यूपी के सिंचाई विभाग में भ्रष्टाचार की बाढ़, योगी का गोरखपुर भी चपेट में

लखनऊ। यूपी का सिंचाई विभाग इन दिनों भ्रष्टाचार की बाढ़ के चपेट में है। विभाग के अधिकारी तमाम परियोजनाओं पर काम कर रहे ठेकेदारों से बाढ़ के नाम पर कमीशन की मांग कर रहे हैं। सबसे तगड़ी बसूली चल रही है सिंचाई विभाग के गोरखपुर मंडल यानी गंडक में। सूत्रों की माने तो गंडक के चीफ इंजीनियर भानु प्रताप सिंह इन दिनों कमीशन बसूली में नए रिकार्ड बना रहे हैं। चीफ इंजीनियर ने मंत्री और विभाग के खर्चे के नाम पर ठेकेदारों से 11 प्रतिशत कमीशन की डिमांड की है। स्पष्ट निर्देश है कि ठेकेदार को भुगतान लेने के लिए इस डिमांड को पूरा पड़ेगा।

सूत्रों की माने तो सिंचाई विभाग के गंडक मंडल में मई 2017 में सिंचाई विभाग ने करीब 150 करोड़ की बाढ़ सुरक्षा के काम शुरू करवाए थे। ई टेंडरिंग के माध्यम से दिए गए ठेकों में विभाग में चलने वाले शिष्टाचार को पूरा करने के बाद ठेकेदारों के अनुबंध तैयार किए गए। बारिश की शुरुआत को करीब देखते हुए ये काम को दो महीनों में पूरे किए जाने थे। शुरूआती बारिश अच्छी होने से, नदियों का जल स्तर तेजी से बढ़ गया। इस समय तक कुछ काम 50 से 60 फीसदी पूरा हुए थे, तो कुछ 20 से 40 फीसदी। लेकिन कागजों पर काम पूरा दिखाकर भुगतान की प्रक्रिया शुरू कर दी गई। गंडक के चीफ इंजीनियर अब ठेकेदारों को हो रहे इसी फायदे में से मंत्री को खुश करने और अपनी कमाई का रास्ता बना चुके हैं।

{ यह भी पढ़ें:- सिंचाई विभाग के भ्रष्ट इंजीनियर राजेश्वर सिंह के ठिकानों पर आईटी की छापेमारी }

बताया जाता है कि सिंचाई विभाग की अंदरूनी सच्चाई बहुत ही कड़वी है। बाढ़ सुरक्षा के लिए हर साल करोड़ों का बजट आता है लेकिन जमीन पर 20 से 30 फीसदी ही पहुंचता है। लगभग 70 फीसदी बजट विभाग के अधिकारियों के कमीशन और ठेकेदारों की तिजोरियों में जाता है।

सिंचाई मंत्री के कृपापात्र बने चीफ इंजीनियर भानु प्रताप सिंह —

{ यह भी पढ़ें:- गहने-मंगलसूत्र बेंच बहू ने बनवाया 'टॉयलेट', अब महिलाओं को कर रही जागरूक }

पर्दाफाश के सूत्रों की माने गंडक के चीफ इंजीनियर भानु प्रताप सिंह नई सरकार बनने के बाद से विभागीय मंत्री धर्मपाल सिंह की नजरों में अपने नंबर बढ़ाने में लगे थे। बाढ़ सुरक्षा के ठेकों में उन्होंने जमकर कमाई की और लखनऊ तक पहुंचाई। उन्होंने मंत्री का भरोसा इस तरह से जीत लिया है कि वह गंडक में अपनी तैनाती बचाने में कामयाब रहे। इसके साथ ही मंत्री ने उन्हें फैजाबाद सरयू नहर परियोजना का चीफ भी बना दिया। अब वह गंडक के ठेकेदारों से मंत्री और विभाग के नाम पर 6 और 5 प्रतिशत के कमीशन की डिमांड कर रहे है।

धर्मपाल सिंह ने बढ़ाया भानु प्रताप सिंह का कद —

{ यह भी पढ़ें:- मासूमों की कब्रगाह बने सरकारी अस्पताल, यूपी के बाद महाराष्ट्र में 55 नवजातों की थमी सांसे }

गंडक के चीफ इंजीनियर के तौर पर अपनी तैनाती को बचाने में कामयाब रहे भानु प्रताप सिंह और धर्मपाल सिंह के बीच संबन्ध सिंचाई विभाग के अाधिकारियों के बीच चर्चा का विषय बने हुए हैं। जिसकी बड़ी वजह है उन्हें फैजाबाद सरयू नहर परियोजना यानी फैजाबाद मंडल के चीफ इंजीनियर का अतिरिक्त पदाभार ​मिलना। जिसके बाद कहा जा रहा है कि योगी सरकार में भानु प्रताप सिंह एक मात्र ऐसे चीफ इंजीनियर हैं जिनकी ताकत बढ़ी है। उनकी चर्चा धर्मपाल सिंह के सबसे कृपापात्र चीफ इंजीनियर के रूप में होती है।

यूपी के सिंचाई विभाग में चलता है सबसे मोटा कमीशन—

सिंचाई विभाग की कार्यशैली को करीब से जानने वाले लोग कहते हैं कि इस ​विभाग में एक काम कर लेने मात्र से ठेकेदार करोड़पति हो जाता है। नहरों की सिल्ट सफाई से लेकर बाढ़ नियंत्रण और बाढ़ सुरक्षा के काम यही विभाग करवाता है। इन कामों के लिए हजारों करोड़ का बजट हर साल आता है। जिसमें से 40 फीसदी बजट ही जमीन तक पहुंचता है बाकी बजट का मैनेजमेंट विभाग के इंजीनियरों की रिपोर्ट में किया जाता है।

नहर की सफाई के नाम पर किनारों पर घास की छिलाई की जाती है और फिर बरसात का इंतजार होता है। नहर में पानी आने के साथ ही इंजीनियर अपनी रिपोर्ट लगा देता है और ठेकेदार को शत प्रतिशत काम का भुगतान किया जाता है। बरसात खत्म होने के बाद नहर में नई सिल्ट दिखाकर नया टेंडर तैयार कर दिया जाता है। ऐसा ही कुछ बाढ़ सुरक्षा और ​बाढ़ नियंत्रण के मामले में होता है। बांधों की मरम्मत हर साल होने के बावजूद बाढ़ उसे काट देती है। कटान के बाद न तो ठेकेदार की जवाबदेही रह जाती है और न ही विभागीय इंजीनियरों की, क्योंकि कटान को प्राकृतिक आपदा की नजर से देखा जाता है। वास्तविकता में बांधों में कटान बांधों की मरम्मत में होने वाले भ्रष्टाचार की वजह से होता है, जिसे विभागीय अधिकारियों की मिली भगत की वजह से साबित नहीं किया जा सकता।

{ यह भी पढ़ें:- गोरखपुर के बाद फर्रुखाबाद में ऑक्सीज़न की कमी से 49 बच्चों की मौत, CMO-CMS निलंबित }

Loading...