जल निगम भर्ती घोटाला: एसआईटी ने आजम खां को भेजा नोटिस

आजम खां
जल निगम भर्ती घोटाला: एसआईटी ने आजम खां को भेजा नोटिस
लखनऊ। यूपी जल निगम में 1300 कर्मचारियों की भर्ती में हुई अनियमितता की जांच कर रही एसआईटी ने सोमवार को सेवानिवृत्त आईएएस एसपी सिंह और ओएसडी आफाक अहमद का बयान सोमवार को दर्ज किया है। जिसके बाद एसआईटी ने पूर्व कैबिनेट मंत्री मो. आजम खां को नोटिस भेजा है। बता दें कि निर्वासित सरकार में एसपी सिंह की गिनती मो. आजम खां के सबसे विश्वसनीय अधिकारी के रूप में होती थी, जिस वजह उन्हें रिटायर होने के बाद एक के…

लखनऊ। यूपी जल निगम में 1300 कर्मचारियों की भर्ती में हुई अनियमितता की जांच कर रही एसआईटी ने सोमवार को सेवानिवृत्त आईएएस एसपी सिंह और ओएसडी आफाक अहमद का बयान सोमवार को दर्ज किया है। जिसके बाद एसआईटी ने पूर्व कैबिनेट मंत्री मो. आजम खां को नोटिस भेजा है।

बता दें कि निर्वासित सरकार में एसपी सिंह की गिनती मो. आजम खां के सबसे विश्वसनीय अधिकारी के रूप में होती थी, जिस वजह उन्हें रिटायर होने के बाद एक के बाद एक सेवा विस्तार देकर नगर विकास विभाग का सचिव बनाए रखा गया, इस दौरान नगर विकास जैसे अहम विभाग में किसी प्रमुख सचिव की नियुक्ति नहीं की गई। एसपी सिंह के अलावा आफाक अहमद वह दूसरे व्यक्ति थे जिन्हें बतौर आजम खां ने बतौर चेयरमैन जल निगम अपना ओएसडी नियुक्त किया था। जल निगम के नीतिगत मामलों में आफाक अहमद की सीधी दखलंदाजी रहती थी।

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यूपी जल निगम, प्रासाशनिक दृष्टिकोण से नगर विकास विभाग के अंतर्गत आता है। पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को साल 2012 में सत्ता मिलने के बाद नगर विकास विभाग के मंत्री मो. आजम खां बनाए गए थे। नगर विकास विभाग का मंत्री होने के नाते आजम खां ने मनमानी करते हुए जल निगम के चेयरमैन की कुर्सी भी हथिया रखी थी, नियमानुसार इस पद पर कोई आईएएस अधिकारी या फिर सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी नियुक्त किया जाता है। आजम खां ने जल निगम पर नजर रखने के लिए निगम से ही सेवानिवृत्त अपने विश्वासपात्र मो. आफाक अहमद को अपने ओएसडी के रूप में नियु​क्त किया।

यूपी जल निगम की जिन 1300 भर्तियों में अनियमितता के सवाल उठाए गए है, उनकी विभागीय जांच पहले ही हो चुकी है। जिसमें भर्ती हुए आवेदकों को पक्षपातपूर्ण तरीके से अधिक अंक देने और परिक्षा परिणाम घोषित करने के तरीकों से लेकर परीक्षा करवाने वाली प्राइवेट एजेंसी के चयन और उसके द्वारा उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन पर सवाल खड़े किए गए थे। अलग अलग ​भर्तियों के लिए हुई लिखित परीक्षा की उत्तर पुस्तिकाएं आॅनलाइन जारी नहीं होने के बाद हंगामा खड़ा हुआ था। उत्तर प्रदेश में चुनाव आचार सहिंता लागू होने से पहले आनन फानन में इन भर्तियों के परिणाम घोषित होना और चंद घंटों में सफल उम्मीदवारों को नियुक्ति पत्र जारी करना इन भर्तियों को संदेह के घेरे में लाकर खड़ा कर गया था।

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इस भर्ती घोटाले में जल निगम के तत्कालीन प्रबंध निदेशक और अन्य विभागीय जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका पूरी तरह से संदिग्ध नजर आती है। इसके अलावा इन भर्तियों में तत्कालीन नगर सचिव एसपी सिंह और पूर्व कैबिनेट मंत्री मो. आजम खां के हस्तक्षेप की चर्चा भी होती रही है।

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