जल निगम भर्ती घोटाला: आजम खां ने सोच समझकर नोटिंग के साथ किए थे हस्ताक्षर

UP Jal Nigam, जल निगम भर्ती घोटाला
जल निगम भर्ती घोटाला: आजम खां ने सोच समझकर नोटिंग के साथ किए थे हस्ताक्षर

लखनऊ । यूपी जल निगम में 1300 कर्मियों की भर्ती के मामले में गंभीर आरोपों का सामना कर रहे पूर्व कैबिनेट मंत्री और जल निगम के चेयरमैन मो. आजम खां ने भर्ती से जुड़े कई ऐसे अहम दस्तावेजों पर हस्ताक्षर किए हैं, जिनसे जल निगम की भर्तियों को प्रभावित किया गया। कुछ ऐसे ही दस्तावेजों ने एसआईटी को मो. आजम खां के खिलाफ भर्ती घोटाले में मामला दर्ज करवाने के लिए मजबूर कर दिया है।

Up Jal Nigam Bharti Scam Azam Khan Signed Documents :

टीम पर्दाफाश के हाथ में ही एक ऐसा दस्तावेज लगा है, जिसमें जल निगम के निदेशक मंडल ने यांत्रिक एवं विद्युत शाखा के लिए निर्धारित सहायक अभियंता के 09 पदों में से 04 पदों को कंप्यूटर साइंस और इलेक्ट्रिकल के लिए आ​रक्षित करने का प्रस्ताव रखा था। जिसके लिए जल निगम के अध्यक्ष यानी चेयरमैन के रूप में मो. आजम खां ने छह लाइनों की हस्तलिखित नोटिंग के बाद सहमत लिखकर अपने हस्ताक्षर किए हैं। इस दस्तावेज को देखकर कहा जा सकता है कि आजम खां ने पूरे दस्तावेज को पढ़ने के बाद अपनी टिप्पणी करके ही हस्ताक्षर किए हैं। उनकी टिप्पणी संभवतय: किसी अन्य व्यक्ति द्वारा लिखी गई है, लेकिन ऐसा नहीं कहा जा सकता कि किसी ने धोखा देकर आजम खां से हस्ताक्षर करवाए हैं।

जो व्यक्ति मो. आजम खां के काम करने के तरीके को जानते हैं, वे इस बात से भली तरह से बाकिफ हैं कि वह किसी विधायक की सिफारिशी चिट्ठी पर कार्रवाई करने से पहले चिट्ठी को पूरा पढ़ने के बाद जरूरी होने पर ही स्वीकृति देते थे। विधायकों की मांग भी जायज न होने पर वह चिट्ठी पर गंभीर टिप्पणी करने से चूकते नहीं थे। आजम खां जैसे व्यक्ति द्वारा धोखे से हस्ताक्षर करवा लिए जाने की बात गले से नहीं उतरती।

भर्तियों को लेकर ही पीके आसुदानी से खफा हुए थे आजम—

पर्दाफाश के सूत्रों की माने तो आजम खां और जल निगम के तत्कालीन एमडी पीके आसुदानी के बीच अंत के दिनों में रिश्ते बेहतर नहीं रहे थे। आजम और आसुदानी के बीच की खटास का कारण भी भर्तियों को लेकर मंत्री जी की अतिरिक्त दखलंदाजी ही बना था। आसुदानी भर्तियों को लेकर अपनी चलाना चाहते थे, जबकि मंत्री रहे आजम खां अपने हिसाब से भर्तियां करवाना चाहते थे।

कहा जाता है कि एक समय आसुदानी इतने दबाव में थे कि वह लंबी छुट्टी पर चले गए थे। चूंकि आसुदानी लंबे समय से जल निगम के एमडी थे और फरवरी 2107 में उन्हें सेवानिवृत्त भी होना था, इस वजह से आजम खां उन्हें चाह कर भी उन्हें हटा नहीं पाए। शायद आजम खां जानते थे कि उनकी सरकार का कार्यकाल पूरा हो रहा है और आसुदानी को हटाने के बाद भर्तियों ​की प्रक्रिया अधर में लटक जाएगी। वह बेवजह आसुदानी के साथ विवाद में फंसकर रह जाएंगे।

