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यूपी: होमगार्डस जवानों को अब समय पर मिलेगा वेतन, कैदियों के लिए 60 वर्ष की आयु सीमा की बाध्यता समाप्त

उत्तर प्रदेश के होमगार्ड्स एवं कारागार राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) धर्मवीर प्रजापित ने शुक्रवार अपने कार्यालय कक्ष में प्रेस प्रतिनिधियों के साथ वार्ता की। उन्होंने कहा कि लगभग 34 हजार होमगार्ड्स जवानों का वेतन अब होमगार्ड्स विभाग से दिया जायेगा। पहले उनका वेतन गृह विभाग से दिया जाता था।

By शिव मौर्या 
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लखनऊ। उत्तर प्रदेश के होमगार्ड्स एवं कारागार राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) धर्मवीर प्रजापित ने शुक्रवार अपने कार्यालय कक्ष में प्रेस प्रतिनिधियों के साथ वार्ता की। उन्होंने कहा कि लगभग 34 हजार होमगार्ड्स जवानों का वेतन अब होमगार्ड्स विभाग से दिया जायेगा। पहले उनका वेतन गृह विभाग से दिया जाता था। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री से अनुरोध किया था कि इन जवानों को ड्यूटी एवं वेतन हेतु गृह विभाग पर निर्भर रहने से उनके सामने समय-समय पर असहज स्थिति आती रहती है। इसी के दृष्टिगत मुख्यमंत्री ने बजट को गृह विभाग से अलग करते हुए होमगार्डस विभाग को दे दिया है।

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धर्मवीर प्रजापति ने बताया कि 25 हजार होमगार्डस जवान गृह विभाग से सम्बद्ध होकर विभिन्न थानों में एवं 8996 होमगार्डस जवान डॉयल 112 में तैनात हैं। इनके हेतु क्रमश: 755 करोड़ एवं 320 करोड़ की बजट की व्यवस्था थी। अब इस बजट को वित्त विभाग ने होमगार्डस विभाग को दे दिया है। उन्होने बताया कि होमगार्ड्स विभाग इसका भुगतान अपने अनुसार कर सकेगा। होमगार्डस जवानो के लिए ड्यूटी की समस्या का भी हल हो जायेगा।

होमगार्डस जवानों को गृह विभाग से ड्यूटी के भुगतान में विलम्ब होता था। जिसके कारण उन्हें अपने जीविकोपार्जन में कठिनाईयों का सामना करना पड़ता था परन्तु अब उनकों समय से ड्यूटी भत्ते का भुगतान हो सकेगा। इससे उनको भागदौड़ नहीं करनी पडेगी। उनकों समय से भुगतान प्राप्त होगा। राज्यमंत्री ने बताया कि, एक अन्य महत्वपूर्ण निर्णय के तहत आजीवन कारावास से निरूद्ध कैदियों से संबधित नियमावली में परिवर्तन किया गया है।

पहले आजीवन कारावास के तहत 16 या 20 साल की सजा पूरी कर लेने के बाद भी कैदियों को 60 वर्ष की आयु सीमा तक जेल में रहना पड़ता था। परन्तु अब इसमें बदलाव करते हुए 60 साल की अनिवार्यता को समाप्त कर दिया गया है। अब कोई भी कैदी अपनी 16 से 20 साल की सजा पूरी करने के बाद जेल से रिहा हो सकेगा। उन्होने बताया कि इससे कैदियों की मनोदशा में सकारात्मक बदलाव आया है।

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