जौहर विवि में पानी की दो टंकियां बनाकर फंसा जल निगम, जवाब ने आजम की नियत पर उठाए सवाल

जौहर विवि , जल निगम, आजम
जौहर विवि में पानी की दो टंकियां बनाकर फंसा जल निगम, जवाब ने आजम की नियत पर उठाए सवाल
उत्तर प्रदेश। पूर्व कैबिनेट मंत्री मो. आजम खां के रामपुर स्थित मौलाना जौहर अली विश्वविद्यालय में सरकारी खर्चे पर पानी की दो टंकियां बनवाना यूपी जल निगम के अधिकारियों के गले की फांस बनता नजर आ रहा है।सूचना का अधिकार कानून 2005 (आरटीआई) के तहत यूपी जल निगम से मांगी जानकारी में रामपुर के अधिशासी अभियंता ने बताया है कि जौहर विश्व विद्यालय में बने 2600 केएल और 650 केएल के दो ओवर हैड टैंक सींगनखेड़ा गांव में जलापूर्ति के…

उत्तर प्रदेश। पूर्व कैबिनेट मंत्री मो. आजम खां के रामपुर स्थित मौलाना जौहर अली विश्वविद्यालय में सरकारी खर्चे पर पानी की दो टंकियां बनवाना यूपी जल निगम के अधिकारियों के गले की फांस बनता नजर आ रहा है।सूचना का अधिकार कानून 2005 (आरटीआई) के तहत यूपी जल निगम से मांगी जानकारी में रामपुर के अधिशासी अभियंता ने बताया है कि जौहर विश्व विद्यालय में बने 2600 केएल और 650 केएल के दो ओवर हैड टैंक सींगनखेड़ा गांव में जलापूर्ति के लिए बनाए गए थे, लेकिन अब इन टैंक का पानी गांव को देने की जरूरत नहीं है, क्योंकि गांव में पानी आपूर्ति के लिए दूसरी टंकी मौजूद है।

आरटीआई के तहत यूपी जल निगम से पूछा गया था कि ​सींगनखेड़ा गांव के लिए 2600 केएल और 650 केएल के ओवर हैडटैंक जौहर विवि की भूमि पर क्यों बनाए गए?

{ यह भी पढ़ें:- BJP पार्टी की आमदनी 81.18 फीसदी बढ़ी, कांग्रेस की 14 फीसदी घटी }

जिसके जवाब में जल निगम ने बताया है कि सींगनखेड़ा गांव में नि:शुल्क भूमि उपल​ब्ध न होने की स्थिति में विभाग ने जौहर विवि की भूमि पर टैंकों का निर्माण करवाया था।

इस क्रम में दूसरा सवाल सींगनखेड़ा गांव को इन दोनों टंकियों से पानी न देने को लेकर पूछा गया।जिसके जवाब में निगम की ओर से बताया गया है कि गांव और जौहर विवि के बीच आने वाली सड़क के चौरीकरण के चलते कनेक्शन काटना पड़ा था।

{ यह भी पढ़ें:- किसानों की जान बचाने पर नहीं विपक्षी नेताओं को परेशान करने पर योगी सरकार का ध्यान: अखिलेश यादव }

तीसरा सवाल सींगनखेड़ा गांव को इन टंकियों से दोबारा सप्लाई दिए जाने के ​संदर्भ में पूछा गया। जिसके जवाब में जल निगम ने बताया है, कि सींगनखेड़ा गांव को अब इन दोनों ओवर हैड टैंकों से पानी नहीं दिया जाएगा। सींगनखेड़ा में जल आपूर्ति के लिए अन्य ओवर हैड टैंक मौजूद है।

अपने ही जवाबों में फंसा जल निगम—

आरटीआई के तहत पूछे गए पहले और तीसरे सवाल के जवाब गोल गोल घुमाते नजर आते हैं। एक सवाल के जवाब में जल निगम स्वीकार कर रहा है कि सींगनखेड़ा गांव में नि:शुल्क भूमि उपलब्ध नहीं थी। वहीं तीसरे सवाल के जवाब में जलनिगम सींगनखेडा गांव में दूसरे ओवर हैड टैंक के बने होने बात स्वीकार रही है।

{ यह भी पढ़ें:- जल निगम भर्ती घोटाला: आजम खां ने सोच समझकर नोटिंग के साथ किए थे हस्ताक्षर }

अब सवाल उठता है कि अगर टंकी पहले से मौजूद थी और वह पूरे गांव की जल आपूर्ति करने की क्षमता भी रखती थी, तो दो नई पानी की टंकियां क्यों बनाई गईं ?

यदि पानी की टंकी पहले से मौजूद नहीं थी और बाद में बनवाई गई, तो सींगनखेड़ा में नि:शुल्क भूमि का हवाला जौहर विवि में दो टंकियां बनवाने का औचित्य क्या था ?

मो.आजम खां के प्रभाव में जौहर विवि के लिए बनी थी टंकियां—

जल​ निगम की रामपुर यूनिट के अधिशासी अभियंता की ओर से आरटीआई के जवाब में दिए गए जवाब तर्कहीन और आधारहीन नजर आ रहे हैं। शायद जल निगम इस बात को स्वीकार नहीं करना चाहता कि उसके जिम्मेदार अधिकारियों ने निर्वासित सरकार में जल निगम के चेयरमैन रहे मो. आजम खां के दबाव में आकर सींगनखेड़ा गांव के नाम पर करोड़ों की लागत से 2600 केएल और 650 केएल के दो ओवर हैड टैंक जौहर विवि में बनावाए। इन दोनों ही ओवर हैड टैंक और उनके साथ बने नलकूपों का पानी जौहर विवि में प्रयोग किया जाता है।

{ यह भी पढ़ें:- जल निगम भर्ती घोटाला: एसआईटी ने आजम खां को भेजा नोटिस }

निर्वासित सरकार में जौहर विवि को ध्यान में रखते हुए करोड़ों रुपए की सरकारी योजनाएं रामपुर में चलाई गईं। कागजों में ये योजनाएं जनकल्याण की थीं लेकिन वास्तविकता में उन योजनाओं का आमजनों से कोई सरोकार नहीं था। ऐसा ही इन दो ओवर हैड टैंक के मामाले में है। जिनका निर्माण कागाजों में तो ​सींगनखेड़ा गांव की प्यासी जनता के लिए किया गया, लेकिन इन टंकियों का पानी कभी उन लोगों तक नहीं पहुंचा जो सरकारी खातों में इसके लाभार्थी दिखाए गए थे।

Loading...