा ही मामला लखनऊ में गोमती रिवर फ्रंट पर खाटू श्याम मंदिर से हनुमान सेतु के बीच सामने आया है, जहां एलडीए के कागज पर 4,324 पेड़ लगाए गए थे, जबकि जमीन पर सिर्फ 750 ही मिले। वहीं, एक पड़ताल में सामने आया कि यहां करीब दो हजार पौधे मिले। इन्हें महज एक साल पहले ही रोपा गया था। इसके अलावा यहां बड़े पेड़ों की संख्या 750 के करीब मिली है। ऐसे में एलडीए की ओर से नगर निगम व शासन को भेजी गई रिपोर्ट पर सवाल खड़े हो गए हैं, जिसमें चार हजार से ज्यादा वृक्ष होने का दावा किया गया है। आंकड़ो में हमेशा दिखाए जाते हैं ज्यादा वृक्षारोपण वृक्षारोपण के दौरान सरकार की तरफ से करोड़ों रुपये खर्च किए जाते हैं। सरकार पर्यावरण सुरक्षा को लेकर चिंतित भी दिखती है लेकिन अफसर सरकार आंख में धूल झोंक देते हैं। पर्यावरण के जानकारों की माने तो वृक्षारोपण के नाम पर कागजों में आंकड़ों का भी खेल होता है। ऐसे में इस बात पर आश्चर्य नहीं करना चाहिए कि बजट खपाने के लिए रिवर फ्रंट पर कागजों में ज्यादा पौधरोपण दिखा दिया गया होगा।