लखनऊ । यूपी जल निगम में 1300 कर्मियों की भर्ती के मामले में गंभीर आरोपों का सामना कर रहे पूर्व कैबिनेट मंत्री और जल निगम के चेयरमैन मो. आजम खां ने भर्ती से जुड़े कई ऐसे अहम दस्तावेजों पर हस्ताक्षर किए हैं, जिनसे जल निगम की भर्तियों को प्रभावित किया गया। कुछ ऐसे ही दस्तावेजों ने एसआईटी को मो. आजम खां के खिलाफ भर्ती घोटाले में मामला दर्ज करवाने के लिए मजबूर कर दिया है।टीम पर्दाफाश के हाथ में ही एक ऐसा दस्तावेज लगा है, जिसमें जल निगम के निदेशक मंडल ने यांत्रिक एवं विद्युत शाखा के लिए निर्धारित सहायक अभियंता के 09 पदों में से 04 पदों को कंप्यूटर साइंस और इलेक्ट्रिकल के लिए आ​रक्षित करने का प्रस्ताव रखा था। जिसके लिए जल निगम के अध्यक्ष यानी चेयरमैन के रूप में मो. आजम खां ने छह लाइनों की हस्तलिखित नोटिंग के बाद सहमत लिखकर अपने हस्ताक्षर किए हैं। इस दस्तावेज को देखकर कहा जा सकता है कि आजम खां ने पूरे दस्तावेज को पढ़ने के बाद अपनी टिप्पणी करके ही हस्ताक्षर किए हैं। उनकी टिप्पणी संभवतय: किसी अन्य व्यक्ति द्वारा लिखी गई है, लेकिन ऐसा नहीं कहा जा सकता कि किसी ने धोखा देकर आजम खां से हस्ताक्षर करवाए हैं।जो व्यक्ति मो. आजम खां के काम करने के तरीके को जानते हैं, वे इस बात से भली तरह से बाकिफ हैं कि वह किसी विधायक की सिफारिशी चिट्ठी पर कार्रवाई करने से पहले चिट्ठी को पूरा पढ़ने के बाद जरूरी होने पर ही स्वीकृति देते थे। विधायकों की मांग भी जायज न होने पर वह चिट्ठी पर गंभीर टिप्पणी करने से चूकते नहीं थे। आजम खां जैसे व्यक्ति द्वारा धोखे से हस्ताक्षर करवा लिए जाने की बात गले से नहीं उतरती।

भर्तियों को लेकर ही पीके आसुदानी से खफा हुए थे आजम—

पर्दाफाश के सूत्रों की माने तो आजम खां और जल निगम के तत्कालीन एमडी पीके आसुदानी के बीच अंत के दिनों में रिश्ते बेहतर नहीं रहे थे। आजम और आसुदानी के बीच की खटास का कारण भी भर्तियों को लेकर मंत्री जी की अतिरिक्त दखलंदाजी ही बना था। आसुदानी भर्तियों को लेकर अपनी चलाना चाहते थे, जबकि मंत्री रहे आजम खां अपने हिसाब से भर्तियां करवाना चाहते थे।कहा जाता है कि एक समय आसुदानी इतने दबाव में थे कि वह लंबी छुट्टी पर चले गए थे। चूंकि आसुदानी लंबे समय से जल निगम के एमडी थे और फरवरी 2107 में उन्हें सेवानिवृत्त भी होना था, इस वजह से आजम खां उन्हें चाह कर भी उन्हें हटा नहीं पाए। शायद आजम खां जानते थे कि उनकी सरकार का कार्यकाल पूरा हो रहा है और आसुदानी को हटाने के बाद भर्तियों ​की प्रक्रिया अधर में लटक जाएगी। वह बेवजह आसुदानी के साथ विवाद में फंसकर रह जाएंगे।