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योगी राज में नियम ताक पर, ब्याज से सैलरी दे रहा यूपी जल निगम

यूपी जल निगम
पीएम मोदी का इज़राइली करार यूपी जल निगम के लिए बेकार

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में सीएम योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली सरकार बनने के साथ कई सरकारी विभागों के सामने अलग—अलग आर्थिक समस्याओं ने सिर उठा लिया है। ऐसा ही एक विभाग है यूपी जल निगम। सूत्रों की माने तो यूपी जल निगम के कर्मचारी योगी सरकार बनने के बाद से सैलरी के लिए मोहताज है। इस समस्या का हल निकालने के लिए विभाग ने कानून को ताक पर रखकर अपने कर्मचारियों को दो महीनों की सैलरी एक साथ दी है।

सूत्रों से मिल रही जानकारी के मुताबिक जल निगम इन दिनों अपने खाते में ब्याज से जमा हुई करीब 500 करोड़ की रकम से अपने कर्मचारियों के वेतन का भुगतान कर रहा है। प्रदेश में नई सरकार बनने के बाद से इस विभाग के कर्मचरियों के सामने वेतन की समस्या ने सिर उठा लिया था। मार्च में आए चुनाव के नतीजों और नई सरकार के गठन के साथ बजट जारी करने में हुई देरी के चलते जल निगम अपने कर्मचारियों को करीब पांच महीनों तक सैलरी नहीं दे सका। सैलरी के बढ़ते बोझ के चलते निगम के चेयरमैन ने सीनियर अधिकारियों की सलाह पर ब्याज के खाते से कर्मचारियों को वेतन देने का फरमान जारी कर दिया।

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ब्याज के खाते से नहीं हो सकता भुगतान —

सूत्रों की माने तो यूपी जल निगम के खातों में हर साल अलग अलग योजनाओं के नाम पर हजारों करोड़ रुपए जमा होते हैं। यह रकम योजनाओं पर खर्च करने के लिए आती है। जिसे जल निगम मुख्यालय से योजना की प्र​गति के आधार पर किश्तों में अलग अलग यूनिटों को जारी किया जाता है। खर्च होने तक यह रकम जल निगम के खातों में जमा रहती है जिस पर बैंक ब्याज देता है।

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जल निगम के सूत्रों की माने तो वर्तमान समय में जल निगम के खातों में ब्याज से हुई आमदनी के रूप में करीब 500 करोड़ जमा है। बजट न होने के कारण जल निगम ने इसी ब्याज से अपने कर्मचारियों को दो महीने की सैलरी दी है। जो नियमानुसार गलत है। जल निगम के संविधान के अनुसार ब्याज से होने वाली आमदनी को ​निगम अपनी योजनाओं की मरम्मत और देखरेख के कामों पर ही खर्च कर सकती है।

चेयरमैन को गुमराह कर करवाया गया आदेश —

हमारे सूत्र बताते हैं कि योगी सरकार में यूपी जल निगम के चेयरमैन बने सेवानिवृत आईएएस जी पटनायक ने ही निगम को सैलरी की समस्या से उबारने के लिए ब्याज की रकम से सैलरी जारी करने के आदेश ​जारिए किए हैं। अब सवाल उठता है कि क्या चेयरमैन को इस बात की जानकारी थी कि ब्याज की रकम से सैलरी का भुगतान हो सकता है। अगर चेयरमैन को इस बात की जानकारी नहीं थी तो उन्हें अंधेरे में रखकर ऐसा आदेश जारी करवाने वाले कौन अधिकारी हैं, जिन्होंने चेयरमैन को गुमराह किया।

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जल निगम कहां से लाता है अपनी सैलरी —

पर्दाफाश को मिली जानकारी के मुताबिक यूपी जल निगम को जो योजनाएं मिलतीं हैं उनपर काम करने के लिए उसे सैन्ट्रेज के रूप में 12.5 प्रतिशत निजी खर्चों को पूरा करने के लिए मिलते हैं। इसी सैन्ट्रेज से जल निगम अपने कर्मचारियों की सैलरी व अन्य खर्चों को पूरा करता है।

वर्तमान समय में जल निगम प्रति माह करीब 72 करोड़ की सैलरी का भुगतान करता है। हाल ही में जल निगम ने अपने कर्मचारियों को दो महीनों की सैलरी दस दिनों के अंतराल पर जारी की है। जबकि करीब दो से तीन महीनों की सैलरी अभी का भुगतान लंबित है।

मंत्री सुरेश खन्ना और प्रमुख सचिव के पास नहीं है समस्या का हल —

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यूपी जल निगम प्रदेश के सबसे अहम काम करता है। प्रदेश की पेय जल और सीवर से जुड़ी शत प्रतिशत योजनाएं जल निगम के ही भरोसे चलाई जातीं हैं। इसके अलावा जल निगम गंगा और यमुना की सफाई को सुनिश्चित करने के कार्यक्रमों से भी जुड़ा है। नदियों की सफाई का काम प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली केन्द्र सरकार की प्राथमिकता है।

ऐसी परिस्थितियों में जल निगम की बद्हाली का ठीकरा किसके सिर फूटेगा यह समझ से परे नजर आता है। नगर विकास मंत्री सुरेश खन्ना भी जल निगम की अहमियत को समझते हैं और प्रमुख सचिव नगर विकास मनोज सिंह भी इस बात को जानते होंगे। इसके बावजूद मंत्री बनने के बाद वह जल निगम के कर्मचारियों की सैलरी की समस्या को दूर क्यों नहीं कर पाए यह अपने आप में बड़ा सवाल है।

तमाम विभागों में हालात ऐसे ही —

योगी सरकार के अस्तित्व में आने के बाद से लेकर अब तक यूपी सरकार के तमाम विभागों के सामने आर्थिक समस्याएं खड़ीं हैं। सैकड़ों सरकारी प्रोजेक्ट बजट जारी न होने की वजह से रुके पड़े हैं। करीब छह महीनों से तमाम सरकारी विकास कार्य बाधित हैं। जिस वजह से विभागों के वेतन भी रुके हुए हैं। वर्तमान हालातों की बात की जाए तो सरकार की ओर से विभागों को तो बजट जारी कर दिया गया है लेकिन अब विभाग अपने प्रोजेक्ट्स की बजटिंग का काम कर रहे हैं।

 

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